भाजपा की राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा देने के एक सप्ताह बाद नवजोत सिंह सिद्धू मीडिया में खुलकर बोले पर पत्ते नहीं खोले। देखिए, 6 खास बातें।
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नवजोत सिद्धू की प्रेस कांफ्रेंस
- फोटो : ANI
प्रेस कांफ्रेंस में सिद्धू बोले, 'मैंने इस्तीफा दिया क्योंकि मुझसे कहा गया था कि पंजाब की तरफ मुंह नहीं करोगे।' 'मुझसे कहा गया कि तुम पंजाब से दूर रहोगे। धर्मों में सबसे बड़ा धर्म राष्ट्रधर्म होता है तो फिर कैसे मैं अपनी जड़, अपना वतन छोड़ दूं।' 'चार इलेक्शन जीतने के बाद राज्यसभा देकर कहा जाता है कि सिद्धू पंजाब से दूर रहो। पंछी भी शाम को अपने घौंसले में लौटता है। राष्ट्रभक्त पक्षी भी अपने पेड़ नहीं छोड़ते।
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नवजोत सिद्धू की प्रेस कांफ्रेंस
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सिद्धू आगे कहते हैं कि पार्टी पंजाब से ऊपर नहीं है, अपने निजी स्वार्थों के लिए उन लोगों को नहीं छोड़ सकता जिन्होंने मुझे वोट दिया।' मोदी लहर आई तो मुझे डुबो दिया, मुझसे अमृतसर छोड़ने को कहा गया, पंजाब या पार्टी को चुनने को कहा गया, मैंने पंजाब चुना, जहां पंजाब का हित होगा, सिद्धू साथ खड़ा मिलेगा। एक नहीं तीन चार बार नाइंसाफी हुई। मुझे मेरा कसूर बताया जाए, पंजाब छोड़ने की शर्त क्यों?
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नवजोत सिद्धू की प्रेस कांफ्रेंस
- फोटो : ANI
सिद्धू कहते हैं कि ''ये नफे नुकसान की बात नहीं है। ये पहली बार हुआ हो तो भी नाकाबिले बरदास्त है। ये तो तीसरी चौथी बार हो रहा है। जब मेरे साथ नाइंसाफी हुई।''जब पहली बार मैं अमृतसर से इलेक्शन लड़ा। ''मैं पाकिस्तान में कमेंट्री कर रहा था। मुझे कहा गया आप इलेक्शन लड़ो। 17 दिन बचे थे। मैंने कहा कि इतने कम दिन में कैसे चुनाव लड़ सकता हूं। 5-6 नेताओं के फोन मेरे पास आए।''जब आंधियां चलती थी तब तो सिद्धू जाए।
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नवजोत सिद्धू की प्रेस कांफ्रेंस
- फोटो : ANI
सिद्धू कहते हैं कि ''14 दिन में इलेक्शन लड़ा। 6 बार का कांग्रेस का एमपी था। 9 के नौ 14 दिन में अमृतसर के लोगों ने सवा लाख लोगों ने जिताया।'' जब केस पड़ा। केस पड़ते ही बड़े नेता ने कहा सरेंडर कर दो तो एक पर्सेंट चांस है कि दोबारा एमपी बन जाओ। अमृतसर को वचन दिया जबतक आपका एमपी रहूंगा पटियाला नहीं जाऊंगा। घरवाली का मुंह नहीं देखा। बच्चों का मुंह नहीं देखा।'' अगले दिन बेल हुई। मॉरल ग्राउंड के ऊपर दूसरी बार इलेक्शन लड़ा, फिर जीता।
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नवजोत सिद्धू की प्रेस कांफ्रेंस
- फोटो : ANI
सिद्धू आगे कहते हैं कि तीसरा इलेक्शन नॉर्थ इंडिया की 50 सीटों पर बीजेपी का अकेला सिद्धू सांसद था। हारी हुई सीट जीतकर दे दी। जब मोदी साहब की लहर आई तो विरोधी के साथ सिद्धू भी साफ हो गया। मुझे कुरुक्षेत्र और वेस्ट दिल्ली से टिकट देने की बात कही गई। मैंने मना कर दिया। मुझे कहा गया पंजाब छोड़कर चला जाए। मेरा कुसूर क्या है। अगर मुझे 100 बार अपने परिजन, अपने परिवार, अपनी पार्टी और पजांब में से चुनने को कहा गया तो मैं सौ बार पंजाब चुनुंगा।''
सिद्धू ने अपनी भावी योजना के बारे में ज्यादा खुलासा नहीं किया था, लेकिन संकेत हैं कि वह अपनी पार्टी में राज्य में चल रही चीजों से नाखुश थे। दरअसल सिद्धू के आम आदमी पार्ट में जाने की अटकलें हैं। हांलाकि पंजाब के भाजपा अध्यक्ष विजय सांपला भी कह चुके हैं कि सिद्धू भाजपा के साथ थे और रहेंगे। जबकि सिद्धू की पत्नी नवजौत कौर ने साफ़ किया था कि राज्यसभा से इस्तीफे का मतलब भाजपा से भी इस्तीफा है।