नोबल विजेता कैलाश सत्यार्थी ने पत्रकारों से अपनी जिंदगी से जुड़ा बेहद अहम राज साझा किया। देखिए तस्वीरें और आप भी जानिए।
विज्ञापन
नोबल विजेता सत्यार्थी ने खोला जिंदगी से जुड़ा सीक्रेट
2 of 7
कैलाश ने बताया कि उनका चंडीगढ़ से गहरा नाता है। उनकी भतीजी डॉ. मनीषा तिवारी पंजाब यूनिवर्सिटी के स्टेटिस्टिक विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। वे चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे।
विज्ञापन
नोबल विजेता सत्यार्थी ने खोला जिंदगी से जुड़ा सीक्रेट
3 of 7
कैलाश बताते हैं कि शांति का नोबेल पुरस्कार देश के सवा सौ करोड़ लोगों को समर्पित कर दिया है। उनके पास न पहले कोई मेडल था और न ही अब है। कैलाश ने कहा कि कि नोबेल पुरस्कार की घोषणा के बाद उन्होंने राष्ट्रपति से मुलाकात की। राष्ट्रपति ने कहा कि देश के पास एक भी नोबेल नहीं है। रविंद्रनाथ टैगोर को मिला एकमात्र नोबेल मेडल चोरी हो गया। कैलाश ने उसी समय उस मेडल को देश को समर्पित करने का फैसला कर लिया था।
नोबल विजेता सत्यार्थी ने खोला जिंदगी से जुड़ा सीक्रेट
4 of 7
कैलाश बताते हैं कि बेटियों को जानवरों की तरह बेचा जाता है। असम और अन्य राज्यों से पांच हजार में बेटियों को खरीदकर एक लाख में उनका सौदा किया जाता है। देशभर में भीख मांगने वाले बच्चों के पीछे भी बड़े गिरोह का हाथ है।
विज्ञापन
नोबल विजेता सत्यार्थी ने खोला जिंदगी से जुड़ा सीक्रेट
5 of 7
दुनिया भर में पहली बार बाल मजदूरी के खिलाफ आवाज उठाने वाले ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ के संयोजक कैलाश ने कहा कि सरकार को बाल मजदूरी रोकने के लिए गहराई से मंथन करना चाहिए।
विज्ञापन
नोबल विजेता सत्यार्थी ने खोला जिंदगी से जुड़ा सीक्रेट
6 of 7
हरियाणा और पंजाब का जिक्र करते हुए सत्यार्थी ने कहा कि इन राज्यों में भी बड़े स्तर पर बाल मजदूरी हो रही है। हाल में ही लुधियाना में उनके एनजीओ ने 13 बच्चों को मुक्त कराया है।
नोबल विजेता सत्यार्थी ने खोला जिंदगी से जुड़ा सीक्रेट
7 of 7
कैलाश ने कहा कि करोड़ों भक्तों के सामने धर्मगुरु कभी बाल मजदूरी के खिलाफ आवाज नहीं उठाते। देश के नेता कभी बच्चों के मुद्दों को राजनीति में प्राथमिकता नहीं देते। जब तक उनकी सांस रहेगी, वह समाज की इस मानसिकता के खिलाफ लड़ते रहेंगे।