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विधानसभा सेशन: अपनों ने उठाए अपनों पर सवाल, तीखी बहस

Tue, 22 Sep 2015 09:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब विधानसभा सेशन का माहौल उस समय काफी गरमा गया जब, अपनों ने अपनों पर ही उंगली उठाते आरोप लगा दिए। देखिए तस्वीरें।
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विधानसभा सेशन: अपनों ने उठाए अपनों पर सवाल, तीखी बहस

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हुआ यूं कि नौकरियों में आरक्षण के मुद्दे पर सत्ता पक्ष के विधायक जस्टिस निर्मल सिंह ने ही सरकार पर सवाल खड़े कर दिए। इसे भुनाने में विपक्ष ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। आउटसोर्सिंग में आरक्षण की नीति नहीं होने पर स्पीकर भी इस सवाल पर सहमत नजर आए।
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प्रश्नकाल के दौरान जस्टिस निर्मल सिंह ने सदन में सवाल रखा कि ट्रांसपोर्ट विभाग ने पिछले ढाई सालों में तीसरे व चौथे दर्ज के कितने कर्मचारी ठेका आधार पर भर्ती किए गए और इनमें से अनुसूचित जाति व पिछड़ी श्रेणियों की गिनती क्या रही।

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ट्रांसपोर्ट मंत्री अजीत सिंह कोहाड़ ने जवाब दिया कि दर्जा तीन के 1918 कर्मचारी भर्ती किए गए और इसमें 675 पद अनुसूचित जाति व 324 पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित रखे थे, लेकिन एससी के 358 और पिछड़ा वर्ग के 204 पद ही भरे जा सके। क्योंकि इतने ही आवेदक योग्य निकले।
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यह भी बताया कि इस वर्ष 1250 ड्राइवर और इतने ही कंडक्टर आउटसोर्सिंग पर भर्ती किए जाने थे, लेकिन इनमें से भी आरक्षित वर्ग के पद खाली रह गए। कोहाड़ के जवाब देने की देर थी, इतने में ही विपक्ष ने मोर्चा संभाल लिया।
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कांग्रेसी विधायक चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि आरक्षित वर्ग तीसरे दर्ज की नौकरी आसानी से पा सकता है, क्या सरकार को पूरे पंजाब में आरक्षित वर्ग के आवेदक नहीं मिले, जो बड़ी संख्या में पद खाली रह गए।
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कांग्रेस विधायकों ने इस पर सत्ता पक्ष को अनुसूचित जाति विरोधी सरकार बताया। उधर, उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने मोर्चा संभालते हुए कहा कि आंकड़े बताते हैं कि आरक्षित वर्ग शिअद के पक्ष में है और शिअद ही उनके हितों की रक्षा करता है।

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विधानसभा में शून्यकाल के दौरान कांग्रेस विधायक अरुणा चौधरी के दीनानगर आतंकवादी हमले में पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाने पर हंगामा खड़ा हो गया। नेता प्रतिपक्ष सुनील जाखड़ ने स्थिति संभाली और उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने पुलिस कार्रवाई पर पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से प्रशंसा करने का हवाला दिया।

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चौधरी ने कहा कि डीजीपी ने बयान दिया था कि सीमा से 13 किलोमीटर की दूरी तय कर आतंकी पहुंचे। रेलवे लाइन पर पांच बम फिट किए और सुबह सवा पांच बजे आतंकी घटना को अंजाम दिया। थाने में पुलिस कर्मियों की बजाय होमगार्ड जवान ही थे।

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चौधरी ने सवाल उटाया कि सवा आठ बजे सेना मौके पर पहुंच चुकी थी। यदि सेना को कार्रवाई की छूट दी जाती तो न तो ऑपरेशन लंबा चलता और न ही एसपी की जान जाती। डीजीपी सड़क रास्ते से दोपहर डेढ़ बजे पहुंचे। यदि वह अगले दिन 28 जुलाई को हेलीकॉप्टर में प्रेस कांफ्रेंस करने पहुंच सकते हैं तो घटना वाले दिन हेलीकॉप्टर में जल्दी क्यों नहीं पहुंचे।

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चौधरी का मानना था कि यदि डीजीपी भी जल्द ऑपरेशन की कमान संभाल लेते तो एसपी की जान बच सकती थी। कांग्रेस विधायक के इस सवाल पर सत्ता पक्ष ने आपत्ति उठाई। उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने उठ कर विरोध करते हुए इसे पुलिस की कार्यकुशलता पर गलत आरोप लगाना बताया।

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बादल ने कहा कि पंजाब पुलिस की प्रशंसा केंद्रीय कैबिनेट तक में स्वयं पीएम मोदी ने की। वैसे भी पुलिस ने इस सफल ऑपरेशन के साथ पाकिस्तान को करारा जवाब दिया कि उनकी  आतंकी कार्रवाईयों के लिए पंजाब पुलिस ही काफी है।

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इस पर नेता प्रतिपक्ष ने भी मौका संभाला और कहा कि दरअसल अरुणा चौधरी पुलिस की कार्यकुशलता पर सवाल नहीं उठा रही हैं, बल्कि उनका सवाल यह है कि आखिर सभी पीड़ितों को मुआवजे या नौकरी के लिए एक समान नीति क्यों नहीं अपनाई गई।
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ध्यानाकर्षण काल के दौरान कांग्रेस विधायक चरणजीत सिंह चन्नी ने राज्य में डेंगू का मुद्दा उठाते हुए मृतकों को मुआवजे पर पंजाब सरकार को स्थिति स्पष्ट करने को कहा। इस पर स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री सुरजीत ज्याणी ने बताया कि इस साल बरसात पहले शुरू हो गई और 17 सितंबर तक राज्य में 1861 मामले सामने आए, जिनमें से दो की मौत हो गई।
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