अब एक हाथ-पैर से विकलांगों को सड़क पर दौड़ रही कारों को देखकर मन नहीं मसोसना पड़ेगा। यदि उनकी पहुंच में कार है तो वह खुद बिना किसी सहयोगी के उसे सड़क पर सरपट दौड़ा सकेंगे वह भी बेहद सुलभ तरीके से। न केवल सामान्य व्यक्ति की तरह कार चला पाएंगे बल्कि किसी को यह एहसास तक नहीं होगा कि कार चलाने वाला व्यक्ति विकलांग है।
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कमाल की तकनीक, अब एक हाथ-पैर वाले भी चला सकेंगे कार
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इस तरह से कार चलाने के लिए एक पूर्णत: स्वदेशी तकनीक ईजाद की है रवि अत्री ने। टेक्निक को नाम दिया गया है ‘हैंड कंट्रोल्स’। करनाल के अशोका नर्सरी कुंजपुरा रोड निवासी रवि खुद भी पैर से अक्षम हैं। 15 साल की उम्र में ही गाड़ियां चलाने का शौक मन में था और इसी शौक को पूरा करने की चाह में यह टेक्निक ही ईजाद कर डाली।
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कमाल की तकनीक, अब एक हाथ-पैर वाले भी चला सकेंगे कार
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रवि द्वारा ईजाद की गई स्वदेशी तकनीक से कार चलाने के लिए एक विशेष किट लगाई जाती है। इस पर 5 हजार से 55 हजार रुपये तक का खर्च आ सकता है। सामान्य तौर पर एक गाड़ी में 15-20 हजार रुपये का खर्च आता है। साथ ही यह निर्भर करता है कि कितने प्रतिशत विकलांगता है और किस हिस्से में है।
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पहले खुद के लिए टेक्निक तैयार की, अब दूसरों को 2 साल से यह सेवाएं दे रहे हैं। बतौर रवि इसके लिए कम से कम एक हाथ होना जरूरी है। रवि का अगला लक्ष्य ऐसे लोगों के लिए तकनीक का ईजाद करना है, जिनके दोनों हाथ नहीं हैं, केवल पैर हैं। इस प्रपोजल को होंडा व मारुति को भी भेजा गया है।