हरियाणा में जाट आरक्षण को लेकर शुरू हुआ आंदोलन इतना ज्यादा हिंसक हो जाएगा, ये अंदाजा किसी को नहीं था। देखिए, आखिर इस आंदोलन के पीछे मुख्य वजह क्या है?
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जानिए, जाट आंदोलन की मुख्य वजह क्या, हिंसा क्यों भड़की?
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दरअसल, जाट नेता ओबीसी कैटेगरी में रिजर्वेशन चाहते हैं, लेकिन हरियाणा सरकार राजी नहीं थी। हरियाणा में कुल 67% रिजर्वेशन लागू है। इसमें शेड्यूल कास्ट को 20%, बैकवर्ड क्लास-ए को 16%, बैकवर्ड क्लास-बी को 11%, स्पेशल बैकवर्ड क्लास को 10% और इकोनॉमिकली बैकवर्ड क्लास-सी को 10% आरक्षण मिलता है। पूर्व हुड्डा सरकार ने 2012 में स्पेशल बैकवर्ड क्लास के तहत जाट, जट सिख, रोड, बिश्नोई और त्यागी कम्युनिटी को रिजर्वेशन दिया था।
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यूपीए सरकार ने भी 2014 में हरियाणा समेत 9 राज्यों में जाटों को ओबीसी में लाने का एलान किया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जाटों को पिछ़ड़ा मानने से इनकार कर यूपीए सरकार के फैसले पर स्टे लगा दिया। वहीं, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के भी एक फैसले के बाद 19 सितंबर 2015 को खट्टर सरकार को भी जाटों सहित पांच जातियों को आरक्षण देने के नोटिफिकेशन को वापस लेना पड़ा। यह नोटिफिकेशन हुड्डा सरकार के वक्त जारी हुआ था।
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इसी मांग को लेकर जाट पहले से धरने पर थे, लेकिन एक भाजपा सांसद के बयान से जाट भड़क गए। इससे आंदोलन हिंसक हो गया। कैथल से बीजेपी सांसद राजकुमार सैनी ने बयान दिया, ‘यदि सरकार दबाव में आकर जाटों को रिजर्वेशन देती है तो बीजेपी का कांग्रेस से भी बुरा हाल होगा। रेलवे ट्रैक सड़क जाम करने वाले नेताओं को शर्म आनी चाहिए। प्रदेश सरकार ऐसे लोगों पर मुकदमे दर्ज करे। ताकि उन्हें सबक मिले। जोर दिखाकर सरकार को झुकाया नहीं जा सकता।’
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इस बयान से जाट नेता भड़क गए। प्रदर्शनकारियों ने सैनी के घर पर हमला करने के साथ-साथ वित्तमंत्री, कृषिमंत्री के घर में तोड़फोड़ की। बाद में पार्टी ने सैनी को उनके बयान के लिए कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। आंदोलन हिंसक होता चला गया। न तो बीजेपी की सरकार इसे रोक पाई, न ही इंटेलिजेंस एजेंसियों को यह अंदाजा हुआ कि आंदोलन इतना हिंसक हो सकता है। शुक्रवार से आंदोलन बेकाबू हो गया। शनिवार को आर्मी बुलानी पड़ गई।
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हरियाणा सरकार पसोपेश में है। अगर रिजर्वेशन दिया तो... खट्टर सरकार ने एडमिनिस्ट्रेटिव ऑर्डर से मिल रहे एसबीसी कैटेगरी के आरक्षण को फिक्स करने के लिए विधानसभा में विधेयक लाने का भरोसा दिलाया है। विधानसभा में तो इसे पास करवाना सभी पार्टियों की मजबूरी होगी, लेकिन केंद्र में इस पर आपत्ति हो सकती है। ऐसा हुआ तो बीजेपी को नुकसान होगा। आरक्षण लागू हो भी गया तो बीजेपी का गैर-जाट वोट बैंक खिसक सकता है।
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और अगर आरक्षण नहीं दिया तो... : आंदोलनकारी और हिंसक हो सकते हैं। जाट वोट बैंक इनेलो और कांग्रेस के फेवर में जाएगा। हरियाणा में 30 फीसदी जाट हैं। 90 विधानसभा सीटों में से एक तिहाई पर जाटों का कब्जा है। राज्य के 12 में से 9 सीएम जाट रहे हैं। इसकी वजह यह है कि इनेलो ने जाट आरक्षण का पार्टी लेवल पर खुला समर्थन किया है। इधर, कांग्रेस में भी पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और नेता किरण चौधरी पुरानी व्यवस्था को बहाल करने पर जोर दे रहे हैं।