हम आपको बता रहे हैं कि सेना के उस अफसर के बारे में, जो बॉक्सिंग के चैम्पियन थे और उनका रिकॉर्ड आज तक कोई नहीं तोड़ पाया। जानिए कौन हैं वो वीर बहादुर...
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हवा सिंह की बायोपिक
- फोटो : फाइल फोटो
बात हो रही है दो बार के एशियन चैम्पियन, अर्जुन अवार्डी और मरणोपरांत द्रोणाचार्य अवार्डी कैप्टन हवा सिंह की, जिन पर एक बायोपिक बनने जा रही है। फिल्म अभिनेता आदित्य पांचोली के बेटे सूरज पांचोली उनका किरदार निभाएंगे। 2016 में इस फिल्म की घोषणा हुई थी।
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- फोटो : फाइल फोटो
1964 में गलत तरीके से अयोग्य घोषित होने के कारण कैप्टन हवा सिंह को ओलंपिक खेलने का मौका नहीं मिला, लेकिन ओलंपिक पदक विजेता को धूल चटाकर उन्होंने दिखा दिया कि वे भी चैम्पियन हैं। उन्होंने 1966 व 70 में लगातार एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया।
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बॉक्सर, कैप्टन हवा सिंह
- फोटो : फाइल फोटो
कैप्टन के बेटे संजय श्योराण ने बताया कि 1966 में उनके पिता एशियन गेम्स में ओलंपिक में पदक विजेता इराक के मुक्केबाज खटामिन को फाइनल में हराकर चैम्पियन बने थे। वर्ष 1970 में हुए एशियन गेम्स में एक बार फिर सेमीफाइनल में इराक के इसी मुक्केबाज को हराया।
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बॉक्सर, कैप्टन हवा सिंह
- फोटो : फाइल फोटो
कैप्टन हवा सिंह पहले ऐसे मुक्केबाज हैं, जो दो बार एशियन चैम्पियन रहे। उन्होंने 1961 से 1972 तक लगातार नेशनल बॉक्सिंग चैम्पियनशिप जीती थी और उनके इस रिकॉर्ड की बराबरी आज तक कोई नहीं कर पाया।
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बॉक्सर, कैप्टन हवा सिंह
- फोटो : फाइल फोटो
कैप्टन हवा सिंह को वर्ष 1966 में अर्जुन अवॉर्ड से नवाजा गया। वर्ष 2000 में उन्हें मरणोपरांत द्रोणाचार्य अवॉर्ड दिया गया। कैप्टन के बेटे संजय श्योराण भी राष्ट्रीय स्तर के मुक्केबाज रहे है और भीम अवार्ड जीत चुके हैं। उनकी बेटी नुपूर श्योराण भी बॉक्सिंग में नेशनल स्तर पर कई पदक जीत चुकी हैं।
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बॉक्सर, कैप्टन हवा सिंह
- फोटो : फाइल फोटो
संजय श्योराण भिवानी में अपने पिता कैप्टन हवा सिंह के नाम से बॉक्सिंग एकेडमी चला रहे हैं। फिल्म के हीरो सूरज पांचोली ने संजय श्योराण से ही बॉक्सिंग की बारीकियां सीखीं। सूरज को ट्रेनिंग देने के लिए संजय मुंबई भी गए थे। नुपूर ने भी उन्हें बॉक्सिंग के कई दाव पेंच सिखाए।
कैप्टन हवा सिंह का जन्म 16 दिसंबर 1937 को हरियाणा के भिवानी जिले के गांव उमरवास में हुआ था। 19 साल की उम्र में वे भारतीय सेना में शामिल हुए। सेना में रहते हुए ही उन्होंने बॉक्सिंग शुरू की। 1960 में उन्होंने उस समय के चैम्पियन मोहब्बत सिंह को हराकर वेस्टर्न कमांड का खिताब हासिल किया था।