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देखिए, मोदी के किस कानून से खुश नहीं 'छोटे मोदी'?

Thu, 19 Feb 2015 01:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा में 'छोटे मोदी' कहे जाने वाले सीएम खट्टर पीएम मोदी के एक कानून से ज्यादा खुश नहीं है। उनकी ये पीड़ा अमर उजाला से हुई एक्सक्लूसिव बातचीत में बाहर आ ही गई। तस्वीरों में देखिए, पूरा इंटरव्यू।
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ये कानून है मोदी सरकार का नया भूमि अधिग्रहण कानून। इस कानून के कुछ पहलुओं को लेकर खुद खट्टर सरकार चिंतित है। खट्टर ने यह माना कि खास स्थितियों में किसानों की सहमति के बिना जमीन लेने के प्रावधान से असंतोष फैलेगा।

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सीएम खट्टर ने यह भी संकेत दिया कि राज्य सरकार केंद्रीय कानून के समानांतर स्थानीय स्तर पर नई व्यवस्था लागू करने जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार किसान की तरक्की और उसकी भागीदारी के बिना आगे नहीं चल सकती। इसलिए किसान की सहमति का इंतजाम तो करना होगा।

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जब मुख्यमंत्री से पूछा गया कि क्या किसानों की सहमति के लिए वह केंद्रीय कानून के खिलाफ जाएंगे तो उन्होंने कहा कि सवाल खिलाफ जाने का नहीं है। हम उसके समानांतर एक नई व्यवस्था पर विचार कर रहे हैं। प्रदेश स्तर पर कानून में संशोधन पर जो विचार होगा या जिस नई व्यवस्था का खाका बनाया जाएगा, उसे केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा।
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क्या केंद्र से अधिग्रहण बिल पर पुनर्विचार की मांग गई है? इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं मानता हूं कि नई व्यवस्था बन सकती है। केंद्रीय बिल अपनी जगह रहे और हमारी व्यवस्था अपनी तरह से काम करेगी। हमारा मानना है कि लैंड की इमरजेंसी जैसी स्थिति को छोड़ कर किसान की सहमति के बिना जमीन नहीं ली जानी चाहिए।
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मुख्यमंत्री से पूछा गया कि क्या भाजपा की सरकार सत्ता हस्तांतरण की स्टेज पर ही अटक गई है और क्या व्यवस्था के हस्तांतरण की अगली स्टेज तक पहुंचने में अफसरशाहों की हठधर्मिता और भ्रष्टाचार आड़े आ रहे हैं? इस पर उन्होंने कहा कि प्रशासन के अधिकारी भी हरियाणा के समाज का हिस्सा हैं।
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सीएम खट्टर ने कहा कि मैं सीएम हूं, न्यायाधीश नहीं। सजा और दंड देने से पहले मुझे सुधार के रोडमैप के बारे में सोचना चाहिए। न ही मुझे पुराने निजाम के लोगों से बदला लेने की भावना पर काम करना है। यही मेरी रणनीति है। मैं अफसरशाही को वक्त दे रहा हूं कि वे पुरानी आदतों से बाज आएं और जनहित में अपने रवैये में सुधार करें।

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दिल्ली को पानी देने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा ने दिल्ली के हक को कभी नहीं रोका है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत हम तय हिस्से से ज्यादा पानी उसे दे रहे हैं। बल्कि मैं यह कहना चाहूंगा कि हरियाणा के साथ दूसरे सभी राज्यों के लोग भी दिल्ली में बसते हैं, इसलिए दिल्ली के प्रति सिर्फ हरियाणा की जिम्मेदारी नहीं बनती।

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स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के चुटीले ट्विटर संदेशों के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि अनिल विज के साथ उनका कोई मतभेद या असहमति नहीं है। मामला बस इतना है कि उनका अपना एक अलग स्वभाव है। और उधर हमारे मीडिया का भी अपना एक अलग स्वभाव है। यह जरूर है कि विज का सिस्टम में अनुभव ज्यादा है। इसलिए वह अपने तरीके से काम करते हैं।

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हरियाणा के विभिन्न विभागों में एसीपी, एक्सटेंशन, मेडिकल रिएंबर्समेंट, वेतन निर्धारण और प्रमोशन संबंधी सालों से लंबित चल रहे लगभग दस हजार केस निपटा दिए गए हैं। इसके अलावा सभी विभागों को इस बारे में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। छह सप्ताह बाद इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई है।
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मुख्यमंत्री ने विपक्ष को आरोपों को नकारते हुए साफ किया है कि अधिक उम्र के बुजुर्गों को पेंशन के लिए बैंकों के धक्के नहीं खाने पड़ेंगे। उनकी पेंशन बैंक में पहुंचेगी और उन्हें बैंक के एजेंट घर जाकर पेंशन देंगे। साथ ही उनके हस्ताक्षर करवा लिए जाएंगे।
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