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इस नवरात्रि बन रहा शुभ संयोग, भूल से भी न करे ये गलतियां, अशुभ होता है

Wed, 20 Sep 2017 09:14 AM IST
नीरज कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़
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navratri - फोटो : navratri
21 सितंबर 2017 से शुरू हो रहे नवरात्रि में इस बार 12 साल बाद शुभ संयोग बन रहा है। ऐसे में जरूरी है कि आप भूलकर भी ये सभी गलतियां न करें, अशुभ हो सकता है।
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navratri - फोटो : navratri
सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र कहते हैं कि नवरात्रि का व्रत रखने वालों को न ही अपने बाल कटवाने चाहिए और शेविंग भी नहीं करवानी नहीं चाहिए। वैसे इस दौरान बच्चों का मुंडन करवाना शुभ होता है। यदि आप इस दौरान कलश की स्‍थापना करते हैं और अखंड ज्योति जला रहे हैं तो इस समय घर को खाली छोड़कर कहीं भी न जाएं।
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durga puja, navratri - फोटो : durga puja, navratri
बीरेंद्र नारायण मिश्र कहते हैं कि नवरात्रि में नॉन वेज, प्याज, लहसुन आदि की मनाही है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि नवरात्रि के पूरे नौ दिन तक नींबू काटना अशुभ होता है। विष्‍णु पुराण के अनुसार मां दुर्गा के इन नौ दिनों में दोपहर के समय सोना नहीं चाहिए। इससे व्रत रखने का उचित फल नहीं मिलता। इस बार नवरात्रि में 12 वर्षों के बाद गुरु अमृतमय योग बन रहा है। नवरात्रि 21 सितंबर से शुरू हो रहा है।

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नवरात्र - फोटो : amar ujala
नवरात्रि का प्रारंभ तुला राशि में वीरवार होने के कारण यह योग बन रहा है। नवरात्रि 20 सितंबर दिन में 11 बजकर एक मिनट से शुरू होकर 21 सितंबर दिन वीरवार को सुबह 10 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। यह कहना है का। उनका कहना है कि धर्म सिंधु के अनुसार यदि सूर्योदय के 10 घटी तक प्रतिपदा है तो उसी दिन नवरात्रि प्रारंभ और कलश स्थापना किया जाता है। अमावस्या तिथि में नवरात्रि का प्रारंभ निषेध माना गया है।
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navratri - फोटो : amar ujala
बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह ब्रह्म मुहूर्त में है। इसका समय सुबह पांच बजे से सुबह छह बजकर 10 मिनट तक है। इसके बाद सूर्योदय सुबह छह बजकर 14 मिनट से सात बजकर 14 मिनट तक वीरवार का होरा होने के कारण भी शुभ समय है। वीरवार का दिन और वृहस्पति का होरा, शुभ की चौघड़िया और कन्या लग्न में नवरात्रि का प्रारंभ और कलश पूजन बहुत ही शुभदायक है। इसलिए इस योग को गुरु अमृत योग नाम से जाना जाता है।
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मंदिरों में की गई पूजा अर्चना - फोटो : अमर उजाला
सात बजकर 14 मिनट से दिन में 10 बजकर 35 मिनट तक ही कर सकते हैं।10 बजकर 35 मिनट के बाद कलश स्थापना नहीं करनी चाहिए। क्योंकि इसके बाद द्वितीया तिथि प्रारंभ हो जाती है। सेक्टर-15 के जय श्री राम ज्योतिष केंद्र के प्रमुख स्वामी राम बहादुर मिश्र का कहना है कि देवी व्रत में कन्या पूजन का बहुत ही महत्व है।
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नवरात्रि
अपनी समर्था के नवरात्रि में प्रतिदिन नौ कुमारी कन्याओं की पूजन करनी चाहिए। एक कन्या की पूजन से ऐश्वर्य, दो से मोक्ष, तीन से धर्म अर्थ काम, चार की पूजा से राजपक्ष से लाभ, पांच की पूजा से विद्या, छह की पूजा से यंत्र मंत्र तंत्र की प्राप्ति, सात की पूजा से राजपद की प्राप्ति, आठ की पूजा से धन और नौ कन्याओं की पूजन से विजय की प्राप्ति होती है।
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नवरात्रि का महत्व
ऐसे मनाएं मां को
सेक्टर-30 के शिव शक्ति मंदिर के प्रमुख पुजारी श्याम सुंदर शास्त्री और देवालय पूजक परिषद के कोषाध्यक्ष व सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ लाल बहादुर दुबे का कहना है कि गौरी गणेश और कलश स्थापन के पूजन करने के बाद देवी का पूजन करनी चाहिए। शांति पाठ के उपरांत संकल्प कर दीपक की पूजा करनी चाहिए। आरती के बाद पुष्पांजलि और क्षमा प्रार्थना करना चाहिए।
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