मां! मां, ईश्वर का दूसरा रूप है, क्योंकि ईश्वर हर समय हर जगह इंसान के साथ मौजूद नहीं रह सकते, इसलिए उन्होंने मां का साथ इंसान को दिया। पढ़िए, भगवान के इस दूसरे रुप की महानता की 5 बेमिसाल कहानियां।
पंजाब के जालंधर की एक मां मंजीत कौर की कहानी पढ़कर आप उन्हें सलाम किए बिना नहीं रह सकेंगे। ये मां अपने बच्चों को उच्च शिक्षा देने के लिए दिन-रात एंबुलेंस चलाती हैं। पंजाब की एक मात्र एंबुलेंस चालक मंजीत कौर 2010 से अपने बीमार पति और बेटे का सहारा बनी हुई हैं। इस मां की चाहत है कि उसका बेटा अच्छी नौकरी करें। उसका और अपने पापा का सहारा बने। इसके लिए वह जब तक एंबुलेंस चला सकेंगी, चलाएंगी। उनकी इच्छा है कि उनके बेटे को यूनिवर्सिटी में दाखिला मिले।
लुधियाना निवासी नेशनल और स्टेट अवार्डी लेखिका डॉ. गुरचरण कौर कोचर अपनी मां की बेमिसाल कहानी सुना रही हैं। वे बताती हैं कि उन्हें अपनी मां से एक ही शिक्षा मिली कि हर मुश्किल में भी बच्चों को शिक्षा देकर एक मुकाम पर पहुंचाना है। मां ने कपड़े सिल कर मुझे एक मुकाम तक पहुंचाया। मैंने भी अपने बच्चों की सफलता के लिए रोड मॉडल की तरह काम किया और दोनों बेटों को इंजीनियर बनाया। मां केवल पांचवीं पास थी। पिता लड़कियों को ज्यादा पढ़ाने में विश्वास नहीं रखते थे, जबकि मां का एक ही सपना था कि उनकी बेटी उच्च शिक्षा हासिल करे। इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने दिन रात मेहनत भी की।
मुक्तसर की रहने वाली नीलम एक मिसाल हैं। नीलम सेठी भी ऐसी ही मां हैं जिन्होंने हमेशा अपने बच्चों का भला सोचा और उन्हें मेहनती व काबिल बनाया। करीब चौदह वर्ष पहले नीलम सेठी के पति भारत भूषण सेठी का निधन हो गया। नीलम ने हिम्मत नहीं हारी और अपने दम पर बच्चों को पढ़ा-लिखा काबिल इंसान बनाया। आज नीलम का एक बेटा वेटरिनरी डॉक्टर है तो दूसरा न्यूजीलैंड में इलेक्ट्रिॉनिक्स कंपनी में मैनेजर है।
गुरदासपुर निवासी एक शहीद की मां जीतो देवी की कहानी जानकर आप रो ही देंगे। इस मां का बेटा सुनील मदर्स-डे पर शहीद हो गया था। जीतो देवी बताती हैं कि वे जब भी आंखें खोलती हैं, उन्हें बेटे का चेहरा दिखाई देता है। आज भले ही उनके बेटे को शहीद हुए नौ साल बीत गए हैं लेकिन उसके स्पर्श की अनुभूति वह हर मदर्स-डे पर महसूस करती हूं।
एससी जाति में जन्म, विकलांगता, महिला और ऊपर से गरीबी। किसी के भी धैर्य को तोड़ने के लिए ये चार चीजें अपने आप में पहाड़ सरीखी समस्या हैं लेकिन जिले की एक महिला ने इन्हीं चीजों को अपनी ताकत बनाया और अपने पांच बेटों को पढ़ा-लिखाकर ऐसे ओहदे पर पहुंचाया, जहां पहुंचाने का ख्वाब अच्छे-अच्छे घरों के लोग करते हैं। एक बेटा हरियाणा सरकार के कृषि महकमे में अतिरिक्त मुख्य सचिव है, दो बैंक अधिकारी तो एक आर्मी से अच्छे पद पर रिटायर हुआ है। ये मां है हरियाणा में रेवाड़ी के गांव रोलियावास की मिश्री देवी।