बेटी जन्मी तो कलयुगी मां ने उसे झाड़ियों में फेंक दिया। वह अखबार में लिपटी थी और आसपास चूहे घूम रहे थे। अब वही नवजात जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है।
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झाड़ियों में मिली नवजात
पंचकूला के सेक्टर-8 में एक प्लाट में फेंकी गई नवजात बच्ची की हालत गंभीर बनी हुई है। चंडीगढ़ पीजीआई के एडवांस पिडियाट्रिक्स सेंटर में वह जिंदगी और मौत के बीच एक-एक सांस के लिए जद्दोजहद कर रही है। पीजीआई के डॉक्टरों के मुताबिक अगर बच्ची अगले 24 घंटे जिंदा रही, तभी उसके बचने की उम्मीद है। क्योंकि उसे जब पीजीआई में लाया गया तो उसका पूरा शरीर ठंडा पड़ गया था। बीपी बिल्कुल लो था।
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झाड़ियों में मिली नवजात
फिलहाल उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही है, इसलिए ऑक्सिजन पर रखा गया है। डॉक्टरों के मुताबिक वह बच्ची को बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। इस समय बच्ची को एंटीबायोटिक पर रखा गया है। बता दें कि शनिवार को सेक्टर आठ के खाली पड़े एक प्लॉट में महिला को नवजात बच्ची पड़ी मिली। शनिवार सुबह कोठियों में काम करने वाली महिला ने पार्क के पास झाड़ियों में अखबार में लिपटी कोई चीज हिलती दिखाई दी। आस पास चूहे भी घूम रहे थे।
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झाड़ियों में मिली नवजात
महिला को शक हुआ और उसने चूहे भगाए। अखबार हिलाकर देखा तो बच्ची के रोने की आवाज आने लगी। महिला ने लोग इकट्ठे किए और पुलिस को सूचना दी। मौके पर सेक्टर-7 पुलिस चौकी से पुलिस मुलाजिम भी पहुंचे और बच्ची को तुरंत जनरल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने बच्ची का चेकअप किया तो हालत नाजुक थी। जांच में पता चला कि बच्ची का जन्म 12 घंटे पहले ही हुआ था।
करीब पांच घंटे तक जनरल अस्पताल में बच्ची का इलाज कर उसे चंडीगढ़ पीजीआई रेफर किया गया। जब बच्ची को रेफर किया गया तो बच्ची की हालत पहले से कुछ बेहतर थी। एचओडी डॉ. मुक्ता ने बताया कि बच्ची को जब अस्पताल लाया गया था तो उसका शरीर नीला पड़ा था। सांस लेने में दिक्कत आ रही थी। लगता है कि बच्ची का जन्म प्री मेच्योर डिलीवरी है। बच्ची नौ माह के बजाय करीब साढ़े सात आठ माह में जन्मी है।