रमजान के महीने में भी पाकिस्तान अपनी 'नापाक' हरकतों से बाज नहीं आ रही। भारतीय सेना इस हिमाकत का मुंहतोड़ जवाब देने को तैयार है।
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पाक की नापाक करतूतों पर भारतीय सेना और सख्ती के मूड में है। सीमा पार से पाक की गोलाबारी और फायरिंग का मुंहतोड़ जवाब सेना अब और कड़ी कार्रवाई के साथ देगी। भले इसकेलिए सेना को फिर से सर्जिकल स्ट्राइक जैसा एक्शन क्यों न दोहराना पडे़। पाक से निपटने की रणनीति को लेकर आर्मी चीफ विपिन रावत ने ये इरादा साफ कर दिया है कि पाकिस्तान की सीमा पर से की जा रही इन कायराना हरकतों को कतई बरदाश्त नहीं नहीं किया जाएगा।
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पाकिस्तान की हिमाकत से निपटने के लिए अहम रणनीति विगत दिनों वेस्टर्न कमांड के अधीनस्थ उतर भारत के सबसे बड़े आर्मी बेस कैंप अंबाला में तैयार हुई। आर्मी चीफ विपिन रावत इस दौरान एक दिन अंबाला सैन्य क्षेत्र में ही रहे। इस मैराथन एक्सरसाइज में आर्मी चीफ ने वेस्टर्न कमांड के आला अफसरों के साथ पिछले एक साल के दौरान पाकिस्तान की सीमापार से की गई कार्रवाई और किए गए सीजफायर के उल्लंघन पर विस्तृत चर्चा की।
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उसके बाद आर्मी चीफ ने अफसरों को ये साफ कर दिया है कि पाक की करतूतों का जवाब देने में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। इस दौरान पाक सीमा पर चौकसी और बढ़ाने और घाटी में पाक समर्थित आतंकवाद से निपटने को लेकर भी रणनीति तय की गई। उधर, यह भी तय हुआ कि आतंक के खिलाफ लिए जाने वाले सेना के एक्शन में भी नरमी की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी।
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अब ज्यादा खतरनाक होगी सर्जिकल स्ट्राइक
पाक से निपटने के लिए सेना सर्जिकल स्ट्राइक जैसा एक्शन फिर से कर सकती है, ये ट्रेलर सेना ने विगत दिनों हुई अपनी वार एक्सरसाइज ‘विजय प्रहार’ में भी दिखा दिया है। मगर इस बार सर्जिकल स्ट्राइक हुई तो पहले से ज्यादा खतरनाक होगी। सैन्य सूत्रों के अनुसार सर्जिकल स्ट्राइक के युद्धाभ्यास में सेना ने अपनी एक कमांड के स्पेशल फोर्स के जरिए इस एक्शन को और खतरनाक बनाने का प्रयास किया है।
वार एक्सरसाइज में स्पेशल फोर्स के कमांडों को पाक बॉर्डर के पास एक काल्पनिक बनाए गए पाकिस्तान के मुख्यालय में हेलीकाप्टरों की मदद से चार किलोमीटर की ऊंचाई से रात के अंधेरे में उतारा गया। करीबन सात सौ मीटर की ऊंचाई पर इन कमांडों ने अपने पैराशूट खोले और घुप अंधेरे में देखते ही देखते दुश्मनों के बीच गायब हो गए। उसके बाद इन कमांडों की फोर्स ने काल्पनिक पाक मुख्यालय को नेस्तनाबूद किया और वापस अपनी सीमा में लौटते हुए बड़े जोखिम के साथ फ्रंट लाइन पर तैनात दुश्मनों की फौज से लोहा लिया। फ्रंट लाइन के दुश्मनों से भी निपटने के बाद ये जांबाज वापस लौटे।