आज मिसाइल मैन अब्दुल कलाम का बर्थडे है। इस मौके पर उनके दोस्त व टर्मिनल बैलास्टिक रिसर्च लैबोरेटरी के डायरेक्टर मंजीत सिंह ने उनकी जिंदगी से जुड़े राज खोले।
विज्ञापन
2 of 8
apj abdul kalam
मंजीत सिंह बताते हैं कि एपीजे अब्दुल कलाम जमीन से जुड़े व्यक्ति थे। छोटी-छोटी बातों को वे हमेशा याद रखते थे। वे कभी थकते नहीं थे और 18 घंटे से ज्यादा काम करते थे। आम आदमी स्वभाव वाले व्यक्ति थे। प्रेसिडेंट होकर भी सभी ई-मेल व पत्रों का जवाब देते थे।
विज्ञापन
3 of 8
apj abdul kalam
मिसाइलमैन के साथ अपने एक अनुभव का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि एक बार वे यूएस में रिसर्च पेपर प्रस्तुत करने गए थे। जब लौटकर आए तो कुछ दिन बाद पता चला कि साउथ अफ्रीका में एक और कांफ्रेंस है और वहां भी रिसर्च पेपर पेश करना है। डिपार्टमेंट का नियम था कि एक बार विदेश में पेपर प्रजेंट करने के बाद दोबारा कुछ समय बाद ही देश से बाहर जा सकते हैं। डिपार्टमेंट की तरफ से कुछ समय सीमा तय की गई थी।
4 of 8
apj abdul kalam
मंजीत ने बताया कि उन्हीं दिनों अब्दुल कलाम चंडीगढ़ आए और उन्होंने पूछा कि साउथ अफ्रीका में पेपर प्रजेंट करने जा रहे हैं। मंजीत ने कहा कि वे नहीं जा सकते, कोई दूसरा साइंटिस्ट जाएगा। डिपार्टमेंट के नियम के मुताबिक एक बार विदेश जाने के कुछ दिन बाद ही दोबारा जाने की मंजूरी है। कलाम को थोड़ा अटपटा लगा और कहा ये क्या नियम है। अच्छे साइंटिस्ट को तो कांफ्रेंस में जरूर जाना चाहिए।
विज्ञापन
5 of 8
apj abdul kalam
मंजीत ने बताया कि लैब का दौरा करने के बाद कलाम चले गए और वे भी उस बात को भूल गए। कुछ दिनों बाद डीआडीओ से मंजीत सिंह के नाम पर एक आफिशियल लेटर आया। वह मंजीत सिंह को साउथ अफ्रीका में रिसर्च पेपर प्रजेंट करने का परमिशन लेटर था। जब उन्होंने लेटर देखा तो वे दंग रह गए। उन्हें विश्वास ही नहीं था कि अब्दुल कलाम ऐसी छोटी सी छोटी बातों को भी याद रखते होंगे।
विज्ञापन
6 of 8
apj abdul kalam
मंजीत बताते हैं कि कलाम को सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ से काफी लगाव था। पीयू में इंडियन साइंस कांग्रेस में अपने भाषण के दौरान उन्होंने कहा था कि उन्हें यह शहर बहुत पसंद है। यहां की लैब बहुत अच्छा काम करती है। डीआरडीओ का गेस्ट हाउस भी बहुत सुंदर है। गेस्ट हाउस में उन्होंने अपनी किताबों के चैप्टर भी लिखे हैं।
विज्ञापन
7 of 8
apj abdul kalam
मंजीत सिंह ने बताया कि अब्दुल कलाम अक्सर चंडीगढ़ आया करते थे। जब भी वे आते तो साइंटिस्ट को उत्साहित करते थे। वे इनोवेटिव काम को बढ़ावा देते थे। कई बार साइंटिस्ट डरते हैं कि यदि उनका इनोवेटिव वर्क फेल हो गया तो बदनामी होगी। लेकिन कलाम इस बात के पूरी तरह से खिलाफ थे। वे हमेशा कहते थे कि इनोवेटिव काम जरूर करें। फेल होने पर फिर से ट्राई करें। काम रुकना नहीं चाहिए।
अब्दुल कलाम ने लोगों से जुड़े रहने और अपने विचार शुभचिंतकों तक पहुंचाने के लिए www.abdulkalam.com/ वेबसाइट बनी थी। जब से उनकी मृत्यु की खबर फ्लैश हुई है, तब से उनकी वेबसाइट क्रेश हो गई है। वे अपने भाषण को उसी वेबसाइट पर अपलोड करते थे, ताकि जो सुन नहीं पाए थे, वे वहां से पढ़ सकते हैं। भाषण के अलावा वे अपने विजन का उल्लेख करते थे। हर दिन लाखों लोग उनकी वेबसाइट पर जाते थे।