फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सोशल मीडिया में मां ने किया ऐसा कमेंट कि बदल गई कनुप्रिया की जिंदगी..पढ़िए इनसाइड स्टोरी

Sat, 08 Sep 2018 05:28 PM IST
रूबी सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
1 of 5
kanupriya
कनुप्रिया पीयू की पहली महिला छात्र संघ अध्यक्ष बनी है। उन्होंने अपने जीत के पीछे की इनसाइड स्टोरी साझा की। वो अपने अंदर के बदलाव का श्रेय अपनी मां को देती हैं। आइए जानते हैं कुनप्रिया की पूरी कहानी...
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 5
kanupriya
उन्होंने बताया कि साल 2018 जनवरी की बात है। मैंने एक महिलाओं से संबंधित मुद्दा पोस्ट किया। इस पर एक कमेंट में किसी ने लिख दिया कि महिलाओं को घर तक सीमित रहना चाहिए। बाहर काम करना उनके बस की बात नहीं। इस कमेंट के चंद मिनटों में ही मेरी मां ने उस शख्स की ऐसी क्लास लगाई कि मैं उनके कमेंट पढ़ कर दंग रह गई। मां का इस तरह बिंदास होकर जवाब देने वाले इस कमेंट को पढ़ कर मेरा सारा डर खत्म हो गया।

मेरे आत्मविश्वास को मां के कमेंट ने मानों एक नई दिशा दी। उनके इस कमेंट के बाद ही पीयू में मेला वोटां द रिटर्स के लिए मेरा संघर्ष और से तेजी से बढ़ने लगा। सुबह छह बजे से लेकर रात दो बजे तक हम ने इस जीत के लिए संघर्ष किया है। कुछ इन जीत के मंत्र के साथ पंजाब यूनिवर्सिटी में लड़कियाें की जीत की शुरूआत करने वाली कनुप्रिया ने अपनी सफलता का राज बताया। एमएससी सेकेंड ईयर जूलॉजी की छात्रा कनुप्रिया ने कहा कि लड़कियां चाहें तो कुछ भी कर सकती हैं, बस जरूरत है खुद पर आत्मविश्वास रखने की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वे अब पंजाब यूनिवर्सिटी में लड़कियों की ताला लगाकर सुरक्षा को किसी भी कीमत पर नहीं होने देंगे।
विज्ञापन

3 of 5
kanupriya
हॉस्टल में नाटक देखते ही दस रुपये में बनीं थी एसएफएस की सदस्य
बात 2014 की है। हॉस्टल नंबर चार में एक नाटक हुआ। उसमें पंजाब यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों की समस्याओं को बेहद खूबसूरत तरीके से दिखाया गया। यह नाटक एसएफएस के सदस्यों ने दिखाया था। मैं इस नाटक को देखकर इतनी प्रोत्साहित हो गई थी कि मैंने तुरंत दस रुपये की फीस देकर एसएफएस की सदस्यता ले ली।

जीत के बाद बधाई संदेश तो आए, मगर वाइस चांसलर का नहीं आया कोई संदेश
कनुप्रिया ने बताया कि जीत के बाद उनके मोबाइल फोन में पंजाब यूनिवर्सिटी के एल्युमी और पूर्व सदस्य के बधाई संदेशों का सिलसिला जारी है। इसमें सभी उनकी जीत को अपनी जीत बता रहे हैं, लेकिन इस बधाई संदेश में उनको पंजाब यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर का अभी तक कोई बधाई संदेश और फोन नहीं आया है।

4 of 5
kanupriya
मेरा स्टाइल बस वही, जिसमें मैं कंफटेबल रहूं
चुनाव के दौरान साधारण से कुर्ते और जींस में दिखने वाली कनुप्रिया ने बताया कि उनको ग्लैमरस से ज्यादा कंफटेबल कपड़े पहनना पसंद है। उन्होंने चुनाव में अपने कपड़े की बजाए अपनी डाइट पर अधिक ध्यान दिया। उनकी मां ने चुनाव के दौरान डाइट पर ध्यान देने के लिए साफ हिदायत दी थी।

चुनाव लड़ने से एक दिन पहले ही बताया था अभिभावकाें को
छात्रा ने बताया कि पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में वे लगातार एसएफएस की सक्रिय प्रतिभागी रहीं। लेकिन इस बार जब उनको अध्यक्ष पद के लिए खड़ा होने के लिए कहा गया, तो उनके मन में अभिभावकों को बताने में थोड़ा सा डर रहा। यही वजह रही कि उन्होंने नॉमिनेशन लड़ने से एक दिन पहले ही मां-बाप को बताया। लेकिन इस खबर को सुनकर उनके अभिभावकों ने उनको न कहने की बजाए पूरी तरह सहयोग किया।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
kanupriya
अपनी तस्वीरों से बदलना चाहती हूं समाज की बुराई
कनुप्रिया ने बताया कि उनके पास कोई कैमरा नहीं है, लेकिन वे अपने मोबाइल फोन के कैमरे से ही तस्वीरें खींचती हैं। वे अपनी खींचीं तस्वीरों से समाज की बुराई और गरीबी को बयां करना चाहती हैं, ताकि वे इनसे उस समस्या का हल करवा सकें। इसके अलावा जूलॉजी विभाग से पढ़ रहीं छात्रा ने कहा कि वे ग्लोबल चेजिंग एवं पर्यावरण को लेकर भी कुछ काम करना चाहती हैं।

अंग्रेजी क्लास में मिली एक ऐसी दोस्त, जिसने जीत में दिया पूरा सहयोग
कनुप्रिया के साथ सुबह छह बजे से लेकर रात दो बजे तक कंधे से कंधा मिला कर चलने वाली हसनप्रीत। एमएससी फिजिक्स सेकेंड ईयर छात्रा हसनप्रीत और कनुप्रिया दोनों पहली बार 2014 में अंग्रेजी क्लास में मिली थीं। कनुप्रिया ने बताया कि इस क्लास में दोनों ने एक दूसरे से बात नहीं की थी, लेकिन वे हसनप्रीत की डिबेट से बेहद प्रभावित हुईं। इसके बाद दोनों एसएफएस पार्टी में मिलीं और कनुप्रिया ने हसनप्रीत को पिछले साल अध्यक्ष पद पर लड़ने में पूरा सहयोग किया।

हालांकि पार्टी उम्मीदवार रही हसनप्रीत को 2190 वोट मिलने के बावजूद जीत नहीं मिल पाई थी। लेकिन दोनों की दोस्ती इससे और मजबूत हुई। इस साल चुनाव से लेकर अभी तक छात्रा हसनप्रीत ने कनुप्रिया को सुबह छह बजे उठाने से लेकर रात दो बजे तक उनके साथ काम करने तक पूरा सहयोग किया। ये जीत दोनों के साथ-साथ एसएफएस के सभी सदस्यों की है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें