लेह-लद्दाख में तैनात सेना के जवानों को बहुत जल्द एक बड़ी सुविधा मिलेगी। इस दिशा में प्रयास शुरू हो गए हैं। जानिए क्या है वो सुविधा?
विज्ञापन
लेह-लद्दाख में तैनात सेना के जवानों को मिलेगी ये बड़ी सुविधा
2 of 7
लेह के 40 डिग्री के माइनस तापमान में तैनात जवानों को पीने को दूध मिल सकेगा। इसके लिए पशुओं के विकास पर शोध किया जाएगा। इस संबंध में लालालाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन(डीआरडीओ) ने करार किया है, जिसके तहत लुवास के वैज्ञानिक लेह में पशु उत्पादन, पशु विकास व दुग्ध उत्पादन पर शोध करेंगे। लुवास के वैज्ञानिक लेह जाकर वहां पर चल रहे सेना के शोध कार्यों को भी देखेंगे।
विज्ञापन
लेह-लद्दाख में तैनात सेना के जवानों को मिलेगी ये बड़ी सुविधा
3 of 7
लेह में 40 डिग्री माइनस में देश के जवान सरहदों की रक्षा करते हैं। सर्दी और बरसात में खाने-पीने के सामान की भारी कमी बनी रहती है। करीब छह महीनों तक सेना के जवानों को लेह के ग्रामीणों के भरोसे जीवन बिताना पड़ता है। इसी को देखते हुए यह करार किया है। जिसके तहत लेह में भेड़, गाय, बकरियां, खच्चरों आदि के विकास को एक नए आयाम तक ले जाया जाएगा। इससे ग्रामीणों को भी आर्थिक लाभ होगा।
लेह-लद्दाख में तैनात सेना के जवानों को मिलेगी ये बड़ी सुविधा
4 of 7
कुलपति कार्यालय के कमेटी रूम में यह समझौता स्नातकोत्तर अध्ययन अधिष्ठाता डॉ. एनके राखा और उच्च अभियान अनुसंधान रक्षा संस्थान, लेह के निदेशक डॉ. भुवनेश कुमार ने कुलपति मेजर जनरल डॉ. श्रीकांत, अनुसंधान निदेशक डॉ. रविंद्र शर्मा आदि की उपस्थिति में किया। पिछले डेढ़ साल से हम लुवास के साथ यह करार करने का प्रयास हो रहा था।
विज्ञापन
लेह-लद्दाख में तैनात सेना के जवानों को मिलेगी ये बड़ी सुविधा
5 of 7
डॉ. भुवनेश कुमार ने बताया कि डीआरडीओ की स्थापना 1962 में हुई थी। लेह के माइनस 40 डिग्री पर उत्पादन करना बहुत बड़ी समस्या थी। ऐसे में हमारे वैज्ञानिकों ने सब्जियों की 101 नस्ल पैदा कर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। इन्हीं 101 सब्जियों की किस्मों में से 26 सब्जियों को सेना के राशन में शामिल किया गया हैं। लेह में हमारी तकनीक से ही 30 से 40 प्रतिशत सब्जियों का उत्पादन होता है। बंकरों में मुर्गी पालन किया जाता है और सोलर फार्मों में भेड़-बकरी का पैदा करते हैं।
विज्ञापन
लेह-लद्दाख में तैनात सेना के जवानों को मिलेगी ये बड़ी सुविधा
6 of 7
लुवास को लेह में पाई जाने वाली जर्सी और साहीवाल गायों की दुग्ध उत्पाद क्षमता को बढ़ाना है। इसके अलावा भेड़ व बकरी की प्रजनन क्षमता के साथ खच्चरों की क्षमता बढ़ाने पर शोध करने होंगे। डॉ. भुवनेश कुमार ने बताया कि खच्चरों की कार्यक्षमता को बढ़ाना बहुत जरूरी है। वह पहाड़ों पर सामान ढोने के काम आता है।
लेह-लद्दाख में तैनात सेना के जवानों को मिलेगी ये बड़ी सुविधा
7 of 7
लुवास के कुलपति डॉ. श्रीकांत का कहना है किलुवास की वैश्विक पहचान बनेगी और अनुसंधान के लिए नए विकल्प खुलेंगे। इस समझौते के तहत दोनों संस्थान आपस में वैज्ञानिकों व विद्यार्थियों का आदान-प्रदान कर सकेंगे।