19 मासूमों का कत्ल करने वाला निठारी का नरपिशाच मोनिंदर सिंह पंढेर आखिर कौन है और कहां का रहने वाला है। जानिए इसके बारे में सब कुछ और हत्याकांड की पूरी टाइमलाइन।
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नोएडा का निठारी कांड देश के सबसे ज्यादा जघन्यतम हत्याकांडों में से एक है। 2006 के आखिर में सामने आए इस हत्याकांड के खुलासे ने सबको हैरान कर दिया था। वहीं इसे अंजाम देने वाला एक मनमौजी मालिक था मोनिंदर सिंह पंढेर और दूसरा था उसका नौकर सुरेंद्र कोली। दोनों को 24 जुलाई 2017 को एक मामले में फांसी की सजा सुनाई गई है। ये सजा उन्हें 21 साल की दीपिका उर्फ पायल के हत्या के आरोप में सुनाई गई है।
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- फोटो : अमर उजाला
कौन है पंढेर
अगस्त 1957 में जन्मा मोनिंदर सिंह पंढेर पंजाब की एक बिजनेसमैन फैमिली से संबंध रखता है। पंढेर ने शिमला के प्रतिष्ठित बिशप कॉटन स्कूल से पढ़ाई की। दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफेंस कॉलेज से ग्रेजुएशन की। चंडीगढ़ में सेक्टर-27 में पंढेर की कोठी नंबर 1012 है। यहां उनकी बीवी दविंदर कौर और बेटा करनदीप रहते हैं। इस कोठी में कई नौकर काम करते हैं। वहीं मोनिंदर पत्नी के साथ न रहकर नोएडा में डी5 कोठी में अकेले रहते थे, साथ में नौकर कोली रहता था।
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कई दिन से चंडीगढ़ रह रहा था
सोमवार को जब पंढेर को फांसी की सजा सुनाई गई तो चंडीगढ़ में उनकी कोठी में रहने वाले नौकर इससे अंजान थे। नौकरों ने बताया कि पिछले कई दिन से वे यही रह रहे थे और घर से बाहर नहीं निकलते थे। कभी कभार पार्क में टहलने जाया करते थे। एक नौकर ने बताया कि शनिवार को पंधेर बेटे और पत्नी के साथ घर से निकला था। नोएडा में किसी शादी समारोह में शरीक होना था। बता दें कि शनिवार को ही अदालत ने पंधेर और कोली को दोषी करार दिया था।
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पिछले दिनों आया था हार्ट अटैक
नौकर ने बताया कि कुछ दिनों पहले पंढेर को हार्ट अटैक भी आया था, जिसका इलाज चल रहा था। इसके चलते उसका ज्यादातर समय घर पर ही गुजरता था। कोठी के आसपास रहने वाले भी पंधेर से ज्यादा वास्ता नहीं रखते। नौकर को जब यह पता चला कि पंढेर को फांसी की सजा सुनाई गई है तो वह चौंक गया। जान लिजिए कि आठ से ज्यादा जेल में रहने के बाद पंधेर 27 सितंबर 2014 को गाजियाबाद की डासना जेल से जमानत पर बाहर आया था।
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पिंकी सरकार की हत्या में फांसी
देश के बहुचर्चित निठारी कांड मामले में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने सोमवार को मोनिंदर सिंह पंढेर और उनके घरेलू नौकर सुरिंदर कोली को फांसी की सजा सुनाई है। ताजा मामला पिंकी सरकार की हत्या से जुड़ा है। गाजियाबाद की विशेष सीबीआई अदालत ने इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस मानते हुए यह फैसला सुनाया है। शनिवार 22 जुलाई को पंढेर और कोली पर लड़की को अगवा करने, उसका बलात्कार करने और उसकी हत्या करने का दोषी पाया गया है।
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22 जुलाई को ही पंढेर दोबारा गिरफ्तार
शनिवार 22 जुलाई को ही पंढेर को दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया था। निठारी कांड का इस आठवें फैसले में सुरेंद्र कोली के साथ ही खूनी कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंधेर को भी फांसी की सजा सुनाई गई है। 20 वर्षीय पिंकी सरकार के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या के इस मामले में सजा का एलान किया। विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने कोली पर 35 और पंधेर पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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कोर्ट ने उन्हें अपहरण, रेप, हत्या, आपराधिक षड्यंत्र और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में दोषी मानते हुए सजा सुनाई है। सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा ने बताया कि विशेष अदालत ने सुरेंद्र कोली को हत्या, अपहरण, रेप की कोशिश और साक्ष्य मिटाने का दोषी करार दिया। वहीं, उसके मालिक मोनिंदर सिंह पंधेर को हत्या, रेप की कोशिश, सबूत मिटाने में कोली का सहयोग करने का दोषी मानते हुए मौत की सजा सुनाई।
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जेपी शर्मा ने बताया कि इससे पहले भी कोली को सात मामलों में फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। वहीं, मोनिंदर सिंह पंधेर को निठारी के एक मामले में 2009 में फांसी की सजा सुनाई गई थी। पंधेर की अपील अर्जी पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने उसकी फांसी की सजा को खारिज कर दिया था। डासना जेल में बंद निठारी कांड के इस मामले में दोषी करार दिए गए मोनिंदर सिंह पंधेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली को सोमवार सुबह 11.27 बजे कड़ी सुरक्षा के बीच सीबीआई विशेष कोर्ट में पेश किया गया।
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अपने 114 पेज के फैसले में विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने मोनिंदर सिंह पंधेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली को समाज के लिए नासूर बताया है। उन्होंने कहा है कि ‘खून के बदले खून का सिद्धांत किसी भी सभ्य समाज में लागू नहीं किया जा सकता। फिर भी राज्य का काम ऐसा समाज बनाना है, जिसे सभ्य और सुसंस्कृत कहा जा सके। यह तभी संभव है जब दोष सिद्ध अभियुक्त जैसे दरिंदे जो सभ्य समाज के लिए नासूर व खतरा बन चुके हैं, को सजा-ए-मौत से दंडित किया जाए।
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मामले की जांच में सामने आया कि अभियुक्तों ने हैवानियत की सारी सीमाएं लांघ दीं। एक युवती को काम व अच्छी पगार दिलाने के बहाने सुरेंद्र कोली ने उसे कोठी संख्या डी-5 में बुलाया और अंदर ले जाकर चुन्नी से गला दबाकर उसे बेहोश कर दिया। उसके साथ बलात्कार का प्रयास किया और फिर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद लाश को काट-पीटकर गैलरी और नाले में फेंक देता था तथा मांस के कुछ भाग को पकाकर खा जाता था।
अभियुक्त मोनिंदर सिंह पंधेर ने ऐसे अमानवीय, पाशविक, क्रूर एवं जघन्यतम अवैध कृत्य और आपराधिक षड्यंत्र में शामिल होकर समाज व राष्ट्र को सदमा पहुंचाया है। ऐसी प्रवृति तो जानवरों में भी नहीं होती। अभियुक्त समाज के लिए खतरा बन चुके हैं। इनमें सुधार और पुनर्वास की संभावनाएं न के बराबर हैं। इस समय भी अभियुक्तगण को अपने द्वारा किए गए अपराध के बारे में कोई प्रायश्चित नहीं है। अभियुक्तों को तब तक फांसी पर लटकाया जाए, जब तक उनकी मृत्यु न हो जाए।’
- पवन कुमार तिवारी, सीबीआई विशेष न्यायाधीश