ऑपरेशन ब्लू स्टार को 31 साल बीत गए हैं। इन 31 सालों में मामले को लेकर सियासत का खेल खूब खेला गया, जो आज भी जारी है। देखिए कैसे? रिपोर्टः अनिल भारद्वाज, चंडीगढ़
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ऑपरेशन ब्लू स्टार, 31 साल और देखिए सियासत का खेल?
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हर साल जून माह शुरू होते ही सियासी गतिविधियां तेज हो जाती हैं। ऑपरेशन ब्लू स्टार के बारे में केंद्र सरकार का तर्क रहा है कि श्री हरमंदिर साहिब परिसर को जरनैल सिंह भिंडरावाला और आतंकियों से मुक्त करवाने के लिए इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया था, वहीं अकाली नेताओं का दावा है (किताब-पंजाब दा बाबा बोहड़ गुरचरण सिंह टोहड़ा के अनुसार) कि अकालियों व भिंडरावाला के बीच टकराव पैदा करने में नाकाम रहने पर केंद्र सरकार ने सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुना था।
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बीते कई दिनों से ऑपरेशन ब्लू स्टार के विरोध में प्रदर्शन जारी हैं। जम्मू में प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ संघर्ष में एक व्यक्ति की मौत हो गई। देश की विभिन्न जेलों में लंबे समय से बंद सिख कैदियों की रिहाई के लिए पिछले एक साल में कई प्रदर्शन हो चुके हैं। पंजाब सरकार ने सिख कैदियों की रिहाई के संबंध में एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर दिया है।
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मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने ऑपरेशन के वक्त सेना की ओर से सिख रेफरेंस लाइब्रेरी से ले जाई गई किताबों व अन्य सामग्री को वापस लाने के लिए केंद्र सरकार के साथ मामला उठाने की बात कही है।जून 1984 में श्रीहरमंदिर साहिब पर हुई सैन्य कार्रवाई के बाद से पंजाब सियासी उतार-चढ़ाव का एक लंबा दौर देख चुका है।
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ऑपरेशन ब्लू स्टार से पहले व बाद में चले आतंकवाद के लंबे दौर और 31 अक्तूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिख विरोधी दंगों के जख्म पीड़ितों को भुलाए नहीं भूलते। इस सारे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेसियों व अकालियों के बीच ऑपरेशन ब्लू स्टार का आरोप एकदूसरे के सिर मढ़ने की होड़ लगी रही।
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ऑपरेशन ब्लू स्टार के तहत सेना की आखिरी बड़ी कार्रवाई 6 जून की रात को हुई। माना जाता है कि इसी सैन्य कार्रवाई के दौरान जरनैल सिंह भिंडरावाला सहित उसके साथी अमरीक सिंह, थाड़ा सिंह मारे गए थे। उनके शव 7 जून तड़के मिले। 7 जूनको श्री हरमंदिर साहिब परिसर पर सेना का पूरा नियंत्रण होने के बाद कई अन्य शव भी मिले, जिनका बाद में संस्कार किया गया।
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ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद पंजाब में लोकतंत्र की बहाली और कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने के प्रयास शुरू हुए। इसकी शुरुआत राजीव-लौंगोवाल समझौते से की गई, लेकिन सफलता 1992 के बाद ही मिल पाई। आतंकवाद पर काबू पाने में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे हैं।
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पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद एक-एक कर अकाली नेताओं को रिहा किया गया और लोकतंत्र बहाली के प्रयास शुरू हुए। विभिन्न मसलों के हल के लिए राजीव-लोंगोवाल समझौता हुआ। ऑपरेशन ब्लू स्टार से पहले पंजाब समस्या के हल के लिए केंद्र सरकार व अकाली नेताओं के बीच बैठकों का लंबा दौर चला, लेकिन हल नहीं निकल सका।
बातचीत का दौर ऑपरेशन ब्लू स्टार और इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भी जारी रहा, जिसका नतीजा राजीव-लौंगोवाल समझौते के रूप में सामने आया, लेकिन यह समझौता भी सिरे नहीं चढ़ पाया। चंडीगढ़, पंजाबी भाषी इलाके और नदियों के जल बंटवारे के मसले आज भी जस के तस हैं।