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पढ़ें समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट के बारे में, कब हुआ और कितने लोगों ने गंवाई थी जान

Thu, 21 Mar 2019 01:18 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला (हरियाणा)
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समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट - फोटो : File Photo
समझौता एक्सप्रेस मामले में पंचकूला की एनआईए अदालत ने स्वामी असीमानंद समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। पाक महिला की अपील को खारिज करने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया। आइए जानते हैं क्या था पूरा मामला, कब हुआ ब्लास्ट और कितने लोगों ने गंवाई थी जान...
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समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट - फोटो : File Photo
इस मामले में मुख्य आरोपी असीमानंद, लोकश शर्मा, कमल चौहान और राजिंदर चौधरी को अदालत ने बरी कर दिया है। बता दें कि भारत-पाकिस्तान के बीच सप्ताह में दो दिन चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में 18 फरवरी 2007 में बम धमाका हुआ था। हादसे में 68 लोगों की मौत हो गई थी। ब्लास्ट में 12 लोग घायल हो गए थे। ट्रेन दिल्ली से लाहौर जा रही थी। धमाके में जान गंवाने वालों में अधिकतर पाकिस्तानी नागरिक थे। मारे जाने वाले 68 लोगों में 16 बच्चों समेत चार रेलवे कर्मी भी शामिल थे।
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समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट
विस्फोट हरियाणा के पानीपत जिले में चांदनी बाग थाने के अंतर्गत सिवाह गांव के दीवाना स्टेशन के नजदीक हुआ था। इस ब्लास्ट के सभी आरोपियों के खिलाफ पंचकूला की स्पेशल एनआईए कोर्ट में केस चल रहा है।

बचाव पक्ष के वकील के मुताबिक 224 गवाहों के बयान अभियोजन पक्ष की ओर से दर्ज हुए थे। इस मामले में बचाव पक्ष की ओर से कोई गवाह पेश नहीं हुआ है। इसमें कुल 302 गवाह थे। इनमें चार पाकिस्तानी नागरिक थे। कोर्ट की ओर से उन्हें लगातार समन भेजा गया। इनमें एक भी गवाह पेश नहीं हुआ। इसके बाद कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई को आगे बढ़ाया था।

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समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट - फोटो : File Photo
15 मार्च 2007 को हरियाणा पुलिस ने इंदौर से दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। यह इन धमाकों के सिलसिले में की गई पहली गिरफ्तारी थी। पुलिस इन तक सूटकेस के कवर के सहारे पहुंच पाई थी। ये कवर इंदौर के एक बाजार से घटना के चंद दिनों पहले ही खरीदा गया था।

बाद में इसी तर्ज पर हैदराबाद की मक्का मस्जिद, अजमेर दरगाह और मालेगांव में भी धमाके हुए और इन सभी मामलों के तार आपस में जुड़े हुए बताए गए। समझौता मामले की जांच में हरियाणा पुलिस और महाराष्ट्र के एटीएस को ‘अभिनव भारत’ नाम के संगठन के शामिल होने के संकेत मिले थे।
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समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट
एनआईए ने की थी जांच
26 जुलाई 2010 को मामला एनआईए को सौंपा दिया गया था। एनआईए ने 26 जून 2011 को पांच लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। पहली चार्जशीट में नाबा कुमार उर्फ स्वामी असीमानंद, सुनील जोशी, रामचंद्र कालसंग्रा, संदीप डांगे और लोकेश शर्मा का नाम था। एनआईए ने पंचकूला विशेष अदालत के सामने एक अतिरिक्त चार्जशीट दाखिल की थी। 24 फरवरी 2014 से इस मामले में सुनवाई जारी है।

अगस्त 2014 में समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट केस में अभियुक्त स्वामी असीमानंद को जमानत मिल गई। कोर्ट में जांच एजेंसी एनआईए असीमानंद के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं दे पाई थी। उन्हें सीबीआई ने 2010 में उत्तराखंड के हरिद्वार से गिरफ्तार किया था। उन पर वर्ष 2006 से 2008 के बीच भारत में कई जगहों पर हुए बम धमाकों को अंजाम देने से संबंधित होने का आरोप था। 

असीमानंद के खिलाफ मुकदमा उनके इकबालिया बयान के आधार पर बना था लेकिन बाद में वो ये कहते हुए अपने बयान से मुकर गए थे कि उन्होंने वो बयान टॉर्चर की वजह से दिया था।
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