25 अगस्त को पंचकूला में हुई हिंसा की आधी कहानी पुलिस के समझ में आ गई है। सूत्रों की मानें तो रिमांड के दौरान एमएसजी के सीईओ सीपी अरोड़ा से पुलिस को कुछ अनसुलझे सवालों के जवाब मिले हैं। ये 25 और 45 की कड़ी है।
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फतेहाबाद से गिरफ्तार किया गया पंचकूला हिंसा का आरोपी सीपी अरोड़ा ।
इस कड़ी का पंचकूला में हिंसा और आगजनी में सबसे अहम रोल है। बताया जा रहा है कि डेरे की पुरानी परंपरा रही है कि कोई भी अहम फैसला लेना होता था, तो 25 सदस्यीय कमेटी मीटिंग के दौरान फैसला लेती थी और फैसले को डेरा समर्थकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी 45 सदस्यीय कमेटी के सदस्यों की थी।
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रिमांड में पुलिस को अरोड़ा ने बताया है कि 17 अगस्त को हुई मीटिंग के बाद 25 सदस्यीय टीम के लिए फैसले को 45 सदस्यीय टीम के कुछ सदस्यों ने लोगों को पंचकूला में सत्संग के बहाने आने का न्योता दिया। इतना ही नहीं पंजाब के कुछ इलाकों से 24 अगस्त को गाड़ियों में डेरा समर्थकों को जीरकपुर के पास लाकर छोड़ा गया। ताकि वह पंचकूला आसानी से पहुंच सकें। हिंसा के दिन इन्हीं सदस्यों ने डेरा समर्थकों के भड़काया।
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23 अगस्त की रात ही हिंसा के दे दिए थे संकेत
23 अगस्त को पंचकूला के सेक्टर तीन में जहां पर डेरा समर्थकों ठहराया था, वहां पर पानी का बंदोबस्त नहीं था। उसी दिन डेरे के पंचकूला इंचार्ज चमकौर सिंह ने पुलिस के एक आला अधिकारी को कॉल कर कहा था कि यहां पानी का बंदोबस्त करा दीजिए, नहीं तो समर्थक भड़क गए को आप ही संभालना। बातों बातों में ये हिंसा के संकेत नहीं तो और क्या थे। जिसे पुलिस समय रहते नहीं समझ पाई।
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Ram Rahim Verdict
नौ लोगों के पास थी मॉनिटरिंग की थी जिम्मेदारी
सूत्रों के मुताबिक राकेेेश ने रिमांड के दौरान पुलिस को बताया कि पंचकूला में 25 अगस्त को लाखों की तादाद में पहुंचे डेरा समर्थकों की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी 25 सदस्यीय टीम के आठ सदस्यों को गुरमीत राम रहीम ने दी थी। इनमें आदित्य इंसा, पवन इंसा, सीपी अरोड़ा, गोबीराम, सुुरेंद्र इंसा, चमकौर सिंह, खरैती लाल, दान सिंह, दिलावर शामिल हैं। इन्हीं लोगों के इशारे पर 45 कमेटी के सदस्यों ने डेरा प्रमुख को दोषी करार दिए जाने के बाद पंचकूला में हिंसा और आगजनी में शामिल होते हुए डेरा समर्थकों को हिंसा के लिए उकसाया था।
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Ram Rahim Verdict
बार बार बयान बदल रहा है अरोड़ा
रिमांड के दौरान आदित्य और पवन इंसां के ठिकानों के संबंध में पुलिस बार बार एमएसजी के सीईओ सीपी अरोड़ा से पूछताछ कर रही है, लेकिन वह बार बार अपने बयान बदल रहा है। इसी दुविधा के चलते हरियाणा की एसआईटी अभी आदित्य और पवन इंसा तक पहुंच नहीं पा रही है।
आदित्य इंसा की गिरफ्तारी के बाद ही पंचकूला में हुए आगजनी और हिंसा से पूरा पर्दा उठ पाएगा। क्योंकि पुलिस आधी कड़ी तक पहुंच गई है, आदित्य इंसा के गिरफ्तारी के बाद डेरे से जुड़े कुछ अहम सबूत भी पुलिस के हाथ लग सकते हैं। इसके अलावा इस दंगे की साजिश में शामिल होने वाले कुछ अन्य लोगों के नाम भी अभी सामने आने बाकी है।