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जैश ने जैसे पुलवामा हमले की साजिश रची, वैसे ही पठानकोट में कराया था अटैक, 1 समानता 1 अंतर

Fri, 15 Feb 2019 03:18 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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pulwama attack jammu - फोटो : अमर उजाला
पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर जिसने आतंकी हमला कराया है, उसी ने पठानकोट में एयरफोर्स स्टेशन पर आतंकी हमला कराया था। दोनों में एक समानता थी और एक अंतर, जानिए कैसे।
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pulwama terror attack
पुलवामा में 14 फरवरी को हुए इस अब तक के सबसे बड़े आतंकी हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद ने ली थी। इसी संगठन ने पंजाब के पठानकोट स्थित एयरबेस में 2016 में आतंकी हमला कराया था। गुरुवार को पुलवामा में हुए आतंकी हमले ने लोगों के जेहन में एक बार फिर पठानकोट हमले को उभार दिया है।

 
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pulwama attack
पुलवामा में आतंकी हमले 40 जवान मारे गए। हमला उस समय हुआ, सीआरपीएफ के 2547 जवान जम्मू से श्रीनगर जा रहे थे। 75 वाहनों में जवान थे। जैसे ही काफिला पुलवामा पहुंचा, एक एसयूपी कार जवानों की बस से आकर टकरा गई। टक्कर लगने के बाद बस में धमाका हो गया। एक के बाद से तीन बसों में विस्फोट हुए।

 

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Pathankot airbase attack - फोटो : अमर उजाला
वहीं पठानकोट एयरबेस पर हमला उस समय हुआ, जब लोग नए साल के जश्न में डूबे थे। आतंकी दिसंबर 2015 में पाकिस्तान से भारत की सीमा में घुसे थे। 2 जनवरी, 2016 की सुबह साढ़े तीन बजे आतंकी असलहा और हथियारों से लैस होकर एयरबेस स्टेशन में दाखिल हुए थे।
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पठान कोट हमला - फोटो : PTI
इस हमले में एयरबेस के अंदर सात सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे, जबकि करीब 37 अन्य लोग घायल हो गए थे। हमला करने आए सभी आतंकी मारे गए थे। जब सेना के जवान मारे गए आतंकियों के शव तलाश रहे थे तो वहां विस्फोटक सामग्री मिली। जिसे निष्क्रिय करते हुए एनएसजी के लेफ्टीनेंट कर्नल निरंजन शहीद हो गए थे।
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एनआईए ने दाखिल की पठानकोट आतंकी हमले में चार्जशीट
पठानकोट हमले की जांच कर रही एनआईए को कई ऐसे प्रमाण मिले थे, जिससे यह बात साफ हो गई थी कि हमला करने वाले सभी आतंकी पाकिस्तान के थे। वहीं, हमले के समय भी आतंकी पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं व परिवार के संपर्क में थे। फोन के जरिए आदेश और निर्देश दिए जा रहे थे।
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pulwama terror attack
इसी तरह पुलवामा हमले में शामिल आतंकी भी अपने आकाओं के संपर्क में थे। उन्हें पाकिस्तान के पीओके में बैठे आका फोन के जरिए आदेश व निर्देश दे रहे थे। आतंकियों को पूरी सूचना थी कि सीआरपीएफ का काफिला गुजरेगा। कितने बजे गुजरेगा और इसमें कितने वाहन होंगे। इसकी तमाम जानकारियां थीं।
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