पाकिस्तान अपनी हरकतों से कभी बाज नहीं आएगा। अब उसकी एक और नापाक हिमाकत पता चली है, जिसके चलते इस शख्स की वतन वापसी लटक गई है।
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पाकिस्तान के बजरंगी भाईजान ने ढूंढ निकाली नानक सिंह की फैमिली
दरअसल, पाकिस्तान की बेरुखी के चलते 33 साल पहले सरहद पार कर गलती से पाकिस्तान चले जाने वाले नानक सिंह की वतन वापसी नहीं हो पा रही है। मामले पर वीरवार को केंद्र सरकार ने अपना जवाब सौंपा। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को दिए जवाब में केंद्र ने कहा कि बार-बार प्रयास के बाद भी पाकिस्तान सरकार की ओर से दिलचस्पी न दिखाए जाने के चलते नानक की वतन वापसी नहीं हो पा रही है।
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नानक सिंह की मदद को आगे आईं सुषमा स्वराज
हाईकोर्ट ने केंद्र के हलफनामे को रिकार्ड पर लेते हुए सुनवाई 8 मई तक स्थगित कर दी। फाजिल्का के स्वर्ण सिंह ने याचिका में कहा था कि अमृतसर का अजनाला गांव पाकिस्तान सीमा से सटा है। उसमें रहने वाले गरीब परिवार का 5 वर्षीय बेटा नानक 1984 में पशुओं को चराते हुए पाकिस्तान की सीमा में चला गया था। नानक के पिता रतन सिंह ने अपने बेटे को वापस लाए जाने के हरसंभव प्रयास किए।
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नानक सिंह की मदद को आगे आईं सुषमा स्वराज
बीएसएफ के सामने मुद्दा उठाया गया तो 1999 में पाकिस्तान की ओर से वहां जेल में रह रहे भारतीय कैदियों की एक सूची सौंपी गई। इस सूची में नानक सिंह का नाम कक्कर सिंह था, जबकि पिता और गांव का नाम साबित करता है कि वह नानक सिंह ही है। 2005 में इस बच्चे के पिता रतन सिंह को बीएसएफ ने पत्र के माध्यम से बताया कि कुछ आवश्यक दस्तावेजों के अभाव में उनके बेटे को नहीं खोज पा रहे हैं।
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नानक सिंह की मदद को आगे आईं सुषमा स्वराज
स्वर्ण सिंह ने कहा कि अब वह 5 वर्षीय बच्चा 37 वर्ष की आयु का व्यक्ति होगा और अब भी बिना किसी जुर्म के पाकिस्तान की जेल है। लंबे समय से केंद्र सरकार सहित राज्य सरकार से गुहार लगाते हुए बेटे को पाकिस्तान से भारत लाए जाने की मांग की जा रही है, लेकिन अभी तक उसकी वतन वापसी नहीं हो पाई है। हाईकोर्ट ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पंजाब सरकार सहित केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
जस्टिस एसएस सारों एवं जस्टिस दर्शन सिंह की खंडपीठ ने पिछली सुनवाई पर गृह मंत्रालय व विदेश मंत्रालय के सचिव से जवाब तलब किया था। इस पर केंद्र सरकार की ओर से पैरवी कर रहे भारत सरकार के सीनियर काउंसिल पंकज जैन ने हाईकोर्ट को बताया कि पिछले कुछ साल में पाकिस्तान सरकार को 9 पत्र लिखकर इस बारे में प्रयास किया गया, लेकिन पाकिस्तान इस बारे में गंभीर नहीं है।