टैगोर थिएटर में संगीत नाटक अकादमी चंडीगढ़ द्वारा आयोजित नाटक ‘नमक का दरोगा’ को देखने के लिए अच्छी खासी भीड़ मिली।
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ये हुआ जब बेटे ने नहीं ली पिता की नसीहत
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नाटक की कहानी आधारित है एक ऐसे मुंशी पर जो अपने बेटे वंशीधर को रिश्वत और ऊपर की कमाई से अमीर बनने को कहता है। पिता की सीख के विपरीत वंशीधर ईमानदारी से अपना काम करता है।
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ये हुआ जब बेटे ने नहीं ली पिता की नसीहत
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मुंशी प्रेमचंद की कहानी जब भी मंच पर आती है तो लोगों की अपेक्षाएं बढ़ जाती हैं। कलाकारों ने भी अपने दमदार अभिनय से दर्शकों को निराश नहीं किया।
ये हुआ जब बेटे ने नहीं ली पिता की नसीहत
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नाटक में मुंशी से लेकर अलोपीदीन को कलाकारों ने बेहतरीन अभिनय से जीवंत कर दिया।