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Pics: 'बस! बहुत हुआ, अब हम नहीं सहेंगे अत्याचार', आधी रात को सड़क पर उतरी हजारों लड़कियां

Wed, 31 Oct 2018 10:10 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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लड़कियों ने किया विरोध प्रदर्शन
बस, बहुत हुआ अब हम नहीं सहेंगे अत्याचार। आधी रात को हजारों लड़कियां सड़क पर उतर आई और नारेबाजी करते हुए जमकर हंगामा किया, पुलिस भी उन्हें संभाल नहीं पाई।
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लड़कियों ने किया विरोध प्रदर्शन
मामला पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में 24 घंटे गर्ल्स हॉस्टल खोलने का है। इस मांग को लेकर करीब 3000 लड़कियों ने आधी रात को पूरा कैंपस हिलाकर रख दिया। घंटों हंगामा हुआ, विरोध नारेबाजी करते हुए जबरन हॉस्टलों के गेट खोल दिए गए। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन छात्राएं नहीं मानीं। हर हॉस्टल में जाकर पीयू प्रशासन को चेताया। उन्होंने कहा कि लड़कियां अब किसी कीमत पर हॉस्टल में कैद नहीं रहेंगी। सैकड़ों पुलिस कर्मी मूकदर्शक बने रहे।
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लड़कियों ने किया विरोध प्रदर्शन
छात्राओं ने चेतावनी दी कि पीयू प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार आकर जब तक गर्ल्स हॉस्टल 24 घंटे खुलने के आश्वासन नहीं देंगे, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। पीयू के स्टूडेंट कई दिन से आंदोलन की रणनीति बना रहे थे। उनकी मांग थी कि लड़कियों को आजाद किया जाए। 24 घंटे हॉस्टल खोले जाएं। कई अन्य मांगें भी उठाई गईं। पीयू प्रशासन ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया। आखिर में छात्राओं को आंदोलन का सहारा लेना पड़ा।

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लड़कियों ने किया विरोध प्रदर्शन
सोमवार से डे-नाइट प्रोटेस्ट शुरू हुआ था, जिसने मंगलवार की रात आते-आते हंगामे का रूप ले लिया। हॉस्टल नंबर तीन, चार व छह की छात्राएं ठीक साढ़े नौ बजते ही हॉस्टल के मुख्य गेट पर पहुंच गईं। गेट बंद था। उसे खोलने से पुलिस ने इनकार किया, लेकिन छात्राएं नहीं मानीं। उन्होंने गेट को हिला दिया। कुछ हिस्सा टूट भी गया। माहौल न बिगड़े इसलिए पुलिस भी कुछ नहीं बोल पाई। छात्राएं हॉस्टल नंबर पांच व सात पहुंचीं।
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वहां सभी छात्राओं को प्रोटेस्ट में शामिल होने को कहा। इसी के साथ छात्राओं की भीड़ और बढ़ गई। पीयू प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की गई। आखिर में छात्राएं गेट नंबर तीन के बाहर पहुंचीं। वहां पीयू स्टूडेंट यूनियन की प्रधान कनुप्रिया ने कहा कि आंदोलन चलता रहेगा। बुधवार की शाम साढ़े सात बजे बड़ा प्रोटेस्ट होगा। पुलिस रातभर वहां तैनात रही। हॉस्टल के बाहर शांतिपूर्वक रात को धरना-प्रदर्शन चला।
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पीयू में गर्ल्स हॉस्टल 24 घंटे खुलवाने की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शन ने बड़े आंदोलन का रूप ले लिया। मंगलवार रात छात्राओं का आक्रोश चरम पर पहुंच गया था। यही कारण रहा कि पीयू प्रशासन व पुलिस ने पहले ही हॉस्टल नंबर पांच व सात के गेट खोल दिए थे जबकि हॉस्टल के गेट बंद करने का समय रात साढ़े नौ बजे था। हालात ऐसे थे कि इस दौरान अगर पीयू का कोई भी जिम्मेदार अफसर यहां पहुंचता तो कोई अनहोनी भी हो सकती थी। हालांकि बाद में छात्रों का रुख थोड़ा नरम पड़ गया।
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उन्होंने कहा कि पीयू प्रशासन का कोई भी अधिकारी अगर हॉस्टल 24 घंटे खोलने के आदेश लेकर आता है तो वह अपना आंदोलन खत्म कर देंगे। कुछ छात्र नेताओं ने बताया कि उनके फोन पुलिस टेप कर रही है। उनको शक है कि इस आंदोलन का संचालन कहीं और से हो रहा है लेकिन छात्रों ने इस शंका को पूरी तरह खारिज कर दिया। हॉस्टल नंबर तीन के गेट खोलने को लेकर महिला पुलिस और छात्राओं के बीच जमकर कहासुनी के बाद हाथापाई तक हुई। उसी दौरान पुलिसकर्मियों ने वायरलेस कर अफसरों से पूछा कि अगला कदम क्या उठाया जाए।

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सूत्रों के मुताबिक, उच्चाधिकारियों ने कहा कि जब तक स्टूडेंट सार्वजनिक क्षति न पहुंचाएं तब तक कोई एक्शन न लिया जाए। इसके बाद पुलिस ने भी धैर्य बनाए रखा। इस बीच छात्राओं का हुजूम हॉस्टल नंबर पांच और सात पहुंचा तो वहां ड्यूटी कर रहे एक कर्मचारी से नोकझोंक हो गई। छात्राओं ने कर्मचारी चेता दिया कि वह बीच में न आए। इसी बीच छात्राओं के आंदोलन में हाथ बंटा रहे छात्र संगठन आइसा के अध्यक्ष विजय कुमार व पुलिस कर्मियों की काफी देर तक नोकझोंक हुई। पुलिस ने कहा कि वह छात्राओं का साथ न दें लेकिन वह नहीं माने।

 

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आखिर में पुलिस को पीछे हटना पड़ा। आंदोलन का रुख बदलता देख पुलिस की चार गाड़ियां और आकर खड़ी हो गईं। छात्राओं के इस हल्ला बोल के कारण पंजाब यूनिवर्सिटी के शिक्षक भी रातभर नींद नहीं ले पाए। नारों की आवाज से पूरा इलाका गूंज रहा था। प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेताओं के कुछ समर्थक भी पीयू पहुंच गए। वह भी सत्ता से जुड़े नेताओं को सूचना देते रहे। बाहर जाने वाला रास्ता भी प्रदर्शन के कारण पूरी तरह बंद हो गया। हॉस्टल नंबर तीन के सामने जाम लग गया। कई गाड़ियां यहां आकर फंस गईं थीं। ऐसे में गाड़ियों से निकलकर लोगों को पैदल जाना पड़ा।

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उन्हें पता चला कि महिलाओं की आजादी की बात की जा रही है तो राहगीर महिलाएं भी आंदोलन में कुछ देर के लिए शरीक हो गईं। हालांकि रास्ता खुलते ही वह अपने गंतव्य की ओर चली गईं। पुलिस व पीयू प्रशासन के तीन-तीन वीडियोग्राफर व फोटोग्राफर यहां लगे हुए थे। पुलिस और पीयू प्रशासन आंदोलन में शामिल होने वालों पर वीडियो और फोटो देखकर कार्रवाई करेगा। हॉस्टल नंबर पांच व सात की कुछ छात्राओं को डर था इसलिए वह बाहर नहीं आ पाईं। अब बुधवार से छात्राएं रातभर गर्ल्स हॉस्टल के गेट खुला रखेंगी।

 
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ऐसे बढ़ता गया कारवां
छात्र संगठन एसएफएस ने छात्रसंघ चुनाव में अपने घोषणापत्र में प्रमुख रूप से लड़कियों के हॉस्टल 24 घंटे खुलवाने का वादा किया था। अन्य छात्र संगठनों ने भी यह वादा किया था। छात्र संगठनों का कहना था कि कोई भी छात्रा हॉस्टल में कैद नहीं रहेगी। लड़कों की जितनी आजादी उन्हें भी चाहिए। जैसे ही चुनाव के परिणाम आए तो एसएफएस की प्रधान कनुप्रिया बन गईं। इससे संगठन की जिम्मेदारी बढ़ गई। साथ ही घोषणाएं पूरी करने का भी समय आ गया था। उसी को लेकर पीयू प्रशासन को कई बार चिट्ठी लिखकर यह मांग की लेकिन एक नहीं मानी। इसी के बाद इस आंदोलन की रूपरेखा रखी गई।
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