राहत एवं बचाव कार्य की तस्वीर
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तभी उसके बेटे ने कहा कि गर्मी बहुत है, फिर किसी और दिन आ जाएंगे। जैसे ही वे कार लेकर अपने घर को रवाना हुए तो फैक्ट्री में ब्लास्ट हो गया। राकेश कुमार ने बताया कि किस्मत ने हम बाप-बेटे को मौत के मुंह से बचा लिया। धमाका होने के बाद कॉलोनी के लोग अपने-अपने पारिवारिक सदस्यों से फोन पर उनका हालचाल पूछते नजर आए। ब्लास्ट से करीब दस घरों को क्षति पहुंची है। किसी की दीवार टूट गई तो किसी के घर के शीशे टूट गए। लेकिन उनके यहां कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। वहीं, प्रशासन की लापरवाही भी सामने आई है कि लंबे समय से रिहायशी इलाके में चल रही इस पटाखा फैक्ट्री की तरफ कोई ध्यान क्यों नहीं दिया गया।