10 का सिक्का लेने से लोग अभी भी इंकार कर रहे हैं, जबकि ऐसा होने पर शिकायत की जा सकती है और इंकार करने वाले को जेल जाना पड़ सकता है। यकीं नहीं तो ये पढ़िए।
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10 रुपये का सिक्का
कभी सिक्के 10 से 15 फीसदी ब्लैक में खरीदने पड़ते थे, अब सिक्के दुकानदारों के गुल्लक में भरे पडे़ हैं। हालात यह है कि दुकानदार सिक्के लेने से घबरा रहे हैं। यहां तक कि मंदिरों के दानपात्र भी नोटों से कम सिक्कों से ज्यादा भर रहे हैं। पहले ऐसा होता था कि चंडीगढ़ मार्केट एसोसिएशन और व्यापार मंडल बैंकों से रेजगारी दिलवाने के लिए बाजारों में सिक्कों का कैंप लगाते थे। लेकिन अब कोई भी मार्केट एसोसिएशन ऐसा नहीं कर रही है।
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10 रुपये का सिक्का
चंडीगढ़ व्यापार मंडल के चेयरमैन चरणजीव सिंह ने बताया कि सिक्कों की भरमार होने से रेजगारी का कारोबार करने वाले बेरोजगार हो गए हैं। पंजाब व हरियाणा से सिक्को का काम करने वाले प्रतिदिन चंडीगढ़ के बैंकों में आते थे, जहां से लाखों का सिक्का लेकर संबंधित राज्यों के जिलों में ब्लैक पर बेचते थे। पंजाब में सबसे ज्यादा जालंधर और लुधियाना में रेजगारी का कारोबार होता था। नोटबंदी के बाद से सिक्के की मांग निरंतर गिरती रही।
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Rs 10 Coins
- फोटो : PTI
सेक्टर-18 की राधा कृष्णा मंदिर के अध्यक्ष सुनील चोपड़ा का कहना है कि नोटबंदी के बाद से मंदिर की गुल्लकों में नोट कम और सिक्कों की संख्या ज्यादा बढ़ी है। सिक्कों की संख्या 30 से 40 प्रतिशत बढ़ गई है। पहले दुकानदार खुद मंदिर की गुल्लक खुलने का इंतजार करते थे। लेकिन अब कोई व्यापारी रेजगारी लेने के लिए नहीं आते हैं। परचून का कारोबार करने वाले भी सिक्के नहीं लेते हैं। अब बैंक जाना पड़ता है, सिक्के बदलवाने के लिए।
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दस रुपये के सिक्के
ग्रेन मार्केट एसोसिएशन के चेयरमैन सतप्रकाश अग्रवाल कहते हैं कि आरबीआई के निर्देशानुसार, 10 रुपये का सिक्का भारतीय मुद्रा है। इसको लेने से इनकार करने पर राजद्रोह का मामला बनता है और जो ऐसा करता है उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 124 (1) के तहत मामला दर्ज हो सकता है क्योंकि मुद्रा पर भारत सरकार वचन देती है। इसको लेने से इनकार करना राजद्रोह है। इसके बारे में उन्होंने आरबीआई की वेबसाइट पर पढ़ा था।
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दस रुपये के सिक्के की पहचान
अग्रवाल ने बताया कि आरबीआई ने 10 का नया सिक्का 26 मार्च 2009 को जारी किया गया था, जो कि मान्य है। इसके अलावा शेरावाली की फोटो वाला सिक्का, संसद की तस्वीर वाला सिक्का, बीच में संख्या में ‘10’ लिखा हुआ सिक्का, होमी भाभा की तस्वीर वाला सिक्का, महात्मा गांधी की तस्वीर वाला सिक्का सहित अन्य सभी सिक्के भी मान्य हैं। इन सिक्कों को विभिन्न विशेष मौकों पर जारी किया गया है।
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दस रुपये के सिक्के की पहचान
- फोटो : getty image
जानकारी के लिए बता दें कि आरबीआई के निर्देशानुसार, 10 का सिक्का लेने से इंकार करने वाले लोगों को जेल तक हो सकती है। इंकार करने वाले के खिलाफ आरबीआई में शिकायत की जा सकती है। एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है। क्योंकि रिजर्व बैंक ने दस रुपये का सिक्का चलन से बाहर नहीं किया है। ऐसे में असली सिक्का लेने से मना करना कानूनन गलत है और भारतीय मुद्रा का अपमान है।
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दस रुपये के सिक्के की पहचान
- फोटो : getty image
नोट या सिक्के का जाली मुद्रण करने पर, जाली नोट या सिक्के चलाने पर और सही सिक्कों को लेने से मना करने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 489ए से 489इ के तहत अपराध है। इन धाराओं के तहत किसी विधिक न्यायालय द्वारा आर्थिक दंड, कारावास अथवा दोनों की सजा दी जा सकती है। 17 साल की सजा या 20000 रुपये का जुर्माना या फिर दोनों सजा दी जा सकती है।
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दस रुपये के सिक्के की पहचान
- फोटो : getty image
अगर आप के शहर या कस्बे में भी ऐसा हो रहा हो तो उसका वीडियो या ऑडियो बना कर इलाके के डीएम ऑफिस या थाने में बताएं। असली दस रुपए का सिक्का डबल डाई से तैयार किया जाता है। नकली सिक्के में भी डबल डाई का प्रयोग किया गया है, लेकिन ध्यान से देखने पर इन्हें पहचाना जा सकता है। असली सिक्कों में पीले भाग का रंग हलका हैं, जबकि नकली में पीला भाग ब्राइट है।
असली सिक्के में 10 का अंक दो धातुओं के बीच में है और 10 पट्टी बनी हैं। नकली में 10 का अंक सिल्वर धातु के बीच में है और 15 पट्टी हैं। असली सिक्के में भारत और इंडिया अलग-अलग लिखा है। नकली सिक्के में भारत और इंडिया एक साथ है। असली सिक्का शार्प है, जबकि नकली सिक्का थोड़ा खुरदरा है और साइज में भी फर्क है। नकली सिक्के छोटे हैं और इनका वजन भी कम है। नकली सिक्के का पीला भाग जोर देने पर निकल सकता है, जबकि असली में ऐसा नहीं है।