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Pics: प्यारे लाल वडाली को पोती ने ऐसे दी दादा को अंतिम विदाई, रो दिए सब

Mon, 12 Mar 2018 09:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
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प्यारे लाल वडाली
पोती ने अपने दादा प्यारे लाल वडाली को इस तरह से अंतिम विदाई दी कि देखकर सभी रो दिए, देखिए तस्वीरें।
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प्यारे लाल वडाली के भाई
उस्ताद पूरण चंद वडाली के छोटे भाई प्यारेलाल वडाली का शुक्रवार सुबह अमृतसर में 8.25 पर दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। शुक्रवार को ही पैतृक गांव गुरु की वडाली में उनका अंतिम संस्कार किया गया। बड़े बेटे ने उन्हें मुखाग्नि दी। बताया जा रहा है कि प्यारेलाल 26 फरवरी से फोर्टिस में भर्ती थे।
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प्यारे लाल वडाली
प्यारेलाल के बड़े भाई पूरनचंद वडाली ने बताया कि वे अपने पीछे तीन बेटियां और दो बेटे छोड़ गए हैं। वो मेरे साथ ही गाया करते थे। मुझे ही अपना गुरु मानते थे। हमारी जोड़ी ने दुनियाभर में अपनी गायकी से एक अलग मुकाम बनाया था। मशहूर पटियाला घराने से भी हमारा ताल्लुक रहा।

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प्यारे लाल वडाली
पूरणचंद वडाली बताते हैं कि हम दोनों भाइयों ने पहलवानी भी की। करीब ढाई दशक तक अखाड़ा ही हमारे लिए सब कुछ था। हमनें जमकर पहलवानी की और कई खिताब भी जीते। लेकिन पिता ठाकुरदास वडाली ने पहलवानी छोड़ने और संगीत सिखने के लिए कहा और हमें बात माननी पड़ी।
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प्यारे लाल वडाली
पूरणचंद ने बताया कि शुरु में पिता ने संगीत की शिक्षा दी। उसके बाद पंडित दुर्गादास और उस्ताद बड़े गुलाम अली खान, पटियाला घराना से स्वर साधना सीखी। 1975 में जालंधर के गांव हरवल्लभ में हमने पहली बार प्रस्तुति दी थी।
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प्यारे लाल वडाली
पूरनचंद वडाली ने बताया कि हम भाइयों ने बुल्ले शाह, कबीर, अमीर खुसरो और सूरदास के पदों को सुरों में पिरोया। गुरबानी के अलावा गजल और भजन भी गाए। 2003 में बॉलीवुड में एंट्री हुई। फिल्म पिंजर में गुलजार का लिखा गाना गाया।
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प्यारे लाल वडाली
पूरनचंद ने बताया कि 1992 में जब केंद्र सरकार ने हमें संगीत नाटक अवार्ड से सम्मानित किया तो एक बार यकीं ही नहीं हुआ। उसके बाद सिलसिला आगे बढ़ता चला गया। मध्य प्रदेश सरकार ने 1998 में तुलसी सम्मान से नवाजा था। वडाली ब्रदर्स को 1992 में संगीत नाटक अकादमी का प्रतिष्ठित सम्मान दिया गया था। 2003 में पंजाब संगीत अवार्ड दिया गया। 2005 में पूरनचंद को पदमश्री से सम्मानित किया गया।
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प्यारे लाल वडाली
वडाली ब्रदर्स तू माने या न माने, हीर और याद पिया की जैसे सूफी गानों के याद किए जाते हैं। वडाली ब्रदर्स फिल्मों में गाना नहीं चाहते थे, लेकिन बाद में वे राजी हो गए और फिर एक के बाद एक सुपरहिट बॉलीवुड गाने दिए। जैसे- रंगरेज मेरे (तनु वेड्स मनु, 2011), तू ही तू ही (मौसम, 2011), दर्दा मारेया (पिंजर, 2003) और चेहरा मेरे यार का (धूप, 2003) आदि।
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