निर्मल डेरा के मुखी संत बाबा अजीत सिंह जी हंसाली वाले की देह को रविवार को जल प्रवाह कर दिया गया। उनकी अंतिम शवयात्रा सुबह आठ बजे पंजाब के फतेहगढ़ साहिब से बिभौर साहिब के लिए रवाना हुई।
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तस्वीरों में देखिए, युवराज के धार्मिक गुरु की अंतिम यात्रा
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अरदास के बाद संत के पार्थिव शरीर को फूलों से सजाए गए एक खुले वाहन में लोगों को दर्शनों के लिए रखा गया। जैसे ही संत की अंतिम यात्रा शुरू हुई तो संगतों ने उनके शरीर पर फूलों की वर्षा की और वैरागमय गुरबाणी का जाप कर नम आंखों से उन्हें विदाई दी।
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अंतिम यात्रा बड़ाली आला सिंह से होती हुई डेरा दुफेड़ा साहिब, डेरा ज्योति स्वरूप, गुरुद्वारा श्री ज्योति स्वरूप साहिब के सामने और गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब के सामने जुटी बड़ी संख्या में संगतों के लिए कुछ समय को रोकी गई।
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इसके बाद यात्रा मोरिंडा से डेरा भरतगढ़, गुरुद्वारा साहिब भरतगढ़ और श्री आनंदपुर साहिब से होती हुई गुरुद्वारा श्री बिभौर साहिब में पहुंची जहां संत अजीत सिंह की देह को जल प्रवाह किया गया।
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पार्थिव शरीर के साथ कई-कई किलोमीटर तक गाड़ियों का लंबा काफिला साथ-साथ चल रहा था। पुलिस की ओर से पूरे रास्ते पर पुख्ता प्रबंध कर ट्रैफिक अन्य रास्तों से निकाला जा रहा था। इस रास्ते पर संगतों के लिए लंगर भी लगाए गए थे।
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अंतिम यात्रा में सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा, शिअद जिलाध्यक्ष जगदीप सिंह चीमा, पूर्व अकाली विधायक दीदार सिंह भट्टी, एसजीपीसी अंतरिम कमेटी सदस्य जत्थेदार करनैल सिंह पंजोली सहित कांग्रेस अध्यक्ष हरिंदर सिंह भांबरी, विधायक कुलजीत सिंह नागरा, काका रणदीप सिंह, साधु सिंह धर्मसोत और गुरकीरत सिंह कोटली शामिल हुए। सभी ने संत अजीत सिंह जी हंसाली वाले के अकाल प्रस्थान से समाज को कभी न पूरा होने वाला घाटा करार दिया।
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निर्मल डेरा हंसाली के संचालक संत बाबा अजीत सिंह हंसाली वाले का वीरवार रात निधन हो गया था। वे 75 वर्ष के थे। वीरवार रात 9.30 बजे डेरा निर्मल आश्रम हंसाली में ही संत बाबा अजीत सिंह ने अंतिम सांस ली थी।