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ब्यूटी पार्लर में दुल्हन पर अपनों ने ही फेंका था एसिड, 20 दिन मौत से लड़ी और हार गई

Thu, 15 Jun 2017 09:17 AM IST
जतिंदर देवगन/अमर उजाला, बरनाला(पंजाब)
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लुधियाना हरप्रीत एसिड अटैक केस
7 दिसंबर 2013 की सुबह 7 फेरे लेने के सपने संजोए वह सैलून में सज संवर रही थी कि अपनों ने ही एसिड फेंक दिया। 20 दिन तक मौत से लड़ी और हार गई, दर्दनाक कहानी।
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लुधियाना हरप्रीत एसिड अटैक केस
तीन साल पहले हरप्रीत जब शादी करने के लिए ब्यूटी पार्लर में सज संवर रही थी तो ससुराल वालों के प्रति जेठानी की रंजिश उसके लिए जानलेवा साबित हुई। ब्यूटी पार्लर में कुछ लोगों ने दुल्हन पर तेजाब डाल दिया और हरप्रीत का चेहरा और शरीर बुरी तरह जल गया। 20 दिन तक मौत से संघर्ष करते हुए जीवन हार गई। बरनाला निवासी दविंदर कौर अपनी बेटी हरप्रीत के साथ घटना को याद कर सिहर उठती हैं।
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लुधियाना हरप्रीत एसिड अटैक केस
दविंदर ने बताया कि उनकी बेटी की शादी लुधियाना में तय हुई थी। 7 दिसंबर 2013 को जब हरप्रीत कौर लुधियाना के एक ब्यूटी पार्लर में शादी के लिए तैयार हो रही थी तो कुछ व्यक्तियों ने उसके ऊपर तेजाब डाल दिया। इस हादसे में उसकी सारा चेहरा और शरीर जल गया। झुलसी दुल्हन को तुरंत डीएमसी लुधियाना दाखिल करवाया गया, जहां उसकी नाजुक हालत को देखते हुए डीएमसी से मुंबई के अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया।

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लुधियाना हरप्रीत कौर एसिड अटैक
27 दिसंबर 2013 को इलाज के दौरान वहां उसकी मौत हो गई। दविंदर कौर ने बताया कि बेटी के इलाज में करीब 6 लाख रुपये का खर्च आया था। हरप्रीत के संस्कार पर पंजाब के तत्कालीन वित्त मंत्री परमिंदर ढींढसा आए और परिवार को 5 लाख रुपये की सहायता का चेक देकर गए। लेकिन सारा पैसा केस लड़ने पर लग गया।
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लुधियाना हरप्रीत कौर एसिड अटैक
हरप्रीत की अंतिम अरदास पर राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा ने बेटे को सरकारी नौकरी और लड़की की याद में एक पार्क बनाने का एलान किया था। लेकिन उनका वादा खोखला निकला। दविंदर ने बताया कि उनके बेटे दलजीत सिंह को सुविधा सेंटर बरनाला में थोडे़ वेतन पर कच्ची नौकरी दी गई थी, लेकिन बाद में उसे निकाल दिया गया।
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लुधियाना हरप्रीत कौर एसिड अटैक
फिर उसकी जगह दविंदर कौर को बेटे की जगह कच्ची नौकरी पर रखा गया लेकिन सुविधा सेंटर भंग होने के कारण अब वह घर में बैठी है। हरप्रीत की मां बताती हैं कि बाद में उनके बेटे दलजीत सिंह की मौत हो गई। उसका पति जसवंत सिंह बीमार रहने के कारण कोई काम नहीं करता, एक लड़का अर्शदीप सिंह भी बेरोजगार है। गरीबी के चलते उसे पढ़ाई भी बीच में छोड़नी पड़ी, अब उनके घर में कमाने वाला कोई नहीं है।
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लुधियाना हरप्रीत कौर एसिड अटैक
दविंदर कौर ने बताया कि आरोपियों की तरफ से केस वापस लेने के लिए उसे 60 लाख रुपये की आफर आई थी। लेकिन वह अपनी बच्ची की आत्मा को इंसाफ दिलाना चाहती थी, इसलिए उनका आफर ठुकरा दिया। 25 दिसंबर 2016 को लुधियाना अदालत ने सभी आरोपियों को उम्रकैद सुना दी। वह कहती हैं कि कोर्ट ने उन्हें और मरहूम बच्ची को तो इंसाफ दे दिया, लेकिन सरकार ने न तो उनको नौकरी दी और न ही पार्क बनवाया।

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लुधियाना हरप्रीत एसिड अटैक केस
आरोपियों के नामः अमृतपाल कौर उर्फ परी पत्नी अमरिंदर सिंह निवासी पटियाला, परमिंदर सिंह उर्फ पवन उर्फ विक्की पुत्र जीत सिंह निवासी पटियाला, जसप्रीत सिंह उर्फ मंटू पुत्र चरणजीत सिंह निवासी फतेहगढ़ साहिब, गुरसेवक सिंह उर्फ बराड़ उर्फ सोनी पुत्र रमन कुमार निवासी पटियाला, राकेश कुमार उर्फ प्रेमी पुत्र जसपाल सिंह निवासी फतेहगढ़ साहिब एवं अश्विनी कुमार पुत्र रविंदर कुमार निवासी पटियाला
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लुधियाना हरप्रीत एसिड अटैक केस
मां दविंदर ने बताया कि हरप्रीत कौर की जेठानी अमृतपाल कौर को उसके पति ने छोड़ दिया था। उसने तभी कहा था किसी लड़की को उनके घर में ब्याहने नहीं देगी। उसका टारगेट बनी हरप्रीत कौर, जो जेठानी की रंजिश की भेंट चढ़ गई। हरप्रीत बताती हैं कि आरोपियों को सजा दिलवाने के लिए हरप्रीत के परिवार वालों ने लुधियाना कोर्ट में 300 पेशियां भुगतीं। इसमें भी पांच लाख रुपये के करीब खर्च आ गया।
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