क्या आप जानते हैं कि ऑनलाइन ठगे गए पैसे वापिस मिल सकते हैं? चौंकिए मत, यह सच है और ऐसा कैसे होगा? जानने के लिए पढ़ें पूरी जानकारी। रिपोर्टः कुलदीप शुक्ला, चंडीगढ़
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ये तरीका अपनाइए, वापिस मिल जाएंगे ऑनलाइन ठगे गए पैसे
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12 से 18 घंटे के भीतर इंटरनेट के जरिये फ्रॉड कर खाते से निकाली गई रकम की शिकायत कर दें तो वह वापस मिल सकती है। पुलिस के एक ई-मेल पर रकम ट्रांसफर करने वाली कंपनी उसको दूसरे खाते में जाने से रोक सकती है। इसी फार्मूले से साइबर पुलिस ने अब तक ठगी के शिकार लोगों के लाखों रुपये उनके खातों में वापस करा चुकी है।
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इंटरनेट बैंकिंग में रकम ट्रांसफर करने के कई चरण होते हैं। माना जाता है कि नेट से ट्रांसफर होकर रकम एक खाते से दूसरे खाते में पहुंच जाती है। जबकि रकम पहले पेमेंट गेटवे के पास आती है, (एक खाते से दूसरे खाते में पैसा भेजने वाली कंपनी) जहां से अगले 24 घंटे की अवधि में रकम ट्रांजेक्सन की प्रक्रिया पूरी होती है।
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कंपनी पुलिस के ई-मेल पर ऐसी रकम को आगे भेजने से रोक लेती है। इसके लिए जरूरी है कि 12 से 18 घंटे के बीच सूचना मिल जाए। तुरंत शिकायत आने पर पुलिस व बैंक के टाइअप से होगी कार्रवाई।
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पंजाब नेशनल बैंक के रिटायर्ड सीनियर मैनेजर एंड एक्स जनरल सेक्रेटरी सज्जन सिंह है कि उपभोक्ता बैंक संबंधी किसी भी तरह की शिकायत बैंक में ही कर सकता है। इस शिकायत पर बैंक तुरंत एक्शन लेगा। पीड़ित अपनी शिकायत आनलाइन व हार्ड कापी के माध्यम से कर सकता है। लेकिन, पीड़ित के पास बैंक संबंधी पूरे दस्तावेज रहने चाहिए।
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साइबर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन ठगी का पीड़ित जितनी जल्दी ठगी की सूचना पुलिस को देगा उतनी जल्दी पुलिस कार्रवाई शुरू कर सकती है। इसके बाद पुलिस संबंधित बैंक से टाइअप करके पीड़ित के खाते का ट्रांजेक्शन स्टाप करवा सकती हैं।
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चंडीगढ़ में ऑनलाइन ठगी की शिकायतें बढ़ी हैं। साल 2015 के पहले महीने में ही आनलाइन ठगी की दो दर्जन से अधिक शिकायतें दर्ज कराई गई थी। इनमें करीब सात शिकायतें एक ही दिन में दर्ज की गई थी। फिलहाल, चीटिंग के सैकड़ों शिकायतें दर्ज हो चुकी है।
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चंडीगढ़ आईजी आरपी उपाध्याय के अनुसार 2014 में आई शिकायतों से दोगुनी शिकायत साल 2015 के छह माह में दर्ज हो चुकी है। अगर साइबर सेल विभाग की बात करें तो विभाग में मैन पावर व टेक्निकल सुविधाओं की जरूरत है। इस दोनों विभाग में कमजोर होने के नाते साइबर क्राइम के मामले सुलझने में देरी होती है।
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चंडीगढ़ साइबर विभाग ने सभी थानों को यह संदेश भेजा है कि यदि ऑनलाइन ठगी की शिकायत आती है तो बिना देर किए घटना की जानकारी साइबर थाने को दी जाए, ताकि समय रहते कार्रवाई करके रकम को ठगने से बचाया जा सके।
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वैसे अगर लोग खुद जागरूक हों तो ऑनलाइन फ्रॉड से बच सकते हैं। अपने क्रेडिट एवं डेबिट कार्ड की जानकारी किसी को न दें। अपने बैंक अकाउंट से जुड़ी डिटेल किसी को न बताएं। अगर ऐसा करने से बचेंगे तो माली नुकसान से बच सकते हैं।