सुषमा स्वराज के बारे में एक शख्स ने ऐसी भविष्यवाणी की थी, जो सच साबित हुई और वो बन गईं देश की दमदार नेता शानदार वक्ता। पढ़ें पूर्व विदेश मंत्री से जुड़ा ये किस्सा...
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सुषमा स्वराज
- फोटो : सोशल मीडिया
सुषमा में एक कुशल राजनेता बनने के गुण को उनके गुरु और एसडी कॉलेज अंबाला छावनी में हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. वियोगी हरि ने वर्षों पहले परख लिया था। उन्होंने कहा था कि सुषमा देश की राजनीति में चमकेंगी। डॉ. वियोगी सुषमा से भाषण तैयार करवाते थे और फिर उसमें सुधार करके सुषमा को ही बोलने के लिए आगे करते थे। सुषमा ने अंबाला के सनातन धर्म कॉलेज से संस्कृत और राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की थी।
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सुषमा स्वराज
- फोटो : PTI
बीए करने के दौरान उन्हें कॉलेज की सर्वश्रेष्ठ छात्रा का और अपने ओजस्वी भाषणों की वजह से लगातार तीन सालों तक सर्वश्रेष्ठ वक्ता का पुरस्कार मिला था। यहां से सुषमा चंडीगढ़ पहुंचीं और पंजाब विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री ली। लॉ कॉलेज में भी सुषमा ने अपने प्रखर और स्पष्ट विचारों से जल्द ही विद्यार्थियों से लेकर प्रोफेसरों के बीच भी धाक जमा ली। यहीं उनकी मुलाकात स्वराज कौशल से हुई थी।
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सुषमा स्वराज
- फोटो : अमर उजाला
हरियाणा के लैंग्वेज डिपार्टमेंट द्वारा आयोजित राजकीय प्रतियोगिता में उन्होंने लगातार तीन बार बेस्ट हिंदी स्पीकर का अवॉर्ड अपने नाम किया। सुषमा स्वराज को हरियाणा राज्य विधानसभा द्वारा सर्वश्रेष्ठ वक्ता पुरस्कार दिया गया। सुषमा स्वराज को वर्ष 2008 और 2010 में दो बार सर्वश्रेष्ठ संसदीय पुरस्कार मिला था। वह उत्कृष्ट संसदीय पुरस्कार को प्राप्त करने वाली पहली और एकमात्र महिला सांसद हैं।
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सुषमा स्वराज
- फोटो : PTI
सुषमा का जन्म 14 फरवरी 1952 में अविभाजित पंजाब की अंबाला छावनी में हुआ था। परिवार मूलरूप से पाकिस्तान के लाहौर का था, जो विभाजन के बाद अंबाला आ गया। सुषमा के पिता हरदेव शर्मा सनातनी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य थे। लिहाजा घर में राजनीतिक चर्चाएं होती थीं। सुषमा स्वराज के भाई डॉ. गुलशन राय शर्मा अभी भी कैंट के बीसी बाजार में क्लीनिक चलाते हैं। सुषमा की छोटी बहन वंदना शर्मा हरियाणा स्टाफ सेलेक्शन कमीशन की सदस्य हैं।
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सुषमा स्वराज
- फोटो : अमर उजाला
सुषमा स्वराज ने भारतीय राजनीति में अपनी शुरुआत वर्ष 1970 में छात्र नेता के रूप में की थी। वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ीं। 1973 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में बतौर वकील प्रैक्टिस शुरू की थी। 1975 में सुषमा जॉर्ज फर्नांडिस की लीगल डिफेंस टीम का हिस्सा बन गईं। आपातकाल के दौरान ही उन्होंने भाजपा ज्वॉइन कर लिया था। जुलाई 1977 में वह देवी लाल की सरकार में कैबिनेट मंत्री बनीं। उस वक्त उनकी उम्र महज 25 साल थी, इसलिए वह विधानसभा की सबसे युवा सदस्य थीं।
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सुषमा स्वराज
1987 से 1990 तक सुषमा हरियाणा की शिक्षा मंत्री भी रहीं। 27 साल की उम्र में सुषमा स्वराज को जनता पार्टी (हरियाणा) का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। सुषमा स्वराज ने अप्रैल 1990 में राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा। उन्हें राज्यसभा सदस्य बनाया गया। इसके बाद 1996 में वह दक्षिणी दिल्ली क्षेत्र से 11वीं लोकसभा के दूसरे कार्यकाल की सदस्य बनीं। उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री का पद मिला।
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सुषमा स्वराज
- फोटो : amar ujala
1998 में इन्हें तीसरी बार 12वीं लोकसभा की सदस्या के रूप में फिर से निर्वाचित किया गया था। 13 अक्तूबर से 3 दिसंबर 1998 तक, इन्हें दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री के रूप में निर्वाचित किया गया। नवंबर 1998 में उन्हें दिल्ली विधानसभा के हौज खास विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से चुना गया, लेकिन उन्होंने लोकसभा सीट को बरकरार रखने के लिए विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया था। अप्रैल 2000 में सुषमा स्वराज को फिर से राज्यसभा की सदस्या के रूप में निर्वाचित किया गया था।
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सुषमा स्वराज
- फोटो : ani
30 सितंबर 2000 से 29 जनवरी 2003 तक उन्होंने सूचना एवं प्रसारण मंत्री के पद पर सेवा की। 19 मार्च से 12 अक्टूबर 1998 तक, वे सूचना एवं प्रसारण और दूरसंचार (अतिरिक्त प्रभार) विभाग में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री रहीं। 29 जनवरी 2003 से 22 मई 2004 तक, वे स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री व संसदीय मामलों की मंत्री रहीं। अप्रैल 2006 में उन्हें दोबारा पांचवे सत्र के लिए राज्यसभा की सदस्य के रूप में निर्वाचित किया गया था।
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सुषमा स्वराज
16 मई 2009 को सुषमा स्वराज को छठी बार 15वीं लोकसभा की सदस्य के रूप में चुना गया था। वे लोकसभा में 3 जून 2009 को विपक्ष की उपनेता बनीं। 21 दिसंबर 2009 को सुषमा स्वराज विपक्ष की पहली महिला नेता बनी थीं और तब उन्होंने श्री लालकृष्ण आडवाणी के बाद यह पद ग्रहण किया था। 26 मई 2014 को सुषमा स्वराज भारत सरकार में विदेश मामलों की केंद्रीय मंत्री बनीं। 2019 में स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा।
सुषमा स्वराज को राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक पार्टी की पहली महिला प्रवक्ता होने का गौरव प्राप्त रहा। वह पहली महिला मुख्यमंत्री थीं। वह पहली महिला केंद्रीय कैबिनेट मंत्री भी थीं। सुषमा स्वराज विपक्ष की पहली महिला नेता भी थीं। वह भारत की सबसे कम उम्र की कैबिनेट मंत्री थीं। सुषमा स्वराज को लगातार तीन वर्षों तक एसडी कॉलेज अंबाला में एनसीसी की सर्वश्रेष्ठ सैनिक छात्रा भी घोषित किया गया था।