हरियाणा में लोकसभा चुनाव 2019 जीतने के लिए इंडियन नेशनल लोकदल(इनेलो) ने भी अपने सभी प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं। जानिए कौन राजनीति का कितना धुरंधर है...
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अर्जुन चौटाला
निशानेबाज अर्जुन चौटाला 12वीं पास हैं
ताऊ देवीलाल के प्रपौत्र और विधायक अभय चौटाला के छोटे पुत्र अर्जुन चौटाला को कुरुक्षेत्र से प्रत्याशी बनाया गया है। अर्जुन चौटाला 26 साल के हैं। वर्तमान में अर्जुन इनेलो की छात्र विंग के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। बारहवीं तक पढ़ाई करने के बाद अर्जुन ने पांच वर्षीय विधि संस्थान में दाखिला लिया था, लेकिन उन्होंने पढ़ाई बीच में छोड़ दी। खेलों में दिलचस्पी रखने वाले अर्जुन राइफल शूटिंग करते हैं और राष्ट्रीय स्तर तक निशानेबाजी प्रतियोगिताओं में भाग ले चुके हैं। उनके राजनीतिक कैरियर का यह पहला चुनाव होगा और उन पर अपने पिता की सियासी विरासत को आगे ले जाने की जिम्मेदारी भी होगी।
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बलवान सिंह यादव
किसान बलवान सिंह यादव दो माह पहले जुड़े थे इनेलो से
भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट से इनेलो के उम्मीदवार 38 वर्षीय बलवान सिंह यादव पूर्व सैनिक हैं। बलवान की शैक्षणिक योग्यता 12वीं पास है। वर्ष 2009 में भारतीय सेना के लांसनायक के पद सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद से वह अपनी साढ़े तीन एकड़ भूमि पर खेती करते हैं और कारोबार के रूप में एक सिक्योरिटी एजेंसी का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने दो माह पहले ही इनेलो ज्वॉइन की है और पहले कोई चुनाव नहीं लड़ा। उनके चचेरे भाई एक बार सरपंच रह चुके हैं।
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धर्मबीर फौजी
25 वर्षों से इनेलो से जुड़े हैं धर्मबीर फौजी
रोहतक लोकसभा क्षेत्र के प्रत्याशी 54 वर्षीय धर्मबीर फौजी पूर्व सैनिक हैं। वे लगभग 25 वर्षों से इनेलो से जुड़े हुए हैं। धर्मबीर फौजी इनेलो सैनिक प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। धर्मबीर ने भी 12वीं तक शिक्षा हासिल की है। वह 1991 में भारतीय सेना के सिपाही पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। इसके बाद से वह ओमप्रकाश चौटाला की पार्टी से जुड़े और कई पदों पर रहे। वर्तमान में वह इनेलो प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य हैं। धर्मबीर जीवन का पहला चुनाव लड़ेंगे। इससे पहले उनके परिवार में उनके बड़े भाई ने हलका कलानौर के गांव रिटौली से पंच का चुनाव लड़ा था। तब पंचायत ने उनके भाई को सर्वसम्मति से चुना था।
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चरणजीत सिंह रोड़ी
चरणजीत ने मुनीम से सांसद तक का सफर तय किया
चरणजीत सिंह रोड़ी सिरसा से इनेलो के मौजूदा सांसद हैं। उन्होंने 2014 के चुनाव में कांग्रेस के अशोक तंवर को हराया था। रोड़ी पहले कालांवाली से विधायक रह चुके हैं और उससे पहले जिला परिषद के मेंबर। रोडी में कभी अनाज मंडी में मुनीम का काम करने वाले सरदार चरणजीत सिंह रोड़ी की एकाएक किस्मत उस समय पलटी, जब रोड़ी गांव का सरपंच का पद वर्ष 2000 में आरक्षित हो गया था। चरणजीत सिंह रोड़ी निर्विरोध गांव के सरपंच बन गए। 2005 में जिला परिषद का चुनाव हुआ। टिकट मिली, चुनाव लड़ा और चरणजीत जीत गए। 2009 में नए परिसीमन में रोड़ी विधानसभा क्षेत्र खत्म करके कालांवाली विधानसभा बनाई गई। यह आरक्षित सीट थी। जिला परिषद के तौर पर अभी चरणजीत का कार्यकाल बाकी था, तो इस दौरान उन्हें कालांवाली से इनेलो और शिअद ने अपना संयुक्त उम्मीदवार बना दिया। रोड़ी ये चुनाव भी जीत गए। विधायक का पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं हुआ और चरणजीत सिंह को इनेलो ने 2014 में सिरसा से लोकसभा की टिकट दे दी। 2015 में मोदी लहर के बावजूद भी सिरसा में इनेलो ने यह सीट निकाल ली। अब इनेलो ने फिर से सांसद चरणजीत सिंह रोड़ी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है।
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सुरेंद्र छिकारा
पहली बार चुनाव लड़ रहे सुरेंद्र छिकारा
इनेलो ने सुरेंद्र छिकारा को सोनीपत से प्रत्याशी बनाया है। वे पार्टी के सबसे युवा चेहरा हैं। वे इनेलो के कार्यकारी जिलाध्यक्ष नियुक्त हैं। जजपा बनी तो पद्म सिंह के पार्टी छोड़ने के बाद इनको ज़िम्मेदारी दी गयी थी। इससे पहले उन्होंने कोई चुनाव नहीं लड़ा है। पार्टी में सक्रिय गतिविधि के चलते उन्हें टिकट दिया गया है। हालांकि सूत्र ये बताते हैं कि उन्होंने सीट की मांग नहीं की थी।
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सुरेश कौथ
खाप प्रधान और किसान संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष हैं सुरेश कौथ
हिसार से इनेलो प्रत्याशी सुरेश कौथ पार्टी के साधारण कार्यकर्ता हैं। वे कोथ गांव के रहने वाले हैं और वहां की 12 गांव की खाप के प्रधान हैं। वे किसान संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष भी हैं। वे कैप्टन अभिमन्यु के करीबी रहे हैं, लेकिन इनेलो ने चुनाव मैदान में उतार दिया है। इससे पहले वे इनेलो के कार्यकर्ता नहीं रहे, लेकिन टिकट मिलते ही इनेलो के गुणगान कर रहे हैं। उन्हें टिकट दिए जाने का दूसरा कारण दुष्यंत चौटाला हैं। जहां से सुरेश कोथ हैं, वो इनेलो का इलाका माना जाता है। दुष्यंत इस इलाके की वोटों में सेंधमारी कर सकते हैं। उन्होंने रोकने के लिए सुरेश को मैदान में उतारा गया। यह उनका पहला चुनाव है।
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रामपाल बाल्मीकि
महिला पार्षद ने रामपाल पर लगाए थे गंभीर आरोप
अम्बाला के उम्मीदवार रामपाल वाल्मीकि यमुनानगर के रहने वाले हैं। वे चार बार पार्षद रहे हैं, हालांकि पिछली बार पार्षद का चुनाव हार गए थे। 2013 में वे यमुनानगर से इनेलो के डिप्टी मेयर भी थे। इस दौरान एक महिला पार्षद ने उन पर अश्लील मैसेज करने का आरोप लगाया था। मामले में एफआईआर दर्ज हुई थी और उन्हें हाईकोर्ट से बेल मिली थी। लेकिन इस विवाद में उनकी डिप्टी मेयर की कुर्सी चली गई थी, पर बाद में समझौता हो गया था। वे पेपर मिल में मजदूरी करते हैं। वे टिकट के दावेदार नहीं थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें खुद टिकट थमाया है। मौजूदा समय मे रामपाल एससी सेल के जिला अध्यक्ष है।
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धर्मवीर पाढा
सक्रिय भूमिका के चलते मिला टिकट
करनाल से इनेलो ने धर्मवीर पाढ़ा को मैदान में उतारा है। वे असंध से इनेलो के हल्का अध्यक्ष भी हैं। मूलरूप से पाढ़ा गांव के धर्मवीर पानीपत में रहते हैं। पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं। पाढ़ा की आर्य समाज संस्था के अध्यक्ष भी रहे हैं। पार्टी में सक्रिय भूमिका के चलते उन्हें टिकट दिया गया। हालांकि इससे पहले उन्होंने कोई चुनाव नहीं लड़ा है।
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महेंद्र चौहान
पहली बार पलवल पर किया किसी राजनीति दल ने विश्वास
फरीदाबाद लोकसभा सीट पर इनेलो ने पलवल के अटोहां गांव के महेंद्र सिंह चौहान को उतारा है। वे 30 साल से राजनीति में सक्रिय हैं और करीब 20 साल से पार्टी में सक्रिय हैं। 12वीं की पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी और प्रभाकर किया था। 2008 में इनेलो ने उन्हें पलवल का जिलाध्यक्ष बनाया था। महेंद्र चौहान छह भाई हैं। तीन भाई ठेकेदारी करते है, एक भाई खेतीबाड़ी करता है व एक भाई जिला एक्साइज कमिश्नर एसपी चौहान व एक भाभी एडीसी अंजू चौधरी है। महेंद्र दो बार पलवल के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं और पिछले 15 सालों से लगातार प्रदेश सचिव के पद पर हैं। वे इनेलो सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला व अभय सिंह चौटाला के बेहद विश्वासपत्रों में से हैं।
वर्षों से चौटाला परिवार से जुड़ा है वीरेंद्र राणा का परिवार
इनेलो उम्मीदवार वीरेंद्र राणा के परिवार के किसी भी सदस्य ने अभी तक चुनाव नहीं लड़ा है। अपने परिवार से चुनाव लड़ने वाले वह पहले सदस्य हैं। आम ग्रामीण से उद्योगपति बन चुके वीरेंद्र राणा देश में कारोबार करने से पहले अमेरिका में रह चुके हैं। वहां वह करीब एक दशक तक रहे। दिल्ली सीमा पर बसे बजघेड़ा निवासी 46 वर्षीय वीरेंद्र राणा ने बीटेक तक शिक्षा ग्रहण कर रखी है। उन्होंने राज्य में एक टीवी न्यूज चैनल भी शुरू किया था, लेकिन कुछ साल के बाद उन्होंने यह चैनल बेच दिया।