कुएं की खुदाई चल रही थी। अचानक ऐसी चीजें निकलने लगी, जिन्हें देखकर सभी के होश उड़ गए। आप भी देखेंगे तो आंखें खुली रह जाएंगी, देखिए तस्वीरें।
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कालियांवाला खूंह
पाकिस्तान से सटे अमृतसर जिले के अजनाला सेक्टर में स्थित 1857 का शहीदी कुआं एक बार फिर चर्चा में है। 1857 में लाहौर से आए ब्रिटिश सेना से बगावत करने वाले सैकड़ों भारतीय सैनिकों को इस कुआं में दफन कर दिया गया था। यह सैनिक देश की आजादी के लिए ‘राष्ट्रीय विद्रोह’ करते हुए लाहौर व अमृतसर के बीच रावी दरिया तैर कर इस इलाके में छद्म भेष में छिपे थे।
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कालियांवाला खूंह
इस बात की खबर अमृतसर जिले के डीसी एफएच कूपर तक पहुंची। उन्होंने जनरल डायर से अधिक क्रूरता दिखाई और सभी सैनिकों को जिंदा कुआं में फिकवां दिया था। 157 वर्ष बाद इस कुआं की खुदाई 2015 में हुई तो 282 नरकंकाल मिले थे। कुछ दिन पहले ही सिख श्रद्धालुओं ने 'कालिया वाला खूह' नामक इस कुएं की खुदाई कर अवशेषों को निकाला था। बाद में इस कुएं को 'शहीदोंवाला कुआं' कहा जाने लगा था।
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कालियांवाला खूंह
26 जनवरी शुक्रवार को दोबारा शहीदी वाला खूह प्रबंधक कमेटी कुआं को शहीदों के नमन करने के लिए संवारने के काम के तहत खुदाई शुरू हुई। कालिया वाला खूह यादगारी फाउंडेशन कमेटी ने यहां सफाई कराई तो कई पुरातत्व चीजें यहां नजर आई। मिट्टी के तमाम छोटे-बड़े बर्तन मिले हैं। इन चीजों को देखने के लिए लोगों की यहां लाइन लग गई। यहां खुदाई में पानी निकालने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली चीजें, मटके, नरकंकाल, खोपड़ियां आदि मिले हैं।
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कालियांवाला खूंह
इससे पहले 28 फरवरी 2015 में यह खुदाई 1857 के इन शहीदों को नमन करते हुए इन पर रिसर्च कर रहे इतिहासकार सुरेंद्र कोछड़ ने करवाई थी। तब 282 नरकंकाल की हड्डियां मिली थी। शहीदों के 6636 दांत मिले थे। जिसे डीएनए व फोरेंसिक जांच के लिए चंडीगढ़ भेजा गया था। अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है। दांतों पर रिसर्च अभी चल रही है। कोछड़ मानते हैं कि जनरल डायर से अधिक क्रूरता 1857 के शहीद सैनिकों के साथ हुई इस घटना से साफ दिख रही है।
नरसंहार की अंग्रेजों ने बनाई थी योजना
अगस्त 1857 में अमृतसर के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर फ्रेडरिक हैनरी कूपर और कर्नल जेम्स जॉर्ज ने इस नरसंहार की योजना बनाई थी। कूपर ने अपनी पुस्तक "द क्राइसिस ऑफ पंजाब" में भी इस घटना का उल्लेख किया है। नरसंहार में मारे गए क्रान्तिकारी अंग्रेजों की बंगाल नेटिव इन्फेंट्री से संबंद्ध थे, जिन्होंने बगावत कर दी थी। इनमें से अंग्रेजी सेनाओं ने 150 को गोली मार दी, जबकि 283 सिपाहियों को रस्सियों से बांध कर अजनाला लाया गया और इस कुएं में फेंक दिया गया था।