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23 लोगों की मौत का कौन गुनाहगार! मरे हुए व्यक्ति के नाम पर चल रही थी फैक्ट्री, पढ़ें कई खुलासे

Fri, 06 Sep 2019 02:03 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बटाला (पंजाब)
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बटाला में फैक्ट्री में धमाका - फोटो : अमर उजाला
श्री गुरु रामदास कालोनी में पटाखा फैक्ट्री में बुधवार शाम हुए धमाके में मारे गए 23 लोगों में से 21 की पहचान कर ली गई। इनमें से चार तो फैक्ट्री के मालिक ही हैं। इस हादसे में बड़ी लापरवाही भी सामने आ रही है। डीसी गुरदासपुर विपुल उज्ज्वल और एसएसपी बटाला उपिंदरजीत सिंह घुम्मन ने बताया कि फैक्ट्री का लाइसेंस जसपाल सिंह के नाम पर है जिसकी कई साल पहले मौत हो गई थी। 
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बटाला धमाका - फोटो : अमर उजाला
यह लाइसेंस भी तीन साल पहले एक्सपायर हो गया है जिसे उसके परिजनों ने रिन्यू नहीं करवाया था। पुलिस ने मृतक जसपाल सिंह के परिजनों पर मामला दर्ज किया है। हादसे में मारे गए मालिकों के पारिवारिक सदस्य ही इस फैक्ट्री को चला रहे थे। प्राथमिक जांच में यह सामने आया है कि पटाखों में चिंगारी की वजह से ब्लास्ट हुआ है। वर्ष 2017 में इसी फैक्ट्री में हादसा हुआ था। धमाके में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और तीन लोग घायल हो गए थे।
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- फोटो : अमर उजाला
उसके बाद मजिस्ट्रेटी जांच के साथ पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने जांच के आदेश जारी किए थे। जांच के बाद फैक्ट्री के मालिक को क्लीयरेंस दे दी गई थी। पूरी जांच में फैक्ट्री का लाइसेंस एक्सपायर होने पर ध्यान नहीं दिया गया।

यह पटाखा फैक्ट्री रिहायशी इलाके में कैसे चल रही थी, इसकी छानबीन की जा रही है। इस मामले को वह डीसी ऑफिस और एसडीएम ऑफिस बटाला में चेक करवा रहे हैं। इस हादसे के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-विपुल उज्ज्वल, डीसी, गुरदासपुर  

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- फोटो : अमर उजाला
22 साल पहले जब फैक्ट्री शुरू हुई, तब आसपास दो-चार घर ही थे  
श्री गुरु रामदास कालोनी के निवासियों ने बताया कि यह पटाखा फैक्ट्री करीब 22 साल पुरानी है। यह फैक्ट्री तब की है जब कालोनी में दो-चार घर ही थे। यह 1997 से लगी है। आज इस कालोनी में करीब 300 घर हैं। घनी आबादी वाले क्षेत्र में ऐसी फैक्ट्री का होना बारूद के ढेर पर रहने वाली बात थी। इसके अलावा सबसे अहम बात यह है कि जहां फैक्ट्री है, उसी रोड पर बटाला का एक बड़ा स्कूल है। जहां यह ब्लास्ट हुआ है वह फैक्ट्री का सेल प्वाइंट था। मांग को बढ़ता देख फैक्ट्री मालिकों ने इसे ही मैन्यूफैक्चरिंग प्लेस बना लिया। इसका लाइसेंस भी किसी और जगह के नाम पर लिया हुआ था।
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- फोटो : अमर उजाला
 एक साथ जली छह चिताएं
 पटाखा फैक्ट्री में हुए धमाके के 6 मृतकों का अंतिम संस्कार बटाला के पुरियां शमशानघाट में किया गया। जैसे ही एंबुलेंस से शमशानघाट में शवों को लाया गया तो परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। सभी का पोस्टमार्टम गुरुवार को ही सिविल अस्पताल में किया गया। वहीं, अस्पताल में घायलों का हाल जानने के लिए कैबिनेट मंत्री तृप्त रजिंदर सिंह बाजवा, सांसद सनी देओल, आईजी पीएस परमार, आप विधायक अमन अरोड़ा भी पहुंचे।  
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- फोटो : अमर उजाला
नाराज पीड़ितों ने अस्पताल में डीसी की कार को घेरा
धमाके के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के प्रबंधों से नाराज पीड़ित परिवारों ने गुरुवार सुबह सिविल अस्पताल में डीसी विपुल उज्ज्वल की कार को घेर लिया। डीसी की कार के सामने पीड़ित परिवारों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। पुलिस ने लोगों के गुस्से को शांत किया। लोगों के गुस्से को देखकर डीसी ने अस्पताल के अंदर पीड़ित परिवारों से बात की।
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- फोटो : अमर उजाला
पीड़ित परिवारों ने डीसी को बताया कि वह पहले कई बार अवैध रूप से चल रही इस फैक्ट्री के बारे में प्रशासन को शिकायतें दे चुके हैं मगर किसी भी अधिकारी ने फैक्ट्री मालिकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। पीड़ितों ने कहा कि उनके परिजनों के शवों का निरादर किया गया है। पोस्टमार्टम में शवों के ढेर लगाकर रखे गए हैं जबकि मोर्चरी में शवों को रखने का कोई प्रबंध नहीं था। डीसी ने लोगों को इंसाफ दिलवाने का भरोसा दिया। इसके बाद हर बिंदू के आधार पर जांच की जाएगी। डीसी ने बताया कि सीएम ने पहले ही मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए हैं। इस पर लोगों ने कहा कि जांच को समयबद्ध किया जाए। 
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Batala - फोटो : अमर उजाला
रिहायशी इलाकों से बाहर हों ज्वलनशील जखीरे वाले उद्योग
आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान ने बटाला में पटाखा फैक्ट्री में धमाके पर दुख जताया है। इस हादसे की समयबद्ध न्यायिक जांच की मांग की है। ताकि भविष्य में ऐसे हादसों से बचा जा सके। मान ने कहा कि अगर सरकारी तंत्र अपनी जिम्मेदारी नियम-कानूनों के मुताबिक निभाता तो ऐसी घटना से बचाव हो सकता था। पर सरकार और उसके तंत्र को रिश्वतखोरी और कर्मचारियों के गैर जिम्मेदाराना रवैये ने खोखला कर दिया है। इसीलिए आए दिन ऐसी घटनाएं हो रही हैं। बटाला में ऐसी घटना दूसरी बार घटी। जबकि, जालंधर और संगरूर में भी ऐसे हादसे हो चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि रिहायशी इलाके में ऐसी फैक्ट्री लगाने की इजाजत कौन देता है।
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