पीएम मोदी ने 50 दिन मांगे थे हालात सामान्य होने के लिए, अब तो वो भी पूरे हो गए। लेकिन लाइनें तो अभी भी वही है। तो अब क्या..?
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गुरदासपुर स्टेट बैंक के बाहर कतारों मे खड़े लोग
- फोटो : अमर उजाला
नोटबंदी के बाद 50 दिनों में हालात सामान्य होने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दावा खोखला नजर आ रहा है। इसे लेकर दुकानदार, नौकरी पेशा, उद्योगपति से लेकर किसान परेशान है। बैंकों में लाइनें जरूर कुछ कम हुई हैं, लेकिन लोगों को रुपये अभी भी नहीं मिल पा रहे हैं।
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संगरूर में एक बैंक के बाहर कैश लेने वाले लोगों की लगी लंबी कतार।
- फोटो : अमर उजाला
बैंक और एटीएम खुलने से पहले ही लोग पैसे के लेनदेन को लेकर पहुंच जाते हैं, लेकिन उन्हें जरूरत मुताबिक कैश नहीं मिल पाने से भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संगरूर के कौला पार्क स्थित एचडीएफसी, बैंक आफ बड़ौदा, आईसीआईसी बैंक, पीएनबी सहित शहर के अन्य बैंकों तथा एटीएम के बाहर लोगों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। कई लोग तो सुबह से आकर बैंकों के बाहर खड़े हो जाते हैं और ग्यारह बजे के करीब कैश आते ही लोगों की कतार लंबी हो जाती है। इतने दिन बीत जाने के बावजूद एटीएम से सिर्फ दो हजार रुपये ही निकलवाए जा सकते हैं।
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अबोहर के स्टेट बैंक और गांव डंगरखेड़ा के पंजाब नेशनल बैंक के बाहर लगी ग्राहकों की भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
नोटबंदी को लेकर किसानों ने कहा कि यह फैसला परेशानी के अलावा कुछ और नहीं है। जालंधर के गांव नौग्गजा के किसान हरनाम सिंह का कहना है कि खेतों में फसल बीजने के लिए उन्हें हर दिन किसी न किसी सामान की जरूरत पड़ती है, मगर इनके रुपये अब हम आनलाइन कैसे देंगे। गांव कानपुर के किसान तोता सिंह ने कहा कि कभी डीजल, कभी फसल दाना, कभी ट्रैक्टर की रिपेयर तो कभी अन्य खर्चों के लिए कैश ही देना पड़ता है। हालात ये हैं कि बैंकों से उन्हें रुपये नहीं मिल रहे हैं। इस वजह से उनका खेती का काम भी रुकने लगा है।
अबोहर के स्टेट बैंक और गांव डंगरखेड़ा के पंजाब नेशनल बैंक के बाहर लगी ग्राहकों की भीड़।
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ट्रांसपोर्टर जगजीत सिंह कंबोज ने कहा कि सरकार कहती है कि हर पेमेंट आनलाइन और चेक से करें, लेकिन एक ड्राइवर को अगर पंजाब से दूसरे राज्य में जाना हो तो उसे रास्ते में कई जगह रुपये देने पड़ते हैं। टोल टैक्स से लेकर रोटी तक का खर्च कैश में देना पड़ता है। बैंक से रुपये नहीं मिल रहे और ड्राइवर पेटीएम करने में सक्षम नही है, तो गुजारा कैसे होगा। नोटबंदी जल्दबाजी में लिया गया फैसला है।