दक्षिणी कश्मीर के पांपोर इलाके में आतंकियों से मोर्चा लेते हुए कैप्टन पवन कुमार बेनीवाल शहीद हो गए। जानिए, इस वीर सपूत के बारे में सब कुछ।
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जानिए, पांपोर मुठभेड़ में शहीद कैप्टन पवन के बारे में सब कुछ
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कैप्टन पवन कुमार मुठभेड़ में घायल हो गए थे। श्रीनगर के बादामीबाग में सेना के बेस अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। जम्मू कश्मीर के पुलिस उप महानिरीक्षक गुलाम हसन बट्ट ने कैप्टन पवन की मौत की पुष्टि की है।
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23 वर्षीय कैप्टन पवन हरियाणा के जींद के रहने वाले थे और भारतीय सेना के 10 पैरा कमांडो में कैप्टन थे। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे।
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कैप्टन पवन कुमार बेनीवाल का जन्म 15 जनवरी 1993 में हुआ था। संयोग देखिए जिस दिन आर्मी अपना 'बर्थडे' सेलिब्रेट करती है उसी दिन कैप्टन भी अपना जन्मदिन सेलिब्रेट करते थे। कैप्टन पवन की शहीदी पर उनके पिता राजबीर सिंह ने कहा कि उनको गर्व है कि उनका इकलौता बेटा देश के लिए शहीद हो गया।
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शहीद पवन के पिता ने अपने बेटे की शहादत को सलाम करते हुए कहा है कि उसका जन्म आर्मी डे पर हुआ था। ऐसे में देश के लिए कुर्बान होना और सेना में शामिल होना उनकी किस्मत में था।
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सिर्फ 23 वर्ष उम्र के युवाओं में कार, फैंसी स्मार्ट फोन, डिजायनर आउटफिट, दोस्तों के साथ हैंगआउट करने का शौक होता है। श्रीनगर में शहीद हुए कैप्टन पवन कुमार बेनीवाल भी इसी तरह के शौक रखते थे, लेकिन एक बात जो उन्हें बाकी युवाओं से अलग करती थी, वह थी देश और सेना के लिए उनका जुनून।
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अब तक इस मुठभेड़ में एक नागरिक समेत 4 लोगों की मौत हो गई है। शहीद जवानों की पहचान 144वीं बटालियन के मध्य प्रदेश निवासी हेड कांस्टेबल भोला सिंह और 79वीं बटालियन के कांस्टेबल (ड्राइवर) आरके राणा निवासी हिमाचल प्रदेश के रूप में हुई है।