पठानकोट आतंकी हमले में आतंकियों की मदद से घिरे एसपी सलविंदर सिंह से आज दिल्ली में एनआईए की टीम पूछताछ करेगी। देखिए, क्या होंगे सवाल?
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SP का 'सच से सामना', ये 12 सवाल पूछ सकती है NIA
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एनआईए की पूछताछ में लगातार अपने बयान बदलने के कारण सलविंदर सिंह शक के दायरे में आ रहे हैं। उनका लाई डिटेक्टर टेस्ट भी हो सकता है। एनआईए को शक है कि सलविंदर के स्थानीय ड्रग माफिया से संबंध रहे हैं। इन्हीं संबंधों के कारण वह आतंकियों के चक्कर में फंस गए और मजबूरन उनको मदद करनी पड़ी हो। आरोप ये भी हैं कि आतंकियों को एयरबेस तक पहुंचाने में कहीं न कहीं सलविंदर की भूमिका संदिग्ध रही है।
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सवाल-1: सच कौन छुपा रहा है?: एसपी सलविंदर सिंह ने कहा कि वह अक्सर दरगाह जाते थे। नए साल के कारण वह वहां माथा टेकने के लिए गए थे। सवाल उठता है कि अगर एसपी सही हैं तो सोमराज झूठ क्यों बोल रहा है कि एसपी पहली बार दरगाह में आए थे। सवाल-2: अलग-अलग समय: एसपी के मुताबिक वह रात 11 बजे दरगाह से निकले और आतंकियों ने उन्हें अगवा कर लिया जबकि सोमराज का कहना है कि एसपी सलविंदर सिंह 9.30 बजे ही दरगाह से चले गए थे। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि एसपी दो घंटे कहां रहे।
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सवाल-3: क्यों गायब था गनमैन : एसपी बिना गनमैन के पाक सीमा से 10 किलोमीटर दूरी पर रात को क्यों गए सवाल-4: नीली बत्ती क्यों लगाई: एसपी ने अपनी निजी गाड़ी पर नीली बत्ती क्यों लगा रखी थी। कानूनन वह नीली बत्ती नहीं लगा सकते थे। इसी कारण उनकी गाड़ी नाके पार करने में कामयाब रही।
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सवाल-5: सुबह डेरे क्यों गए साथी: एसपी का कुक मदन गोपाल और सुनार राजेश वर्मा वीरवार सुबह दरगाह गए थे तो शाम को दोबारा वहां क्यों गए। इसका जवाब भी एसपी के पास नहीं है। सवाल-6: ड्राइवर की गैर मौजूदगी: एसपी के पास सरकारी गाड़ी चलाने के लिए ड्राइवर है तो वह उसे साथ लेकर क्यों नहीं गए। 31 दिसंबर को धुंध में उनको खुद गाड़ी चलाने में रिस्क क्यों महसूस नहीं हुआ।
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सवाल-7: संख्या बताने में फेल: एसपी, मदन गोपाल और राजेश वर्मा अभी तक आतंकियों की संख्या बताने में असफल रहे हैं। एक एसपी की नजर से संख्या का बच जाना भी हैरानी भरा है। सवाल-8: क्यों रोकी गई गाड़ी: एसपी सलविंदर सिंह और उनके साथी राजेश वर्मा को जब लगा कि आतंकियों ने उन्हें घेर लिया है तो उन्होंने गाड़ी दौड़ाई क्यों नहीं।
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सवाल-9: पठानकोट एयरबेस हमले को अंजाम देने के लिए आतंकियों के हैंडलर ने क्या ड्रग पैडलर की मदद ली, क्या ड्रग पैडलर ने पीएपी के असिस्टेंट कमांडेंट सलविंदर का इस्तेमाल किया? आतंकियों को एयरबेस तक पहुंचाने में किसने मदद की? यह सवाल भी है कि क्या कोलियां की तरफ आते समय सलविंदर के दोस्त राजेश वर्मा ने आतंकियों को ड्रग पैडलर समझकर गाड़ी रोकी थी।
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सवाल-10: एसपी गाड़ी में अपने साथ अपने गनमैन को लेकर क्यों नहीं जा रहे थे? उनके पास उनका सरकारी हथियार भी क्यों नहीं था? एक पुलिस अफसर होने की हैसियत से क्या यह उनका दायित्व नहीं था कि वह अपनी जान पर खेलकर भी आतंकवादियों से मुकाबला करते? एसपी और उनके साथ के लोगों ने चाबी फेंक देने जैसी कोई हरकत कर आतंकियों को गाड़ी पर काबिज होने से रोकने की कोशिश क्यों नहीं की?
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सवाल-11: सलविंदर सिह, उनके रसोइये मदन गोपाल और उनके दोस्त राजेश वर्मा, तीनों एक ही घटना के शिकार हैं. तीनों को आतंकियों ने अगवा किया था, लेकिन तीनों के बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे हैं। बयानों में एक अंतर आतंकवादियों की संख्या को लेकर है। आतंकवादियों के साथ सबसे दूर तक जाने वाले वर्मा का कहना है कि तीन या चार आतंकवादी थे। एसपी और उनके रसोइये का कहना है कि चार या पांच आतंकवादी थे।
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सवाल-12: दूसरी विसंगति आतंकवादियों द्वारा राइफल के बट से इनकी पिटाई में सामने आई है। वर्मा और गोपाल के शरीर पर चोट के निशान हैं। एसपी के शरीर पर नहीं हैं। जांचकर्ता इस बात को लेकर भी उधेड़बुन में हैं कि आतंकवादियों ने टैक्सी ड्राइवर इकागर सिंह का गला काट दिया, उसे चाकू से गोदकर मार डाला, वर्मा का गला भी काटने की कोशिश की। लेकिन एसपी को खरोंच तक नहीं आई. ऐसा क्यों हुआ?
गौरतलब है कि सलविंदर सिंह पंजाब पुलिस में 1986 में बतौर एएसआई शामिल हुए थे। यह नौकरी उन्हें अनुकंपा के आधार पर मिली थी, क्योंकि उनके पिता निर्मल जीत सिंह 1965 की जंग में शहीद हो गए थे। उन्हें मरणोपरांत 1969 में पुलिस मेडल मिला था। सलविंदर सिंह अमृतसर में डीएसपी और तरनतारन, गुरदासपुर जिले के एसपी रह चुके हैं। हमले से दो दिन पहले ही उनका तबादला पीएपी में असिस्टेंट कमाडेंट के पद पर हुआ।