बात हो रही है पंजाब के मोहाली जिले के चप्पड़चिड़ी में शुरू हुए जिला स्तरीय पशु मेले में आए इन अदभुत पशुओं की। अली नाम के घोड़े और लाडो नाम की घोड़ी ने सबका दिल जीत लिया। दोनों दो साल के हैं। इतनी कम उम्र में दोनों कई अवार्ड जीत चुके हैं। दोनों की कीमत लाखों में है।
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अद्भुत बकरा और घोड़ी
- फोटो : अमर उजाला
लेकिन इनके मालिक इन्हें बेचने के लिए तैयार नहीं हैं। जानकारी के मुताबिक, बडाला निवासी हरचरण सिंह ने बताया कि अली मारवाड़ी नस्ल का है। उसकी ऊंचाई 66 इंच की है। उन्होंने बताया इसे छोले, चोकर व अन्य चीजों काफी पसंद हैं। वह पहली बार इस मेले में लेकर आए हैं। उन्हें पूरी उम्मीद है कि यह अपने नाम कई अवार्ड करेगा।
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इसी तरह कुरड़ी के सरपंच छज्जा सिंह ने बताया कि उनकी लाडो नाम की घोड़ी मारवाड़ी नस्ल की है। उन्होंने बताया कि इसके लिए दूध काफी पसंद है। भले ही इसके लिए कोई मोटी रकम भी उन्हें दे तो भी वह इसे बेचेंगे नहीं। उन्होंने बताया कि उम्मीद है कि आने वाले समय में कई अवार्ड अपने नाम करेगी। इसके अलावा कई अन्य घोड़े भी मेले में पहुंचे हुए थे।
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बकरी देती है पांच किलो दूध
मन्नाणा से छोटा सिंह अपनी बकरियों को लेकर मेले में आए हैं। उन्होंने बताया कि उनकी प्रत्येक बकरी पांच से छह किलो दूध देती है। इसकी कीमत उन्होंने 25 हजार रुपये तक रखी है। उन्होंने बताया कि जब डेंगू फैला हुआ था तो उन्होंने तीन सौ रुपये प्रति किलो से लेकर हजार रुपये तक दूध बेचा है।
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दूध देने वाले बकरे पर सब फिदा
क्या कभी सुना है कि बकरा दूध देता है। जी हां सुनने में जरूर अजीब लग सकता है, लेकिन यह सचाई है। चप्पड़चिड़ी में शुरू हुए पशु धन मेले में ऐसा ही एक बकरा सबके आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। हर कोई इस बकरे की झलक पाने के लिए बेताब है। वहीं, कई लोगों ने बकरे को मोबाइल में कैद किया। साथ ही बकरे संग सेल्फी के लिए भी होड़ लगी रही।
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बकरे के मालिक गोलू ने बताया कि कुराली के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि यह बकरा दूध देता है। इसके चलते ही उन्होंने इसे डेढ़ लाख में खरीदा है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब में यह दूध देने वाला अपनी तरह का पहला बकरा है। उन्होंने इसे पहली बार प्रतियोगिता में उतारा है। लोगों द्वारा इसे खूब सराहा जा रहा है। उन्होंने बताया कि जब प्रोग्राम शुरू हुआ तो इस बकरे को मंच पर भी पेश किया गया था।
जिसे वहां पर आए मेहमानों ने खूब पसंद किया। उन्होंने बताया कि इसे चने, गेहूं, मक्की समेत कई चीजें पसंद हैं। जिक्रयोग है कि 2001 में कुरुक्षेत्र के एक गांव में और अगस्त 2005 में जम्मू कठूआ में दूध देने वाले बकरे का मामला सामने आया था। वहीं, ताजा मामला 2009 में राजस्थान के झुंझुनू में सामने आया था। पशु विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला कोई चमत्कार नहीं, बल्कि चुनिंदा बकरों में एक खास प्रकार के विकार के कारण ऐसा होता है।