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शहादत को न भूलेंगे हम: राखी भी न बांध पाया तीन बहनों का इकलौता भाई, वीडियो कॉल पर कही थी ये बात

Fri, 12 Aug 2022 02:10 AM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, हांसी (हरियाणा)
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शहीद निशांत मलिक - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू-कश्मीर के राजौरी में आर्मी कैंप के समीप आतंकवादी हमले में सेना के जवान व हरियाणा के हांसी के आदर्श नगर मोहल्ला निवासी जयबीर मलिक के बेटे निशांत मलिक शहीद हो गए हैं। तीन बहनों के इकलौते भाई निशांत ने बुधवार रात बहनों ने वीडियो कॉल कर बात की थी। बहनों ने उन्हें गुरुवार की सुबह राखी बांध लेने को कहा था। सुबह आर्मी हेडक्वार्टर से निशांत के शहीद होने की सूचना मिली। शुक्रवार रात तक उनका पार्थिव शरीर घर पहुंचेगा। पिता जयबीर सिंह रिटायर्ड हवलदार हैं और वे भी कारगिल युद्ध में लड़ चुके हैं।
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निशांत के पिता को ढाढस बंधाते प्रेम सिंह मलिक व अन्य। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पिता जयबीर सिंह ने बताया कि निशांत 11 राष्ट्रीय राइफल में तैनात थे। उनकी ड्यूटी राजौरी के नौसेरा सेक्टर में थी। आर्मी को जानकारी मिली कि आतंकवादी पास के गांव में हैं। आर्मी के जवान मौके पर पहुंचे तो आतंकवादियों ने हमला कर दिया। फायरिंग में दो आतंकी मारे गए। जबकि आतंकवादी हमले में सेना के चार जवान शहीद हो गए, जिनमें निशांत मलिक भी थे। जयबीर सिंह मूलरूप से हिसार जिले के गांव ढंढेरी के रहने वाले हैं।
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शहीद निशांत मलिक। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वह वर्ष 1998 में वह शहर में आकर बसे थे। अब वह आदर्श नगर में अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। निशांत मलिक की तीन बहनें हैं, जिनमें से किरण व ज्योति विवाहित हैं, जबकि नीरज अविवाहित है। नीरज का रिश्ता पक्का चुका है और दिसंबर में उसकी शादी होनी है। बहन को कार में विदा करने के लिए बीते दिनों निशांत ने बुकिंग भी कराई थी। निशांत खुद अविवाहित था।

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भारत-पाकिस्तान सीमा। - फोटो : फाइल
कारगिल युद्ध लड़ चुके पिता बोले- गर्व है कि बेटा देश के लिए शहीद हुआ
निशांत के पिता जयबीर सिंह आर्मी से रिटायर्ड हैं। 18 वर्ष की ड्यूटी के बाद वह रिटायर हुए थे। कारगिल युद्ध के दौरान उन्हें दाहिने बाजू पर गोली लगी थी। आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में आर्मी कैंप में एक समारोह का आयोजन किया गया था, जिसमें युद्ध के दौरान जख्मी हुए जवानों को सम्मानित किया गया था। वह इस कार्यक्रम में सम्मानित होकर लौटे तो सूचना मिली। जयवीर ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनका बेटा देश के लिए शहीद हुआ।
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रक्षाबंधन - फोटो : istock
सेना में अफसर पद पर हो गया था चयन
निशांत ने फरवरी में ही सेना में अधिकारी बनने के लिए परीक्षा दी थी और सफल भी हो गया था। स्नातक की डिग्री न होने के कारण अभी उसे तैनाती नहीं मिली थी। इसलिए निशांत ने स्नातक की परीक्षा के लिए जून में छुट्टी ली थी। 18 जुलाई को ड्यूटी पर लौटे थे। पहले 30 दिन के लिए और बाद में 15 दिनों की छुट्टियां बढ़वाई थीं। जयवीर सिंह ने बताया कि निशांत को बचपन से ही आर्मी में भर्ती होने की इच्छा थी। वह पढ़ाई में भी होशियार था। ढाई वर्ष पहले दिल्ली में हुई भर्ती में निशांत का चयन हुआ था।
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