पंजाब कला भवन में टीएफटी समर थिएटर फेस्टिवल के अंतिम दिन बुधवार शाम को प्रसिद्ध लेखक बलवंत गार्गी के नाटक लोहा कुट का मंचन हुआ।
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तस्वीरों में देखिए, मंच पर अभिनय का जीवंत प्रदर्शन
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अनुभवी कलाकार अनीता शब्दीश और सुदेश शर्मा ने अपने अभिनय से इस पुरानी कहानी को एक बार फिर से मंच पर जीवंत कर दिया।
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मुख्य किरदार लोहार काकू लोहे के साथ अपने पत्नी-बच्चों को भी अपने अनुसार ढालना चाहता है। वह उनकी इच्छाओं को महत्त्व नहीं देता। उसकी पत्नी संती उसे ताना देती है ‘लोहा कुटदे-कुटदे तूं आप लोहे दा हो गया।’
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नाटक में कोई बहुत नए प्रयोग नहीं थे। कई बार देखी और सुनी जा चुकी कहानी थी, इसके बावजूद कलाकारों ने दर्शकों को बांधे रखा।
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चाहे बेबस मां का दृश्य हो या असफल प्रेमिका और बेअसर पत्नी का, अनीता शब्दीश ने बड़ी सफलता से इन्हें अपने किरदार में उतारा। नाटक निर्देशन भी सुदेश शर्मा ने किया।