राज्य सरकार और पंचायत विभाग के विभिन्न फैसलों के विरोध में मंगलवार को पंचायतों से जुड़ी विभिन्न जत्थेबंदियां एक साथ सड़क पर उतर आईं। हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी सरकार पर निशाना साधते हुए मोहाली के रास्ते चंडीगढ़ पहुंच गए।
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देखिए, डंडे लेकर सैकड़ों सरपंचों पर टूटे पुलिसवाले
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एक साथ सड़क पर उतरे इतने सारे प्रदर्शनकारियों को देखकर पुलिस के भी हाथ-पांव फूल गए। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रही।
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सांझी एक्शन कमेटी के बैनर तले विभिन्न जत्थेबंदियां सुबह नौ बजे फेज-8 स्थित विकास भवन के बाहर जुटीं। इसके बाद जबरदस्ती विकास भवन के कैंपस में घुसकर वहां दो बजे तक धरना-प्रदर्शन किया। सभी दोपहर में चंडीगढ़ की ओर चल दिए।
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पहले मोहाली पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन असफल रही। वाईपीएस चौक के पास चंडीगढ़ पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, लेकिन लोगों की संख्या अधिक होने के कारण यहां भी पुलिस की एक नहीं चली और प्रदर्शनकारी चंडीगढ़ में प्रवेश कर गए।
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सभी सेक्टर-52 और 43 के राउंड अबाउट पर पहुंचकर वहां धरने पर बैठ गए। इससे करीब ढाई घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। इसकी जानकारी मिलते ही पंचायत विभाग के स्पेशल प्र्रिंसिपल सेक्रेटरी एसके राजू पहुंचे और प्रदर्शनकारी जत्थेबंदियों से वार्ता की।
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सरपंचों ने स्पेशल प्रिंसिपल सेक्रेटरी से कहा कि सरकार ने निजी कंपनी से ऑडिट करवाने का फैसला लिया है, जो गलत है। क्योंकि, पहले ही सरकारी ऑडिटर ऑडिट कर चुके हैं। उन्होंने विभाग के मंत्री सिकंदर सिंह मलूका पर भी गलत बयानबाजी का आरोप लगाया।
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स्पेशल प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने उन्हें जल्द से जल्द हल निकालने का आश्वासन देकर उन्हें शांत किया। प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान उन्हें ज्ञापन भी सौंपा।
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धरने में पंचायत यूनियन, पंचायत सचिव, जेई यूनियन, अफसर यूनियन, जिला परिषद और ब्लॉक समिति के सदस्य और कई गांवों के सरपंच शामिल हुए। खास बात यह रही कि सरकार के खिलाफ हल्ला बोल में अकाली सरपंच और ब्लॉक समिति के सदस्य भी खुलकर आए।