क्रिकेटर से कॉमेडियन और राजनेता बने नवजोत सिंह सिद्धू कैप्टन की 'सेना' के बड़े खिलाड़ी बन गए हैं। उनकी जिंदगी और राजनीतिक कैरियर पर एक नजर।
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नवजोत सिंह सिद्धू
बीजेपी से और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर राजनीति में खलबली मचाने के बाद सिद्धू ने मझे हुए राजनेता की तरह चाल चली। पहले आवाज-ए-पंजाब नाम से राजनीतिक फ्रंट बनाया। कांग्रेस में उसका विलय करने की सोची, पर बात नहीं बनी। फिर खुद कांग्रेस ज्वॉइन कर ली और अब विधानसभा चुनाव जीतकर नई सरकार में अहम भूमिका निभाने आ गए हैं। उन्होंने पद की गोपनीयता की शपथ ले ली है।
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नवजोत सिंह सिद्धू
- फोटो : अमर उजाला
सिद्धू 2004 में राजनीति में आए और छा गए। उन्होंने अमृतसर से पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा थी और कांग्रेस के आर एल भाटिया को 90 हजार वोटों से मात दी थी। कांग्रेस के जिन सांसद को सिद्धू ने मात दी उनके कद का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद भी वह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते थे। ऐसे दिग्गज को हराया तो स्वभाविक था कि पंजाब की राजनीति में सिद्धू का कद एकाएक ही बड़ा हो गया।
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नवजोत सिंह सिद्धू
- फोटो : अमर उजाला
2009 के लोकसभा चुनाव में वह दोबारा जीते लेकिन 2014 में बीजेपी ने उनका टिकट तो काटा लेकिन राज्यसभा के रास्ते सिद्धू को संसद भेजना ही पड़ा। पूरे दस साल सिद्धू अमृतसर से सांसद रहे और अब स्थापित नेता हैं। सिद्धू के पिता कांग्रेस के जिला पदाधिकारी रहे हैं। अब सिद्धू और उनकी पत्नी का अमृतसर क्षेत्र में खूब प्रभाव है। अब तो वे सत्ता में आने जा रहे हैं तो निश्चित ही पंजाब में बदलाव देखने को मिलेंगे।
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नवजोत सिंह सिद्धू
- फोटो : फाइल फोटो
नवजोत सिंह सिद्धू का जन्म 20 अक्टूबर 1963 को पंजाब राज्य के पटियाला जिले में हुआ था। उनके पिता सरदार भगवंत सिंह सिद्धू भी एक क्रिकेटर थे और वो अपने बेटे नवजोत को एक उच्च श्रेणी के क्रिकेटर के रूप में देखना चाहते थे। सिद्धू ने पटियाला के यदिवेंद्र स्कूल से प्रारम्भिक शिक्षा और चंडीगढ़ के मोहिन्द्रा कॉलेज से स्नातक उत्तीर्ण की और वो पंजाव यूनिवर्सिटी से कानून विषय में स्नातक है।
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नवजोत सिंह सिद्धू
- फोटो : फाइल फोटो
नवजोत सिंह की पत्नी का नाम नवजोत कौर है, जो पेशे से एक डॉक्टर हैं और सिद्धू की तरह राजनेता भी। सिद्धू की एक बेटी राबिया और एक पुत्र करण है। सिद्धू बहुत खुशमिजाज और सात्विक व्यक्ति हैं, जो न सिगरेट पीते हैं और न ही शराब पीते हैं। अपनी शेरों-शायरी से भी वे लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। लोग उन्हें सिद्धू सिक्सर, सिद्धू पाजी और शेरा पाजी कहकर भी पुकारते हैं।
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नवजोत सिंह सिद्धू
नवजोत सिंह सिद्धू का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर 1983 से लेकर 1999 तक रहा था। उन्होंने अपना पहला टेस्ट मैच 1983 में वेस्ट इंडीज के खिलाफ अहमदाबाद में खेला था। सिद्धू ने अपना पहला एकदिवसीय शतक 1989 में पाकिस्तान के विरुद्ध शारजाह में लगाया था। सिद्धू ने अपना अंतिम टेस्ट मैच 6 जनवरी 1999 में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था, जबकि अंतिम एकदिवसीय मैच 20 सितम्बर 1998 को पाकिस्तान के विरुद्ध खेला था। इसके बाद दिसम्बर 1999 में उन्होंने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट में सन्यास की घोषणा कर दी।
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नवजोत सिंह सिद्धू
सिद्धू ने 2001 में भारत के श्रीलंका दौरे से बतौर कमेंटेटर अपना करियर शूरू कर दिया। कमेंटेटर के तौर पर सिद्धू ने अपनी अलग पहचान बनाई और वो अपनी वन लाइनर्स के कारण फेमस हो गये जिसे हम “Sidhuisms” कहते हैं। उन्होंने शुरुआत में ईएसपीएन-स्टार और बाद में टेन स्पोर्ट्स के लिए काम किया। इसके बाद भारत के समाचार चैनलों पर क्रिकेट विश्लेषण के तौर पर दिखने लगे। आजकल वे आईपीएल में हिंदी कमेन्ट्री करते हैं।
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नवजोत सिंह सिद्धू
- फोटो : फाइल फोटो
सिद्धू ने टीवी करियर की शुरुआत ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ शो के साथ हुई थी। कपिल शर्मा के शो से भी उन्हें बहुत लोकप्रियता मिली। उन्होंने नाटक फंजाबी चक दे में भी बतौर जज काम किया। इसके बाद बिग बॉस 6 के प्रतिभागी रहे और कुछ सप्ताह रहने के बाद राजनीतक विवादों के कारण उन्हें शो बीच में ही छोड़ना पड़ा। इसके बाद वे कपिल शर्मा के साथ कॉमेडी नाइट्स विद कपिल में नजर आये। इसके आलावा सिद्धू कुछ हिंदी और पंजाबी फिल्मो में भी नजर आये।
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नवजोत सिंह सिद्धू
सिद्धू भारतीय क्रिकेट के भुतपूर्व खिलाड़ी है, जिन्होंने क्रिकेट में भले ही बल्लेबाजी का जलवा दिखाया हो, लेकिन निजी जीवन में वो आल राउंडर हैं। वर्तमान में आपको नवजोत सिंह टीवी में हर जगह दिख जायेंगे। एक तरफ आईपीएल में अपनी हिंदी कमेंट्री से लुभा रहे हैं तो दूसरी तरफ कार्यक्रमों में अपनी हंसी का जलवा बिखेरते रहते हैं। नवजोत सिंह को आलराउंडर कहना गलत नही होगा, क्योंकि ये कमेंट्री भी कर लेते है तो शायरिया भी कर लेते हैं और राजनीति में भी सक्रिय हैं।
सिद्धू के बारे में अनसुनी बातें: सिद्धू योग में माहिर हैं। पिता के मौत के बाद जब वे बुरे दौर से गुजरे तो उन्हें योग से ही ताकत मिली, जिसे वे आज तक आजमा रहे हैं। सिख होने के बावजूद हिन्दू धर्म का अच्छा ज्ञान रखते हैं। सिद्धू को इंटरनेट सर्फिंग काफी पसंद है। जब सिद्धू काफी समय तक लोकसभा से बाहर रहे तब एक एनजीओ ने उन्हें ढूंढकर लाने के लिए दो लाख का ईनाम घोषित किया था।