बिना दहेज के शादी और एक रुपये में सगाई करके मिसाल बने ओलंपियन पहलवान योगेश्वर दत्त ने संन्यास ले लिया है। इसके पीछे की वजह जानेंगे तो सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा, जानिए 5 अनकही बातें।
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योगेस्वर दत्त और बजरंग पूनिया
ओलंपिक पदक विजेता और पद्मश्री योगेश्वर दत्त ने कुश्ती से संन्यास ले लिया है। एक कार्यक्रम में पहुंचे योगेश्वर ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि वह काफी समय से नहीं खेल रहे हैं तो संन्यास ही है। फिलहाल उनका सपना पहलवान बजरंग पुनिया को ओलंपिक गोल्ड मेडल जिताने का है। 2012 में लंदन ओलंपिक में 60 किलो भारवर्ग में कांस्य पदक विजेता योगेश्वर दत्त ने कहा कि कुश्ती में जीत के लिए दो ही चीजें ज्यादा जरूरी हैं- डिफेंस और लेग अटैक। इन दोनों में पारंगत बनाने के लिए बजरंग को टिप्स दे रहा हूं, ताकि वह देश के लिए ओलंपिक मेडल लेकर आए।
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yogeshwar dutt
पहलवान योगेश्वर ने पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि जैसे ही इस घटना का जानकारी मिली तो उन्हें और अकादमी में प्रैक्टिस कर रहे पहलवानों को काफी गुस्सा आया। अकादमी के पहलवानों ने दो मिनट का मौन रख शहीदों को श्रद्धांजलि भी दी। योगी ने कहा कि सेना को खुली छूट दी जानी चाहिए, ताकि आतंकियों और पत्थरबाजों को सबक सिखाया जा सके। योगेश्वर दत्त ने शहीदों के परिवारों की मदद के लिए वीर एप के जरिये 18 फरवरी को पांच लाख रुपये जमा करवाएंगे। उन्होंने सरकार से मांग की कि सीआरपीएफ जवानों को भी शहीद का दर्जा मिलना चाहिए।
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ओलंपियन योगेश्वर दत्त
- फोटो : अमर उजाला
योगेश्वर दत्त ने कहा कि मेरा प्रयास है कि ओलंपिक के हर वर्ग में हरियाणा का एक छोरा खेले और गोल्ड मेडल जीतकर प्रदेश के साथ देश का भी नाम रोशन करे। यहां एक कार्यक्रम में पहुंचे ओलंपिक पदक विजेता और पद्मश्री योगेश्वर दत्त ने यह बात कही। योगेश्वर ने कहा कि वह अपनी कुश्ती अकादमी में पहलवानों के साथ पूरी मेहनत करते हैं। हर वर्ग में बढ़िया प्रदर्शन करने के लिए पहलवानों को तैयार किया जा रहा है। हरियाणा सरकार को चाहिए वह खिलाड़ियों के लिए ग्राउंड पर आकर काम करे, ताकि प्रदेश की प्रतिभाएं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाएं और प्रदेश की ब्रांडिंग करे।
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योेगेश्वर दत्त
- फोटो : getty
योगेश्वर दत्त का जन्म 2 नवंबर 1982 हरियाणा के सोनीपत में हुआ था। योगेश्वर एक भारतीय कुश्ती खिलाड़ी हैं। योगेश्वर दत्त 8 साल की उम्र से पहलवानी कर रहे हैं। योगेश्वर दत्त ने साल 2012 में कुश्ती की 60 किग्रा फ्रीस्टाइल स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। कॉमनवेल्थ गेम्स 2014 में योगेश्वर दत्त ने 65 किलोग्राम भार वर्ग में फ्रीस्टाइल कुश्ती में कनाडाई पहलवान को हराकर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता था। इंचियॉन एशियन गेम्स में 65 किलोग्राम वर्ग फ्रीस्टाइल कुश्ती में गोल्ड मेडल जीते थे। 2012 में भारत सरकार ने योगेश्वर दत्त को राजीव गांधी खेल रत्न सम्मान से नवाजा है। योगेश्वर 2008 और 2012 ओलिंपिक में हिस्सा ले चुके हैं।
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योगेश्वर दत्त
- फोटो : अमर उजाला
अपनी इच्छा के अनुसार वे जल्द ही पहलवानी कोच राल्फ से पहलवानी सीखने लगे। इसके बाद कई पहलवानी प्रतिस्पर्धा जीतने के बाद 1999 के वर्ल्ड चैम्पियनशिप में गोल्ड जीतकर पहली बार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत दावेदारी को पेश किया। योगी के जीवन में एक ऐसा भी समय आया, जब वे घायल हो गए थे, फिर भी 2006 के दोहा गेम्स में भाग लिया। लेकिन उनका फ़ाइनल मुक़ाबला होने से ठीक पहले उनके पिता का देहांत हो गया। फिर भी हिमालय की तरह अटल योगी ने साहसपूर्वक अपने आप को इमोशनली और फिजिकली संभाला और गोल्ड जीतकर ही दम लिया।
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योेगेश्वर दत्त
- फोटो : getty
2008 में उन्होंने एशियन चैम्पियनशिप में गोल्ड जीता, जिससे उन्हें बीजिंग ओलिंपिक्स में एंट्री तो मिल गई। लेकिन यह ओलिंपिक्स उनके लिए कुछ खास नहीं रहा, जहां जापान के केनीची यूमोटों से क्वार्टर फाइनल में हार गए। 2010 का कॉमनवेल्थ गेम्स उनके लिए ओलिंपिक्स से मिले असफलतायों को भुलाने वाला साबित हुआ, जहां उन्होंने दुनिया के जाने-माने 60 किलोंग्राम के केटेगरी के कई पहलवानो को हराकर सोने पर कब्जा किया।
योगेश्वर दत्त को कुश्ती के गुर स्वर्गीय मास्टर सतबीर भैंसवालिया ने सिखाए थे। सतबीर पेशे से पीटीआई थे और रिटायर होने के बाद वह अखाड़ा चलाने लगे थे। योगेश्वर दत्त को अपने कॅरियर के दौरान कई बार चोट लगी है। वास्तव में वह बचपन से ही चोट का शिकार रहे हैं, लेकिन उन्होंने कुश्ती के प्रति अपने लगाव को कम नहीं होने दिया। उन्होंने 8 साल की उम्र से ही कुश्ती से नाता जोड़ लिया था और अब उनकी सफलता से तो हर कोई परिचित ही है। सोनीपत, हरियाणा के योगेश्वर ने अपनी तैयारी किसी और के साथ नहीं बल्कि वर्ल्ड चैंपियनशिप और एशियन गेम्स में मेडल विजेता रहे बजरंग के साथ की है।