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देखिए, शहीद को दी विदाई तो कैसे रोया आसमां?

Mon, 08 Dec 2014 11:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
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जम्मू कश्मीर के उरी सेक्टर में आतंकवादी हमले में शहीद हुए कुलदीप का अंतिम संस्कार अलेवा खंड के गांव खेड़ीबुल्ला में राजकीय सम्मान के साथ कर दिया गया। श्रद्धांजलि देने के लिए राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और गांवों के लोग बड़ी संख्या में सुबह से ही गांव खेड़ीबुल्ला में डटे थे।
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शहीद कुलदीप की पत्नी रेखा का कहना है कि उसको अपने पति की शहादत पर गर्व है। सभी मांओं को ऐसे ही लालों को जन्म देना चाहिए जो देश के लिए काम आ सकें। उसके पति ने अपने देश की रक्षा के लिए हंसते- हंसते अपने प्राणों की आहुति दी है। उसके पति की शहादत को देश कभी भूल नहीं पाएगा। रेखा ने कहा कि वह अपने पति कुलदीप की तरह अपने बेटे दीप को भी देशभक्ति का पाठ पढ़ाकर सेना में भेजेगी।
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शहीद के पार्थिव शरीर के साथ हिसार से ब्रिगेडियर अमित लूंबा, कर्नल योगेश चौहान सेना के 50 जवानों की टुकड़ी लेकर गांव पहुंचे थे। इससे पहले शहीद के पार्थिव शरीर जब गांव पहुंचा तो पूरा गांव गम में डूब गया। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी अंतिम दर्शनों को लालायित थे।

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शव यात्रा में सेना के जवान आगे-आगे चल रहे थे, जबकि पीछे भारी संख्या में लोग ‘शहीद कुलदीप अमर रहे,’ ‘जब तक सूरज-चांद रहेगा, कुलदीप तेरा नाम रहेगा,’ के नारे लगाते हुए चल रहे थे। शहीद कुलदीप की चिता को मुखाग्नि उसके मंझले भाई वजीर ने दी। ग्रामीणों ने नम आंखों से लाडले को अंतिम विदाई दी।
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कुलदीप का शव जम्मू से दिल्ली तक हवाई मार्ग से लाया गया। इसके बाद आर्मी के जवान सैन्य गाड़ी में पार्थिव शरीर लेकर हिसार कैंट पहुंचे। यहां से ब्रिगेडियर अमित लूंबा के नेतृत्व में सेना के जवानों की टुकड़ी शव लेकर बुल्लाखेड़ी गांव पहुंची। सुबह करीब तीन बजे सेना के जवान शव लेकर गांव पहुंचे तो शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए कुलदीप के घर लोगों तांता लग गया।
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देश के इतिहास में कुलदीप का नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। शहीद कुलदीप के अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे ब्रिगेडियर अमित लूंबा ने कुलदीप के अंतिम संस्कार के बाद कुलदीप के पिता मोलड़राम को तिरंगा भेंट कर उनके पैर छूए।
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शहीद कुलदीप के साथी लायंस नायक गुरविंद्र ने बताया कि कुलदीप की ड्यूटी गन एरिया में थी। शुक्रवार सुबह कुलदीप अपनी ड्यूटी पर तैनात था। इसी दौरान लगभग 6 आतंकवादियों ने उन पर हमला कर दिया। कुलदीप ने अपने साथियों के साथ मिलकर आतंकवादियों को मुंह तोड़ जवाब दिया।
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शहीद कुलदीप के पिता मोलड़राम ने कहा कि उसे अपने बेटे की शहादत पर गर्व है कि उसके बेटे का जीवन देश के काम आया। उसके बेटे कुलदीप का जितना जीवन था वह देश की रक्षा के लिए गुजरा। कुलदीप ने जंग के मैदान में दुश्मनों को मुंह तोड़ जवाब देते हुए अपने देश, प्रदेश अपने जिले तथा गांव का नाम रोशन किया है। मोलड़राम ने कहा कि ऐसा बेटा बड़े सौभाग्य से मिलता है।
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