डेढ़ माह पहले ही ब्याहकर आई जस्प्रीत के हाथों की मेहंदी भी नहीं उतरी थी कि आतंकी हमले में कमांडो पति शहीद हो गया। देखिए अंतिम यात्रा की तस्वीरें।
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शहीद के शव पर उतारी सुहाग की चूड़ियां, तब चली शवयात्रा
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डेढ़ माह पहले ही ब्याहकर आई जसप्रीत के हाथों की अभी मेहंदी भी नहीं उतरी थी और सुहाग का चूड़ा भी पहना था। नियति ने ऐसा खेल खेला कि आज पति के शव पर चूड़े को उतारना पड़ रहा था। पड़ोस की महिलाएं जसप्रीत के हाथ से चूड़ा उतार रही थीं तो वह बेसुध हो गईं। आखिर जैसे-तैसे सुहाग की चूड़ियां उतारकर गुरसेवक के शव पर रखी गईं और इसके बाद शव यात्रा रवाना हुई।
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शहीद के शव पर उतारी सुहाग की चूड़ियां, तब चली शवयात्रा
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शहीद गुरसेवक को अंतिम विदाई देने के लिए सोमवार को पूरा गांव उमड़ पड़ा। परिजनों को सांत्वना देने के दौरान उनकी भी आंखे नम हो गई। सुबह करीब नौ बजे शव वाहन उन्हीं गलियों से गुजरकर शहीद के घर पहुंचा, जिन गलियों में खेलकर कभी गुरसेवक बड़ा हुआ था। आज भी शहीद के यार उसके घर की दीवार के साथ पीठ लगाकर नम आंखों से अपने दोस्त के शव को चुपचाप देख रहे थे।
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गुरसेवक का तिरंगे में लिपटा शव देखकर सदमे में डूबी उसकी मां अमरीको और पत्नी जसप्रीत को कलेजा फट पड़ा। इस माहौल के देखकर वहां खड़ा हर कोई फफक पड़ा। फिर तो वहां आंसुओं का ऐसा सैलाब बहा, जो रुक नहीं पाया। पिता सुच्चा सिंह, भाभी सुखविंद्र कौर, चचेरे भाई अमरीक सिंह अन्य परिजन शहीद के शव से लिपटकर बिलखते रहे और ग्रामीण उन्हें संभालने में जुटे रहे।
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पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले में गुरसेवक के शहीद होने की खबर के बाद से ही गांव गरनाला की गलियां खामोश थी, हर घर में सन्नाटा पसरा था, लेकिन सोमवार सुबह करीब नौ बजे जब देश के लिए प्राण न्यौछावर कर देने वाले इस जांबाज का शव गांव में पहुंचा तो शहीद अमर रहे के नारों कौना-कौना गूंज उठा। अपने लाल के इंताजार ग्रामीण गलियों के दोनों और उसे सलामी देने को कतारबद्ध थे।
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एयरफोर्स के अधिकारी और जवान सुबह करीब नौ बजे शहीद को कांधे पर उठाकर जैसे ही गुरसेवक के घर की ओर रवाना हुए, पूरा गांव इस काफिले के पीछे चल दिया। छतों पर खड़े लोग शव वाहन पर पुष्प बरसा रहे थे। शहीद की अंतिम यात्रा में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज, वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु और खनन राज्यमंत्री नायब सैनी के अलावा अनेक गणमान्य लोग शामिल हुए। गांव के श्मशान घाट में शहीद के शव को मुखाग्नि दी गई।
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गुरसेवक का शव देखकर उसकी पत्नी, मां और पिता फफक पड़े। परिजनों को सांत्वना देने के लिए पूरा गांव मौजूद था, लेकिन वहां को माहौल देखकर उनकी भी आंखें नम हो गई। तिरंगे में लिपटे शहीद के शव के अंतिम दर्शन को लोग उमड़ पड़े। घर में जहां कोहराम मचा था, वहीं बाहर फिजा अमर शहीद के जयकारों से गूंज रही थी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए शहीद के घर से लेकर श्मशान घाट तक सड़क के दोनों ओर एयरफोर्स के जवान तैनात हो गए।
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करीब पौने घंटे बाद भारत माता के जयकारों, ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, गुरसेवक तेरा नाम रहेगा’ और ‘शहीद गुरसेवक अमर रहे...’ के जयकारों के साथ परिजन शव को कांधों पर उठाकर श्मशान घाट की ओर रवाना हुए।
शहीद के शव पर उतारी सुहाग की चूड़ियां, तब चली शवयात्रा
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शव यात्रा में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज, वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु और खनन राज्यमंत्री नायब सैनी के अलावा विभिन्न राजनीतिक दलों को प्रमुख, जिले के पुलिस व प्रशासन के आलाधिकारी मौजूद रहे। पुलिस और एयरफोर्स के जवानों ने फायरिंग कर शहीद को आखिरी सलामी दी। मुखाग्नि गुरसेवक के भाई फौजी हरदीप सिंह ने दी।