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मानसून अलर्ट: जमीन से निकलते हैं 6 तरह के सांप, देखिए हर सांप की खूबी

Thu, 07 Jul 2016 09:30 AM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़।
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snakes
मानसून की बारिश आते ही जमीन से सांपों के निकलने का खतरा बढ़ जाता है। सांप 6 तरह के होते हैं, इनमें 3 जहरीले होते हैं और बाकी कम जहर के। देखिए, खास रिपोर्ट। 
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Common-Krait
कॉमन करैत
मानसून सीजन शुरू  होते ही कॉमन करैत बिल के बाहर आ जाते हैं। यह देश के सबसे जहरीलों सांपों में से एक है। यह आम तौर पर रात के वक्त काटता है। खासतौर पर रात 12 बजे से लेकर सुबह चार बजे के बीच, जब लोग सो रहे होते हैं। जंगल से निकलकर यह जमीन पर पड़े बिस्तर में घुसने की कोशिश करता है, ताकि उसे गरमाहट मिल पाए। यह जमीन पर सो रहे लोगों के साथ चिपक भी जाता है। जब लोग हिलते-ढुलते हैं तो यह काट लेता है। जब यह काटता है तो लोगों को बिल्कुल भी अहसास नहीं होता। लोगों को ऐसा महसूस होता है कि उसे किसी चींटी या मच्छर ने काटा हो। यह मुख्य रूप से कान के पास, गले, चेस्ट और पेट पर काटता है। कई बार देखा गया है कि सोते वक्त जब कॉमन करैत किसी व्यक्ति को काटता है तो वह सोता ही रह जाता है। इसके काटने से मरीजों में न्यूरोपैरालाइसिस होता है और दम घुटने लगता है। इसके काटने पर 60 प्रतिशत व्यक्तियों की मौत हो जाती है। इसकी लंबाई 100 सेंटीमीटर होती है। बीच-बीच में सफेद रंग की धारियां बनी होती हैं। पानी के साथ लगते गार्डन और फार्म हाउस में पाया जाता है। जब कॉमन करैत काटता है तो बिना देर किए मरीज को अस्पताल ले जाना चाहिए। यह चंडीगढ़ सहित पूरे उत्तर भारत में पाया जाता है।
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russells viper
रसेल वाइपर 
यह अजगर जैसा दिखता है। खाकी रंग के साथ इस पर गहरे भूरे रंग के फूल जैसे बने होते हैं। यह अक्सर सूखे पत्तों, झाड़ियों, खेती बाड़ी और पानी वाली जगहों पर मिलता है। सुखना लेक और रॉक गार्डन के आसपास अक्सर देखा जाता है। बहुत कम बार यह साफ जगहों पर देखा जाता है। यह ऐसे नहीं काटता, जब किसी का पैर इस पर पड़ता है तो यह बचाव में काट लेता है। इसके काटने से सबसे ज्यादा किसानों की मौत होती है। जब यह काटता है तो कई लोग समझते हैं कि अजगर ने काट लिया। इस लापरवाही के कारण लोग इलाज नहीं कराते और उनकी मौत हो जाती है। यह सालभर दिखते हैं। ठंड के वक्त यह झाड़ियों में धूप सेंकने भी निकलता है। रसेल वाइपर के काटने पर बहुत तेजी से दर्द होता है। उसके बाद शरीर में सूजन, उल्टियां, ब्लीडिंग और किडनी फेल हो जाती हैं।

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cobra
कोबरा
इसकी गिनती भी जहरीले सांपों में होती है। यह तीन तरह का होता है। पहला चित्तीदार, काला और भूरे रंग का। रसेल वाइपर के मुकाबले इसकी फुहार कम होती है। यह लोगों से दूर रहना चाहता है, लेकिन चूहों का बहुत शौकीन होता है। चूहों के चक्कर में यह घर के किचन, स्टोर रूम और बाथरूम में घुसकर बैठ जाता है। यह तभी काटता है, जब किसी व्यक्ति का पैर या फिर हाथ लग जाए। इस इलाके में कोबरा सबसे ज्यादा पाया जाता है। यह कम से कम छह फुट लंबा होता है। इसके काटने पर भी व्यक्ति की मौत हो जाती है।
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rat snake
रेट स्नैक 
रेट स्नैक में जहर बिल्कुल भी नहीं पाया जाता। यह मुख्य रूप से गिलहरी, चिड़िया और उनके अंडे खाने का शौकीन होता है। चूहों को भी खाता है। गिलहरी और चिड़ियां के अंडे को खाने के लिए यह पेड़ों पर भी चढ़ जाता है। इसके काटने पर थोड़ी घबराहट होती है, लेकिन मौत का खतरा नहीं रहता। यह कई बार पेड़ों के सहारे घर के अंदर तक घुस जाता है। कई बार सांप विशेषज्ञ सलीम ने कूलर और एसी के अंदर से रेट स्नैक को पकड़ा है।
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Checkered Keelback E
चेकर्ड कीलबैक
यह पानी वाली जगहों के आसपास पाया जाता है। धनास लेक  और घग्गर के इसे देखा जा सकता है। यह मुख्य रूप से मछली और मेंढक खाने का शौकीन होता है। कई बार पानी की तलाश में नाले के सहारे किचन या कमोड में पहुंच जाता है। सांप की यह प्रजाति भी शहर में काफी पाई जाती है। इसमें जहर बिल्कुल नहीं होता।
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Lycodon_aulicus_(Common_Wolf_Snake_)
वूल्फ स्नैक 
पंजाब यूनिवर्सिटी के आसपास के इलाकों में यह काफी पाया जाता है। यह बिना प्लास्टर वाली दीवारों पर आसानी से चढ़ जाता है। यह छिपकली के बच्चों और कॉकरोच खाने का शौकीन होता है। गहरे ब्राउन कलर होने के साथ यह ज्यादा मोटा नहीं होता। इसमें पीले रंग की धारियां होती हैं। इसमें भी जहर बिल्कुल नहीं पाया जाता।

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python
अजगर
इस इलाके में अजगर भी काफी पाया जाता है। सुखना लेक, घग्गरपुल या फिर ट्यूबवेल के आसपास कई बार इसे पकड़ा गया है। रॉक गार्डन से कई बार अजगर के बच्चों को पकड़ा गया है। आमतौर पर यह सर्दियों के मौसम में ज्यादा दिखता है।

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snake - फोटो : daily mail
सांप निकलने पर इन नंबरों पर कॉल करें
यदि आपके घर से सांप निकलता है तो इस बारे में चंडीगढ़ के फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं। डिपार्टमेंट की टीम के सदस्य घर आकर सांप को पकड़ लेंगे। इसके लिए लोगों को रेंज फॉरेस्ट आफिसर 7087041948, हॉटलाइन नंबर 4639999, फॉरेस्टर एंड वाइल्ड लाइफ इंस्पेक्टर 9216428398, फॉरेस्ट गार्ड 09915127299, फॉरेस्टर 9780180238, आफिस लैंडलाइन नंबर (केवल ऑफिस टाइम) 0172-2700217, 0172-2700284 पर कॉल कर सकते हैं। यदि इन नंबरों से मदद नहीं मिल पाती है तो सांप पकड़ने के एक्सपर्ट सलीम खान के मोबाइल नंबर 9878687500 पर कॉल कर सकते हैं।

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चंडीगढ़ में घर में निकाल सांप - फोटो : अमर उजाला
झाड़-फूंक के बजाय नजदीकी अस्पताल ले जाएं
पीजीआई व प्राइवेट हास्पिटल के विशेषज्ञ बताते हैं कि सांप काटने पर मरीज को झाड़-फूंक या किसी देसी दवा दिलाने के बजाय उसे नजदीकी अस्पताल ले जाएं। मानसूनी सीजन में अस्पताल में एंटी वैनम वैक्सीन जिला और अस्पताल प्रशासन को प्राथमिकता के तौर पर उपलब्ध कराना चाहिए। पीजीआई में हर वक्त एंटी वैनम मौजूद रहती है। कई बार तो सांप काटने वाले पेशेंट में एंटी वैनम लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।

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सड़क किनारे होता सांपों का प्रेमालाप - फोटो : अमर उजाला
ये होते हैं लक्षण
1. घाव के दो निशान
2. घाव के आसपास सूजन और लालपन
3. सांस लेने में दिक्कत
4. उल्टियां
5. आंखों के सामने अंधेरा
6. घाव वाले स्थान पर जलन
7. चेहरे और पैर में अकड़न

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सतीश्‍ा कुमार, स्नैक मैन
सांप काटने पर ये नहीं करना चाहिए
1. सांप काटने वाले अंग को नहीं हिलाना चाहिए
2. पेशेंट को न तो चलना चाहिए और न ही दौड़ना चाहिए
3. घाव वाले स्थान पर न तो कट लगाएं, न ही उसे जलाएं
4. समय बर्बाद न करें
5. न तो डरना चाहिए और न तो डर फैलाना चाहिए।

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अंबेडकरनगर जिला अस्पताल में उपचार भर्ती सर्पदंश का शिकार बालिका। - फोटो : अमर उजाला
हर सीजन में करीब 100 से ज्यादा केस
पीजीआई से मिली जानकारी के मुताबिक मानसूनी सीजन के दौरान सिर्फ पीजीआई में 100-150 केस आते हैं। इसमें हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब और हिमाचल के मरीज होते हैं। इसके अलावा जीएमसीएच-32, पंचकूला और मोहाली के जिला अस्पतालों में भी मरीज आते हैं। पीजीआई की ओर से बताया गया है कि उनकी इमरजेंसी की टीम हर वक्त तैयार रहती है। साफ तौर पर निर्देश हैं कि स्नैक बाइट के मरीजों का इलाज प्राथमिकता के तौर पर किया जाए।
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अंबेडकरनगर जिला अस्पताल में रविवार को भर्ती सर्पदंश के शिकार मरीज। - फोटो : अमर उजाला
विशेषज्ञ बताते हैं कि थोड़ी सी सावधानी से सांपों के खतरों से बचा जा सकता है। आधे से ज्यादा लोगों की जान इसलिए चली जाती है, क्योंकि वे झाड़-फूंक के चक्कर में फंस जाते हैं। सांप काटने के बाद यदि व्यक्ति को तुरंत अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है। चंडीगढ़ और आसपास के इलाकों में सांपों की करीब छह प्रजाति पाई जाती हैं। इनमें तीन सांप काफी जहरीले हैं। बाकी में जहर नाम मात्र का होता है।
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