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पीजीआईः न छत, न रजाई

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पीजीआई चंडीगढ़ में देश भर से मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं, लेकिन यहां आकर मरीजों को असुविधाओं के अलावा कुछ नहीं मिलता है।
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पीजीआईः न छत, न रजाई

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रात में रुकने के लिए मरीजों को छत भी नहीं मिल पाती है। मरीज और उनके परिजन कड़ाके की ठण्ड में खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर हैं।
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मरीज कहते हैं कि मजबूरी है बस, वरना यहां रुकने का बिल्कुल भी मन नहीं करता है।

पीजीआईः न छत, न रजाई

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पीजीआई प्रबंधन ने नेहरु अस्पताल में एक सराय का बंदोबस्त किया हुआ है, लेकिन उन पर ताले लगे हुए हैं।
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कमरों की हालत इतनी खस्ता है कि दुर्गंध आती है, साफ-सफाई नहीं है। बिस्तर भी गंदे पड़े हैं।
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पीजीआईः न छत, न रजाई

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ऊपर से पीजीआई के‌ किसी कोने में अगर थोड़ी बहुत जगह मिल जाती है तो या तो सिक्योरिटी गार्ड भगा देते हैं या पुलिस वाले।
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