पीएम मोदी ने लालबत्ती के इस्तेमाल पर आज रोक लगाई है लेकिन इस राज्य में तो पहले से ही न CM की गाड़ी पर लालबत्ती होती है न ही मंत्रियों की गाड़ी पर। पढ़िए यहां तो VIP कल्चर है ही नहीं...
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मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह
दरअसल, पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में पहली कैबिनेट बैठक में नेताओं-अफसरों की कारों से लाल बत्ती को हटाने का फैसला लिया था। तब से यहां न तो कोई मंत्री लालबत्ती लगाकर घूमता है न ही सीएम की गाड़ी पर लालबत्ती होती है।
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- फोटो : फाइल फोटो
उधर, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की ओर से वीआईपी कल्चर का प्रतीक बनी लाल बत्ती को सरकारी वाहनों से हटाने के फैसले का स्वागत किया है। कैप्टन ने इसे एक अहम कदम बताते हुए कहा कि इससे देश की लोकतांत्रिक जड़ें और मजबूत होंगी।
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Punjab Cabinate meeting
- फोटो : अमर उजाला
कैप्टन ने बुधवार को एक बयान में कहा कि इन पिछड़े चिह्नों को वीआईपी संस्कृति के तौर पर उत्साहित किया गया था, जोकि भारत में दशकों से चला आ रहा है, लेकिन इन्हें अब तुरंत समाप्त किए जाने की आवश्यकता है। लोगों की सरकार तक पहुंच को सरल बनाने और पारदर्शी प्रशासन को बढ़ावा देने की जरूरत है।
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- फोटो : File Photo
कैप्टन के साथ ही पंजाब सरकार के अन्य मंत्रियों ने भी लाल बत्ती को लेकर केंद्र सरकार के फैसले की सराहना करते हुए इसे विकासमयी कदम बताया है। सूबे के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने कहा कि पंजाब इस दिशा में देश का रुझान पैदा करने में अग्रणीय रहा है, जिसने कैप्टन के नेतृत्व में पहली कैबिनेट बैठक में नेताओं-अफसरों की कारों से लाल बत्ती को हटाने का फैसला लिया था। तकनीकी शिक्षा मंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी केंद्र के फैसले को एक सकारात्मक कदम बताया है।
चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर कैप्टन अमरिंदर ने नहीं ली वीआईपी सुविधा
- फोटो : File Photo
वीआईपी कल्चर खत्म करने की मुहिम जारी
मुख्यमंत्री ने राज्य में लाल बत्ती पर रोक लगाने के साथ ही वीआईपी कल्चर को पूरी तरह खत्म करने की मुहिम छेड़ दी है। उन्होंने अब राज्य की सभी विकास परियोजनाओं के नींव पत्थर और उद्घाटन पट पर मुख्यमंत्री या किसी मंत्री या विधायक का नाम लिखने के वर्षों पुराने चलन पर भी रोक लगा दी है।