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छुट्टी से आकर बेटी की शादी करनी है, लेकिन अब शहादत ने तोड़ दिया परिवार का सपना

Wed, 26 Apr 2017 12:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत(हरियाणा)
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देश का ये लाल अक्सर फोन पर छुट्टी से आकर कई काम निपटाने की बात करता था, इस बार उसे अपनी बेटी के हाथ पीले करने थे। लेकिन अब उसकी शहादत ने पूरे परिवार को अंदर तक तोड़ दिया है।
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बेटी की शादी धूमधाम से करके उसे विदा करना हर मां-बाप का सपना होता है। यही सपना छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सली हमले में शहीद हुए नरेश कुमार ने देखा था। वह 18 दिन पहले जब घर से छुट्टी काटकर वापस छत्तीसगढ़ ड्यूटी पर गए थे तो परिवार वालों से वादा किया था कि पांच महीने बाद आकर बेटी की शादी करूंगा। नरेश ने बेटी के लिए लड़का भी देख रखा था। बस शादी पक्की करनी बाकी थी, लेकिन नरेश इससे पहले ही शहीद हो गए।
 
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नरेश के परिवार वालों ने बताया कि वह 26 फरवरी को सात अप्रैल तक की छुट्टी लेकर घर आए थे। वह सात अप्रैल को वापस जाने लगे तो कहा था कि वह पांच महीने बाद फिर छुट्टी लेकर आएगा क्योंकि इस बार बेटी की शादी करनी है। इसके लिए लड़का देखा हुआ है, लेकिन शादी पक्की करनी है और उसकी तैयारियां भी करनी हैं। इसके लिए काफी समय लगेगा और वह दो महीने की छुट्टी लेकर आएगा, जिससे बेटी की शादी आराम से करेगा।

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 शहीद की पत्नी राजबाला ने बताया कि वह घर में जब भी फोन करते थे तो यही बात कहते थे कि इस बार छुट्टी पर आकर कई काम निपटाने हैं। उसके साथ परिवार वालों की रविवार को 11 बजे आखिरी बार बात हुई और उसने गेहूं की फसल से लेकर बच्चों के एडमिशन के बारे में पत्नी राजबाला से पूछा था। उनके बीच लगभग आधा घंटे तक बात हुई और उसके बाद सोमवार को दोबारा बात करने के लिए कहा गया। 
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नरेश के पास पत्नी राजबाला ने सोमवार को फोन मिलाया तो वह स्विच ऑफ आया, जिससे उसकी चिंता बढ़ गई, क्योंकि उनको पता था कि छत्तीसगढ़ में नक्सली हमला हुआ है। मंगलवार सुबह लगभग चार बजे नरेश के शहीद होने की सूचना घर पहुंची। इसके बाद से परिजनों की आंखों से आंसू थम नहीं रहे हैं।
 
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नरेश भले ही नक्सली हमले में शहीद हो गए हों, लेकिन उनके बेटों का जज्बा कम नहीं हुआ है। वह अपने पिता का देश सेवा का फर्ज पूरा करने की बात कहते हैं। शहीद नरेश के परिवार वालों का दर्द उस समय दोगुना हो गया, जब जिले में मंगलवार को दो केंद्रीय मंत्रियों के अलावा एक प्रदेश की कैबिनेट मंत्री मौजूद रहीं, लेकिन शहीद के घर तक किसी ने जाने की जरूरत नहीं समझी। 
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