पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह सूबे से वीआईपी कल्चर खत्म करने का बीड़ा उठा चुके हैं। उनकी कैबिनेट ने भी इसे पास कर दिया है। लेकिन कई लोग अभी भी इसका मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं।
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लाल बत्ती का क्रेज
खासतौर पर पहली बार जीते विधायकों में लाल बत्ती का क्रेज बरकरार है। खेमकरण से विधायक गुरचेत भुल्लर ने एक दिन पहले लाल बत्ती लगा ली थी। हालांकि शुक्रवार को वह विधानसभा पहुंचे तो उन्होंने लाल बत्ती हटा दी थी। लेकिन इस बात का मलाल उनके चेहरे पर साफ दिख रहा था। भुल्लर के पिता सुखपाल भुल्लर कई बार विधायक रहे, मंत्री भी बने। पर वह पहली बार विधायक बने हैं।
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लाल बत्ती का क्रेज बरकरार
38 वर्षीय भुल्लर मायूसी से कहते हैं कि लाल बत्ती बगैर स्वाद नई आऊंदा है। भुल्लर ने कहा कि वह कैप्टन अमरिंदर से अपील करेंगे कि उन्हें लाल बत्ती लगा लेने दें। क्योंकि उनकाइलाका सीमांत क्षेत्र है, वहां आतंकी हमलों से लेकर अन्य वारदात होती रहती है। सुरक्षा की दृष्टि से भी जरूरी है।
भुल्लर दावा करते हैं कि बैसाखी पर नशा मुक्त समाज का तोहफा पार्टी देगी। भुल्लर ने बताया कि उन्होंने अपने हलके में धार्मिक स्थानों से लाउडस्पीकरों द्वारा नशे केखिलाफ अनाउंसमेंट शुरू करवा दी है।