सरस्वती नदी के अस्तित्व की पुष्टि होने के बाद एक और जगह से इसकी जलधारा के बहने के प्रमाण मिले हैं। देखिए इसे कैसे ढूंढ निकाला गया।
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सरस्वती नदी
- फोटो : फाइल फोटो
केंद्र सरकार की ओर से गठित वल्दिया कमेटी की रिपोर्ट में सरस्वती नदी के वैज्ञानिक प्रमाण मिलने की बात सामने आने के बाद हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (हरसैक) ने भी प्रदेश में इस नदी के अस्तित्व की पुष्टि की है।
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सरस्वती नदी
- फोटो : फाइल फोटो
हरसैक की रिपोर्ट के मुताबिक सरस्वती नदी की एक जलधारा सिरसा रोड स्थित दरियापुर गांव के नीचे आज भी बह रही है। हरसैक ने सैटेलाइट से दरियापुर गांव की कुछ तस्वीरें ली हैं, जिनमें एक जलधारा बहती हुई साफ तौर पर देखी जा सकती है।
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saraswati river
- फोटो : AmarUjala
हरसैक शीघ्र ही वैज्ञानिकों का दल भेजकर सैंपल एकत्रित करने की तैयारी में है। हरसैक के वैज्ञानिकों की मानें तो दरियापुर गांव का भूमिगत जलस्तर आसपास के अन्य गांवों से कहीं ज्यादा है। गांव से संबंधित पुराने राजस्व रिकॉर्ड में भी इस बात का जिक्र आता है कि यहां पर नदी की जलधारा थी।
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सरस्वती नदी खोज स्थल
- फोटो : AmarUjala
हरसैक के सूत्रों की मानें तो विभाग की पहली प्राथमिकता दरियापुर गांव के नीचे से निकल रही जलधारा के स्रोत का पता लगाना है। इसके बाद राजस्व विभाग के उस रिकॉर्ड को डिजिटलाइज किया जाएगा, जिसमें दरियापुर के नीचे से निकल रही जलधारा का जिक्र है।
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यमुनानगर में मिली सरस्वती नदी
- फोटो : फाइल फोटो
हरसैक वैज्ञानिकों की रिपोर्ट को आधार माना जाए तो सरस्वती नदी की जलधारा को जींद जिले से शुरुआत होती दिख रही है और फतेहाबाद के कुछ गांवों, जिनमें दरियापुर शामिल है, से होते हुए सिरसा में प्रवेश करती है। सिरसा के रास्ते आगे राजस्थान में चली जाती है।
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सरस्वती नदी
पुरातत्व विभाग ने भी इस बात के संकेत दिए थे कि फतेहाबाद जिले में सरस्वती नदी का अस्तित्व है। उन्होंने इसके पीछे जिले के गांव कुनाल और बनावाली में मिली कुछ वस्तुओं और बालू रेत का हवाला दिया था जो सरस्वती नदी के किनारे ही मिलती थी। इस बारे में अभी भी रिसर्च चल रही है।
हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर, हिसार के चीफ साइंटिस्ट डॉ. रमेश हुड्डा के मुताबिक, सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों में दरियापुर गांव के नीचे एक जलधारा बहती हुई नजर आ रही है। यहां का जलस्तर भी आसपास के मुकाबले अच्छा है। हमने यहां का फिजिकल सर्वे करा लिया है। इस जलधारा का जिक्र पुराने राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में भी मिला है। ये सारी बातें सरस्वती नदी के अस्तित्व की ओर इशारा कर रही हैं।