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मिस इंडिया बनने के बाद पहली बार घर आईं मानुषी छिल्लर, कई मुद्दों पर बेबाक बोलीं

Wed, 05 Jul 2017 09:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बहादुरगढ़(हरियाणा)
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मिस इंडिया 2017 मानुषी छिल्लर
मिस इंडिया 2017 बनने के बाद मानुषी छिल्लर पहली बार घर आईं तो जोरदार स्वागत हुआ। इस दौरान वे पहली बार मीडिया से रूबरू हुईं और अपने इरादे साफ किए।
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'मिस इंडिया 2017' मानुषी छिल्लर
सोमवार को मानुषी छिल्लर अपने पैतृक गांव बामनोली पहुंची तो पूरा गांव आशीर्वाद देने के लिए उमड़ा। गांव के बुजुर्गों ने मानुषी को चांदी की प्रतिमा भेंट कर आशीर्वाद दिया। गांव के बच्चे, बूढ़े, जवान ही नहीं बल्कि महिलाएं भी मानुषी की एक झलक पाने के लिए कार्यक्रम स्थल पर इकट्ठा हुए। शाम को जब मानुषी छिल्लर ने गांव की धरती पर पैर रखा तो सभी ने उन्हें पलकों पर बैठा लिया।
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'मिस इंडिया 2017' मानुषी छिल्लर
गाड़ी से उतरते ही मानुषी पर फूलों की बरसात शुरू हो गई और साथ में सेल्फी का दौर भी। गांव पहुंचते ही मिस इंडिया मानुषी छिल्लर सबसे पहले अपने पूर्वजों द्वारा बनाए गए मंदिर में पहुंची। मानुषी ने यहां पर भगवान शिव के दर्शन किए और पूजा अर्चना की। यहां पर मानुषी के साथ उसका पूरा परिवार साथ था। उन्होंने भी मंदिर में पूजा की। मंदिर के पुजारी ने उन्हें मंदिर के बारे में भी बारीकी से बताया।

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'मिस इंडिया 2017' मानुषी छिल्लर
इस मौके पर मानुषी छिल्लर ने कहा कि मुझे लगता है कि इस बारे में हर महिला को जागरूक बनाना जरूरी है। इसलिए मेरा ध्यान महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण पर है। मैंने ‘शक्ति परियोजना’ नाम से एक कार्यक्रम शुरू किया है, जिसके जरिए महिला सुरक्षा व सशक्तीकरण के बारे में महिलाओं को जागरूक कर रही हूं, क्योंकि इस मुद्दे को मैं बेहद जरूरी समझती हूं।’
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'मिस इंडिया 2017' मानुषी छिल्लर
मंदिर में पूजा कि बाद मानुषी छिल्लर बैंक कॉलोनी स्थित अपनी नानी के घर पहुंची। नानी से बेहद लगाव होने के चलते उनकी जिद थी कि लंबी ट्रेनिंग से पहले वह उनसे जरूर मिलेंगी। यहां उन्होंने 45 मिनट रुककर केवल बचपन की यादों को ताजा किया, बल्कि भविष्य के बारे में भी खुलकर बातचीत की। मानुषी ने नानी को बताया कि अब वे मुंबई में मिस वर्ल्ड की ट्रेनिंग के लिए रवाना होंगी।
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'मिस इंडिया 2017' मानुषी छिल्लर
मानुषी ने कहा कि हरियाणा की आन-बान-शान तो एक औरत ही है। वे परदे के पीछे रहने वाली नहीं, बल्कि परदे से बाहर आकर अपनी पहचान बनाने वाली महिलाएं हैं। इसलिए औरतों को घूंघट में रखने के बजाय उड़ने के लिए आसमान दें। इसके लिए समाज की पुरुषवादी को सोच को अपना नजरिया बदलना होगा। यह नजरिया भी तभी बदलेगा, जब महिलाएं आगे आकर चैलेंज स्वीकार करेंगी और खुद को साबित करेंगी।
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'मिस इंडिया 2017' मानुषी छिल्लर
मिस इंडिया मानुषी ने कहा कि महिलाओं पर जो अत्याचार या अपराध हो रहे हैं वे महिलाओं पर नहीं, बल्कि पूरे समाज के खिलाफ हैं। इसके खिलाफ कड़े कानून बनाने होंगे। वह चैंपियनशिप के बाद शक्ति प्रोजेक्ट पर फोकस करेंगी। सरकारी स्कूलों और रूरल एरिया में लड़कियों को महीने के दिनों में खुद को हाइजीन रखने के लिए जागरूक करेंगी।

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'मिस इंडिया 2017' मानुषी छिल्लर
मानुषी ने कहा कि भले ही टेक्नोलॉजी का जमाना है, लेकिन आज भी घर और स्कूलों में लड़कियां इस पर बात करने से हिचकिचाती हैं। सरकार ने भले ही सेनेटरी पैड पर जीएसटी बढ़ा दिया है, लेकिन मार्केट में सस्ते दामों पर भी सेनेटरी पैड हैं। लोगों को महिलाओं के प्रति सोच बदलनी होगी। खेलकूद हो या अन्य कोई क्षेत्र, आज सभी में बेटियां आसमान छू रही हैं।

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'मिस इंडिया 2017' मानुषी छिल्लर
मानुषी ने घूंघट को लेकर चल रहे विवाद पर कहा कि लोग अपना नजरिया बदलकर देखें तो घूंघट के पीछे प्रदेश की एक सशक्त महिला की तस्वीर मिलेगी। ऐसी महिला जो खुद काम कर परिवार को मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि कहा कि वर्तमान में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं। सोचने वाली बात यह है कि यह अपराध किसी महिला के नहीं, बल्कि पूरे समाज के खिलाफ हैं।

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'मिस इंडिया 2017' मानुषी छिल्लर
मानुषी ने कहा कि समाज को एक साथ मिलकर इसके खिलाफ आवाज उठानी होगी। घूंघट को लेकर घिरी प्रदेश सरकार को लेकर कहा कि लोग घूंघट क्यों देख रहे हैं? घूंघट के पीछे जीने वाली उस महिला का संघर्ष देखना चाहिए, जो सिर पर बोझ लिए खड़ी है। प्रदेश की महिला खुद काम कर परिवार को मजबूत बनाने में सक्षम है। ऐसे में उस पर विवाद खड़े नहीं करने चाहिए। लोगों को महिलाओं के प्रति सोच बदलनी होगी।
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Manushi Chillar
बेटियों को लेकर मानुषी ने कहा कि वह समय चला गया है कि जब बेटियों पर बंदिश लगाई जाती थी। अब बेटियों को स्वतंत्र रहने देना चाहिए। वह हर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। मिस इंडिया बनने में आई चुनौतियों पर कहा कि जब परिवार और समाज साथ दें तो कोई भी चुनौती मुश्किल नहीं होती। मिस इंडिया बनने की राह कठिन जरूर थी। सभी के सहयोग से यह मंजिल मिल गई।
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